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दस महाविद्याएं
मुंडमाला तंत्र
ऋषि: सदाशिव
छंद: त्रिष्टुप्
महाविद्या कवच
Mahavidya Kavach
दस महाविद्याएं का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। काली, तारा, षोडशी सहित दसों महाविद्याओं का सम्मिलित रक्षा कवच।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
महाविद्या कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
आद्दाया महाविद्या: सर्वाभीष्ट फलप्रदम् ॥1॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः
कवच श्लोक
कवचस्य ऋषिर्देवि। सदाशिव इतिरित:,
छन्दोंऽनुष्टुब् देवता च महाविद्या प्रकीर्तिता ।
धर्मार्थ काममोक्षाणां विनियोगस्य साधने ॥2॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
ऐंकार: पातु शीर्षे मां कामबीजं तथा हृदि ।
रमा बीजं सदा पातु नाभौ गुह् च पादये: ॥3॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
ललाटे सुन्दरी पातु उग्रा मां कण्ठ देशत: ।
भगमाला सर्व्वगात्रे लिंगे चैतन्यरूपिणी ॥4॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
पूर्वे मां पातु वाराही ब्रह्माणी दक्षिणे तथा ।
उत्तरे वैष्णवी पातु चन्द्राणी पश्चिमेऽवतु ॥5॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
महेश्वरी च आग्नेय्यां नैऋत्ये कमला तथा ।
वायव्यां पातु कौमारी चामुण्डा ईशकेऽवतु ॥6॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
इदं कवचमज्ञात्वा महाविद्याञ्च यो जपेत् ।
न फलं जायते तस्य कल्पकोटिशतैरपि ॥7॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति श्रीरुद्रयामले महाविद्या कवच सम्पूर्णम् ॥
सरल भावार्थ:
महाविद्या कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahavidya Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय:
नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर दस महाविद्याएं का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- महाविद्या कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ काली, तारा, षोडशी सहित दसों महाविद्याओं का सम्मिलित रक्षा कवच।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाविद्या कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
महाविद्या कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से काली, तारा, षोडशी सहित दसों महाविद्याओं का सम्मिलित रक्षा कवच। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
महाविद्या कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
महाविद्या कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत मुंडमाला तंत्र है। इसके ऋषि सदाशिव एवं देवता दस महाविद्याएं हैं।