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🛡️ भगवान भुवन भास्कर सूर्य याज्ञवल्क्य स्मृति / भविष्य पुराण ऋषि: याज्ञवल्क्य छंद: गायत्री

सूर्य कवच

Surya Kavach

भगवान भुवन भास्कर सूर्य का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। नेत्र रोग, हृदय विकार, पिता से संबंध व राज-सम्मान में वृद्धि।

फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

सूर्य कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
शरीरारोग्यदं दिव्यं सर्व सौभाग्यदायकम् ॥1॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
दैदिप्यमानं मुकुटं स्फ़ुरन्मकरकुण्डलम् । ध्यात्वा सहस्रकिरणं स्तोत्रमेतदुदीरयेत् ॥2॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
शिरो मे भास्करः पातु ललाटे मेSमितद्दुतिः । नेत्रे दिनमणिः पातु श्रवणे वासरेश्वरः ॥3॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
घ्राणं धर्म धृणिः पातु वदनं वेदवाहनः। जिह्वां मे मानदः पातु कंठं मे सुरवंदितः ॥4॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
स्कंधौ प्रभाकरं पातु वक्षः पातु जनप्रियः । पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वागं सकलेश्वरः ॥5॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
सूर्यरक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्जपत्रके । दधाति यः करे तस्य वशगाः सर्वसिद्धयः ॥6॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
सुस्नातो यो जपेत्सम्यक् योSधीते स्वस्थ मानसः । स रोगमुक्तो दीर्घायुः सुखं पुष्टिं च विंदति ॥7॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति सूर्य कवच सम्पूर्णम् ॥
सरल भावार्थ: सूर्य कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Surya Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: रविवार, मकर संक्रांति

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर भगवान भुवन भास्कर सूर्य का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. सूर्य कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ नेत्र रोग, हृदय विकार, पिता से संबंध व राज-सम्मान में वृद्धि।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
सूर्य कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से नेत्र रोग, हृदय विकार, पिता से संबंध व राज-सम्मान में वृद्धि। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
सूर्य कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः रविवार, मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
सूर्य कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत याज्ञवल्क्य स्मृति / भविष्य पुराण है। इसके ऋषि याज्ञवल्क्य एवं देवता भगवान भुवन भास्कर सूर्य हैं।

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