Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ विकट नृसिंह विष्णु धर्मोत्तर पुराण ऋषि: प्रह्लाद छंद: त्रिष्टुप्

विकट नृसिंह कवच

Vikat Narasimha Kavach

विकट नृसिंह का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। अत्यंत विकट संकटों, घोर शत्रुता व रोग शमन हेतु।

फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

विकट नृसिंह कवच मूल श्लोक व भावार्थ

विनियोगः कवच श्लोक
ॐ अस्य श्री नृसिंहमन्त्रस्य प्रहराऋषिः । शिरसि । अनुष्टुभ् छन्दः मुखे । जीवो बीजं ह्रदि । अनन्तशक्तिः नाभौ । परमात्मा कीलकम् गुह्ये । श्रीनृसिंहदेवता प्रीत्यर्थे जप विनियोगः । शत्रुहानिपरोमोक्षमर्थदिव्य न संशयः । अथदिग्बंधः । पूर्वेनृसिंह रक्षेश्च ईशान्ये उग्ररुपकम् । उत्तरे वज्रको रक्षेत् वायव्यांच महाबले । पश्चिमे विकटो रक्षेत् नैऋत्यां अग्निरुपकम् । उत्तरे वज्रको रक्षेत् वायव्यांच महाबले । पश्चिमे विकटो रक्षेत् नैऋत्यां अग्निरुपकम् । दक्षिणे रौद्र रक्षेच्च घोररुपंच अग्नेय्याम् । ऊर्ध्व रक्षेन्महाकाली अधस्ताद्दैत्यमर्दनः । एताभ्यो दशदिग्भ्यश्च सर्वं रक्षेत् नृसिंहकः । ॐ क्रीं छुं नृं नृं र्हींर र्हींर रुं रुं स्वाहा ॥
सरल भावार्थ: विकट नृसिंह कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Vikat Narasimha Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
ॐ नृसिंहायनमः । ॐ वज्ररुपाय नमः । ॐ कालरुपाय नमः । ॐ दुष्टमर्दनायनमः । ॐ शत्रुचूर्णाय नमः । ॐ भवहारणाय नमः । ॐ शोकहराय नमः । ॐ नरकेसरी वुं हुं हं फट् स्वाहा । ॥ इति दिग्बंधनमन्त्रः ॥
सरल भावार्थ: विकट नृसिंह कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Vikat Narasimha Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
ॐ छुं छुं नृं नृं रुं रुं स्वाहा । ॐ वुं वुं वुं दिग्भ्यः स्वाहा । नृसिंहाय नमः । ॐ र्हंद र्हं। र्हंर नृसिंहांय नमः । अथ न्याः । ॐ अं ऊं अंगुष्ठाभ्यां नमः । ॐ नृं नृं नृं तर्जनीभ्यां नमः । ॐ रां रां रां मध्यमाभ्यां नमः । ॐ श्रां श्रां श्रां अनामिकाभ्यां नमः । ॐ ईं ईं कनिष्ठिकाभ्यां नमः । ॐ भ्रां भ्रां भ्रां करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । ॐ व्रां व्रां व्रां ह्रदयाय नमः । र्हां र्हां र्हां शिरसे स्वाहा । ॐ क्लीं क्लीं क्लीं शिखायै वौषट् । ॐ ग्रां ज्रां ज्रां कवचाय हुम् । ॐ श्रीं श्रीं श्रीं नेत्रत्रयायै वौषट् । ॐ आं आं अस्त्राय फट् । ॥ अथ नमस्कृत्य ॥
सरल भावार्थ: विकट नृसिंह कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Vikat Narasimha Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
ॐ नृसिंहकालाय कालरुपघोराय च । नमो नृसिंहदेवाय कारुण्याय नमो नमः । ॐ रां उग्राय नमः । ॐ धारकाय उग्राय उग्ररुपाय । ॐ ऊं धारणाय नमः । ॐ बिभीषणभद्राय नमो नमः । करालाय नमः । ॐ वज्ररुपाय नमः । ॐ ॐ ॐ ॐ काररुपाय नमः । ॐ ज्वालारुपाय नमः । ॐ परब्रह्मतो नृं रां रां रां नृसिंहाय सिंहरुपाय नमोनमः । ॐ नरकेसरी रां रां खं भीं नृसिंहाय नमः । अकारः सर्व संराजतु विश्वेशी विश्वपूजितो । ॐ विश्वेश्वराय नमः । ॐ ह्रीं स्त्रां स्त्रां स्त्रां सर्वदेवेश्वरी निरालम्बनिरंजननिर्गुणसर्वश्वैव तस्मै नमस्ते । ॐ रुं रुं रुं नृसिंहाय नमः । ॐ औं उग्राय उग्ररुपाय उग्रधराय ते नमः । ॐ भ्यां भ्यां विभीषणाय नमस्ते नमस्ते । भद्राय भद्र रुपाय भवकराय ते नमो नमः । ॐ व्रां व्रां व्रां वज्रदेहाय वज्रतुण्डाय नमो भव वज्राय वज्रनखाय नमः । ॐ र्हांण र्हांण र्हांज हरित क्लीं क्लीं विष सर्वदुष्टानां च मर्दनं दैत्यापिशाचाय अन्याश्च महाबलाय नमः । ॐ र्लींण र्लींण लृं कामनार्थं कलिकालाय नमस्ते कामरुपिणे । ॐ ज्रां ज्रां ज्रां ज्रां सर्वजगन्नाथ जगन्महीदाता जग्न्महिमा जगव्यापिने देव तस्मै नमो नमः । ॐ श्री श्रीं श्री श्रीधर सर्वेश्वर श्रीनिवासिने । ॐ आं आं आं अनन्ताय अनन्तरुपाय विश्वरुपाय नमः । नमस्ते विश्वव्यापिणे । इति स्तुतिः । ॐ विकटाय नमः । ॐ उग्ररुपाय नमः स्वाहा । ॐ श्रीनृसिंहाय उद्विघ्नाय विकटोग्रतपसे लोभमोहविवर्जितं त्रिगुणरहितं उच्चाटनभ्रमितं सर्वमायाविमुक्तं सिंह रागविवर्जित विकटोग्र – नृसिंह नरकेसरी ॥
सरल भावार्थ: विकट नृसिंह कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Vikat Narasimha Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
ॐ रां रां रां रां रां र्हं र्हंस क्षीं क्षीं धुं धुं फट् स्वाहा ॥
सरल भावार्थ: विकट नृसिंह कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Vikat Narasimha Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
इति विकट नृसिंह कवच सम्पूर्ण ॥
सरल भावार्थ: विकट नृसिंह कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Vikat Narasimha Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: मंगलवार, शनिवार

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर विकट नृसिंह का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. विकट नृसिंह कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ अत्यंत विकट संकटों, घोर शत्रुता व रोग शमन हेतु।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकट नृसिंह कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
विकट नृसिंह कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से अत्यंत विकट संकटों, घोर शत्रुता व रोग शमन हेतु। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
विकट नृसिंह कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः मंगलवार, शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
विकट नृसिंह कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत विष्णु धर्मोत्तर पुराण है। इसके ऋषि प्रह्लाद एवं देवता विकट नृसिंह हैं।

संबंधित अन्य वैदिक स्तोत्र, सूक्त व दैनिक पंचांग