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BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ मां मातंगी (उच्छिष्ट चांडालिनी) मातंगी तंत्र ऋषि: मतंग ऋषि छंद: अनुष्टुप्

मातंगी कवच

Matangi Kavach

मां मातंगी (उच्छिष्ट चांडालिनी) का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। संगीत, कला, साहित्य, वक्तृत्व कला व सर्व वशीकरण।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

मातंगी कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
॥ श्री देव्युवाच ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर । मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
ईश्वर उवाच कवच श्लोक
श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस कवच को मुझसे कहिए। ॥ श्री ईश्वर उवाच ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक ईश्वर उवाच): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse ईश्वर उवाच): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
श्रृणु देवि। प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं शुभं । गोपनीयं महा-देवि। मौनी जापं समाचरेत् ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
ईश्वर ने कहा – हे देवि। उत्तम मातंगी-कवच कहता हूँ, सुनो। हे महा-देवि। इस कवच को गुप्त रखना, मौनी होकर जप करना। विनियोग: ॐ अस्य श्रीमातंगी-कवचस्य श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषिः । विराट् छन्दः । श्रीमातंगी देवता । चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यास: श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषये नमः शिरसि । विराट् छन्दसे नमः मुखे । श्रीमातंगी देवतायै नमः हृदि । चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे । ॥ मूल कवच-स्तोत्र ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
ॐ शिरो मातंगिनी पातु, भुवनेशी तु चक्षुषी । तोडला कर्ण-युगलं, त्रिपुरा वदनं मम ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
पातु कण्ठे महा-माया, हृदि माहेश्वरी तथा । त्रि-पुष्पा पार्श्वयोः पातु, गुदे कामेश्वरी मम ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
ऊरु-द्वये तथा चण्डी, जंघयोश्च हर-प्रिया । महा-माया माद-युग्मे, सर्वांगेषु कुलेश्वरी ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
अंग प्रत्यंगकं चैव, सदा रक्षतु वैष्णवी । ब्रह्म-रन्घ्रे सदा रक्षेन्, मातंगी नाम-संस्थिता ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8 कवच श्लोक
रक्षेन्नित्यं ललाटे सा, महा-पिशाचिनीति च । नेत्रयोः सुमुखी रक्षेत्, देवी रक्षतु नासिकाम् ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9 कवच श्लोक
महा-पिशाचिनी पायान्मुखे रक्षतु सर्वदा । लज्जा रक्षतु मां दन्तान्, चोष्ठौ सम्मार्जनी-करा ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10 कवच श्लोक
चिबुके कण्ठ-देशे च, ठ-कार-त्रितयं पुनः । स-विसर्ग महा-देवि । हृदयं पातु सर्वदा ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11 कवच श्लोक
नाभि रक्षतु मां लोला, कालिकाऽवत् लोचने । उदरे पातु चामुण्डा, लिंगे कात्यायनी तथा ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12 कवच श्लोक
उग्र-तारा गुदे पातु, पादौ रक्षतु चाम्बिका । भुजौ रक्षतु शर्वाणी, हृदयं चण्ड-भूषणा ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13 कवच श्लोक
जिह्वायां मातृका रक्षेत्, पूर्वे रक्षतु पुष्टिका । विजया दक्षिणे पातु, मेधा रक्षतु वारुणे ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14 कवच श्लोक
नैर्ऋत्यां सु-दया रक्षेत्, वायव्यां पातु लक्ष्मणा । ऐशान्यां रक्षेन्मां देवी, मातंगी शुभकारिणी ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15 कवच श्लोक
रक्षेत् सुरेशी चाग्नेये, बगला पातु चोत्तरे । ऊर्घ्वं पातु महा-देवि । देवानां हित-कारिणी ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 16 कवच श्लोक
पाताले पातु मां नित्यं, वशिनी विश्व-रुपिणी । प्रणवं च ततो माया, काम-वीजं च कूर्चकं ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 16): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 16): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 17 कवच श्लोक
मातंगिनी ङे-युताऽस्त्रं, वह्नि-जायाऽवधिर्पुनः । सार्द्धेकादश-वर्णा सा, सर्वत्र पातु मां सदा ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 17): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 17): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
फल-श्रुति: इति ते कथितं देवि । गुह्यात् गुह्य-तरं परमं । त्रैलोक्य-मंगलं नाम, कवचं देव-दुर्लभम् ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 18 कवच श्लोक
यः इदं प्रपठेत् नित्यं, जायते सम्पदालयं । परमैश्वर्यमतुलं, प्राप्नुयान्नात्र संशयः ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 18): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 18): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 19 कवच श्लोक
गुरुमभ्यर्च्य विधि-वत्, कवचं प्रपठेद् यदि । ऐश्वर्यं सु-कवित्वं च, वाक्-सिद्धिं लभते ध्रुवम् ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 19): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 19): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 20 कवच श्लोक
नित्यं तस्य तु मातंगी, महिला मंगलं चरेत् । ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च, ये देवा सुर-सत्तमाः ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 20): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 20): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 21 कवच श्लोक
ब्रह्म-राक्षस-वेतालाः, ग्रहाद्या भूत-जातयः । तं दृष्ट्वा साधकं देवि । लज्जा-युक्ता भवन्ति ते ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 21): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 21): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 22 कवच श्लोक
कवचं धारयेद् यस्तु, सर्वां सिद्धि लभेद् ध्रुवं । राजानोऽपि च दासत्वं, षट्-कर्माणि च साधयेत् ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 22): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 22): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 23 कवच श्लोक
सिद्धो भवति सर्वत्र, किमन्यैर्बहु-भाषितैः । इदं कवचमज्ञात्वा, मातंगीं यो भजेन्नरः ॥
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक 23): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse 23): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
झल्पायुर्निधनो मूर्खो, भवत्येव न संशयः । गुरौ भक्तिः सदा कार्या, कवचे च दृढा मतिः तस्मै मातंगिनी देवी, सर्व-सिद्धिं प्रयच्छति ॥ इति नंद्यावर्ते उत्तराखंडे त्वरिता फलदायिनी महाविद्या मातंगी कवच संपूर्ण
सरल भावार्थ: मातंगी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Matangi Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: बुधवार, वैशाख शुक्ल तृतीया

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर मां मातंगी (उच्छिष्ट चांडालिनी) का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. मातंगी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ संगीत, कला, साहित्य, वक्तृत्व कला व सर्व वशीकरण।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मातंगी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
मातंगी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से संगीत, कला, साहित्य, वक्तृत्व कला व सर्व वशीकरण। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
मातंगी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः बुधवार, वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
मातंगी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत मातंगी तंत्र है। इसके ऋषि मतंग ऋषि एवं देवता मां मातंगी (उच्छिष्ट चांडालिनी) हैं।

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