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🛡️ मां शैलपुत्री (प्रथम दुर्गा) मार्कण्डेय पुराण ऋषि: ब्रह्मा छंद: अनुष्टुप्

शैलपुत्री देवी कवच

Shailaputri Devi Kavach

मां शैलपुत्री (प्रथम दुर्गा) का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। मूलाधार चक्र जाग्रति, स्थिरता, सौभाग्य व चंद्र दोष शांति।

फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

शैलपुत्री देवी कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
हींकार,पातुललाटेबीजरूपामहेश्वरी ॥
सरल भावार्थ: शैलपुत्री देवी कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Shailaputri Devi Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
श्रीकार: पातुवदनेलज्जारूपामहेश्वरी । हूंकार: पातुहृदयेतारिणी शक्ति स्वघृत । फट्कार: पातुसर्वागेसर्व सिद्धि फलप्रदा ॥
सरल भावार्थ: शैलपुत्री देवी कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Shailaputri Devi Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति शैलपुत्री देवी कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ: शैलपुत्री देवी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Shailaputri Devi Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
शैलपुत्री देवी कवच Omkar: Men Shir: Patumuladhar Nivasini । Heenkar, Patulalatabijarupaamaheshvari ॥
सरल भावार्थ: शैलपुत्री देवी कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Shailaputri Devi Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
Shrikar: Patuvadanelajjaarupaamaheshvari । Hunkar: Patuhridayetarini Shakti Svaghrut । Fatkar: Patusarvagesarva Siddhi Falprada ॥
सरल भावार्थ: शैलपुत्री देवी कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Shailaputri Devi Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
॥ Iti Shailputri Devi Kavach Sampurna ॥
सरल भावार्थ: शैलपुत्री देवी कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Shailaputri Devi Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: नवरात्रि प्रतिपदा

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर मां शैलपुत्री (प्रथम दुर्गा) का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. शैलपुत्री देवी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ मूलाधार चक्र जाग्रति, स्थिरता, सौभाग्य व चंद्र दोष शांति।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शैलपुत्री देवी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
शैलपुत्री देवी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मूलाधार चक्र जाग्रति, स्थिरता, सौभाग्य व चंद्र दोष शांति। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
शैलपुत्री देवी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः नवरात्रि प्रतिपदा के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
शैलपुत्री देवी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत मार्कण्डेय पुराण है। इसके ऋषि ब्रह्मा एवं देवता मां शैलपुत्री (प्रथम दुर्गा) हैं।

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