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भगवान नृसिंह
नृसिंह पुराण
ऋषि: प्रह्लाद
छंद: अनुष्टुप्
नृसिंह अष्टक कवच
Narasimha Ashtaka Kavach
भगवान नृसिंह का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। शत्रु-भय, दुष्ट ग्रहों व घोर विपत्तियों से तत्काल मुक्ति।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
नृसिंह अष्टक कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
पालय कृपालय भवाम्बुधि-निमग्नं दैत्यवरकाल नरसिंह नरसिंह ॥ १ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
पादकमलावनत पातकि-जनानां पातकदवानल पतत्रिवर-केतौ ।
भावन परायण भवार्तिहराय मां पाहि कृपयैव नरसिंह नरसिंह ॥ २ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
तुङ्गनख-पङ्क्ति-दलितासुर-वरासृक् पङ्क-नवकुङ्कुम-विपश्चिम-वपुः ।
पण्डितानिधान-कमलालय नमस्ते पङ्कजनिषण्ण नरसिंह नरसिंह ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
मौलिषु विभूषणमिवामर वराणां योगिहृदयेषु च शिरस्सुनिगमानाम् ।
राजदरविन्द-रुचिरं पदयुगं ते देहि मम मूर्ध्नि नरसिंह नरसिंह ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
वारिजविलोचन मदि न्म-दशायां क्लेश-विवशीकृत-समस्त-करणायाम् ।
एहि रमया सह शरण्य विहंगानां नाथमधिरुह नरसिंह नरसिंह ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
हाटक-किरीट-वरहार-वनमाला धाराशना-मकरकुण्डल-मणिज्ज्ञैः ।
भूषितमशेष-निलयं तव वपुर्मे चेतसि चकार्स्तु नरसिंह नरसिंह ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
इन्दु रवि पावक विलोकन रमायाः मन्दिर महाभुज-लसदुर-स्थाञ्च ।
सुन्दर चिराय रमतां त्वयि मनो मे नन्दित सुरेश नरसिंह नरसिंह ॥ ७ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8
कवच श्लोक
माधव मुकुन्द मधुसूदन मुरारे वामन नृसिंह शरणं भव नतानाम् ।
कामद घृणिन निखिलकरण नयेय कालममरेश नरसिंह नरसिंह ॥ ८ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9
कवच श्लोक
अष्टकमिदं सकल-पातक-भयं कामद अशेष-दुरितामय-रिपुघ्नम् ।
यः पठति सन्ततमशेष-निलयं ते गच्छति पदं स नरसिंह नरसिंह ॥ ९ ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति नृसिंह अष्टक कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10
कवच श्लोक
नृसिंह
अष्टक
नृसिंह भगवान विष्णु का सबसे शक्तिशाली रूप हैं, नृसिंह अष्टक कवच का पाठ करने से व्यक्ति की समस्त दुःख, कष्ट, पीड़ा, शत्रु, पितृ दोष आदि से रक्षा होती हैं। इस कवच को पाठ किये हुए व्यक्ति को कोई भी शत्रु किसी भी चक्रव्यू में फ़सा कर, आक्रमण नही कर सकता। यदि किसी व्यक्ति के घर में किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का वास हैं, जिस कारण उसे किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिल रही, कार्य को प्रारंभ करते ही नुकसान का सामना करना पड़ता हैं, तो ऐसी समस्या को दूर करने के लिए उसे नृसिंह अष्टक कवच का पाठ करना अवश्य ही करना चाहियें
अगर कोई व्यक्ति धन, व्यापार, नौकरी आदि जैसी किसी आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है, किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहा है, धन का भी बार-बार नुकसान हो रहा है, तो ऐसे में व्यक्ति को
नृसिंह गुटिका
धारण कर, नृसिंह अष्टक कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। नृसिंह अष्टक कवच का पाठ करने से जीवन से दुःख-दरिद्रता दूर होने लगती हैं, आर्थिक स्थिति ठीक होने लगती है, और साथ ही साथ धन में वृद्धि होती है। इस नृसिंह गुटिका को धारण किये हुए व्यक्ति के शरीर पर ग्रह पीड़ा, तंत्र-मंत्र-यंत्र बाधा, नज़र बाधा आदि का प्रभाव नही होता।
आरती
स्तोत्र
चालीसा
स्तुतियाँ
सूक्तम्
अष्टकम्
सहस्त्रनाम
प्रार्थना कवच
शिव कवच
हनुमान कवच
बगलामुखी कवच
भैरव कवच
चंडी कवच
दुर्गा कवच
गुरु कवच
कामख्या कवच
सरल भावार्थ:
नृसिंह अष्टक कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Narasimha Ashtaka Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
मंगलवार, नृसिंह चतुर्दशी
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर भगवान नृसिंह का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- नृसिंह अष्टक कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ शत्रु-भय, दुष्ट ग्रहों व घोर विपत्तियों से तत्काल मुक्ति।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नृसिंह अष्टक कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
नृसिंह अष्टक कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से शत्रु-भय, दुष्ट ग्रहों व घोर विपत्तियों से तत्काल मुक्ति। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
नृसिंह अष्टक कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः मंगलवार, नृसिंह चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
नृसिंह अष्टक कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत नृसिंह पुराण है। इसके ऋषि प्रह्लाद एवं देवता भगवान नृसिंह हैं।