Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ श्रीमहाकाली महाकाल संहिता ऋषि: महाकाल छंद: त्रिष्टुप्

महाकाली कवच

Mahakali Kavach

श्रीमहाकाली का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। काल का भी काल स्वरूप, घोर संकटों व असाध्य शत्रुओं से रक्षा।

फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

महाकाली कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
भैरव्युवाच ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
काली पूजा श्रुता नाथ भावाश्च विविधाः प्रभो । इदानीं श्रोतु मिच्छामि कवचं पूर्व सूचितम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
त्वमेव शरणं नाथ त्राहि माम् दुःख संकटात् । सर्व दुःख प्रशमनं सर्व पाप प्रणाशनम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
सर्व सिद्धि प्रदं पुण्यं कवचं परमाद्भुतम् । अतो वै श्रोतुमिच्छामि वद मे करुणानिधे ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
भैरव उवाच ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
रहस्यं श्रृणु वक्ष्यामि भैरवि प्राण वल्लभे । श्री जगन्मङ्गलं नाम कवचं मंत्र विग्रहम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
पाठयित्वा धारयित्वा त्रौलोक्यं मोहयेत्क्षणात् । नारायणोऽपि यद्धत्वा नारी भूत्वा महेश्वरम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8 कवच श्लोक
योगिनं क्षोभमनयत् यद्धृत्वा च रघूद्वहः । वरदीप्तां जघानैव रावणादि निशाचरान् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9 कवच श्लोक
यस्य प्रसादादीशोऽपि त्रैलोक्य विजयी प्रभुः । धनाधिपः कुबेरोऽपि सुरेशोऽभूच्छचीपतिः । एवं च सकला देवाः सर्वसिद्धिश्वराः प्रिये ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
विनियोग ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10 कवच श्लोक
ॐ श्री जगन्मङ्गलस्याय कवचस्य ऋषिः शिवः । छ्न्दोऽनुष्टुप् देवता च कालिका दक्षिणेरिता ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
जगतां मोहने दुष्ट विजये भुक्तिमुक्तिषु । यो विदाकर्षणे चैव विनियोगः प्रकीर्तितः ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11 कवच श्लोक
अथ कवचम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12 कवच श्लोक
शिरो मे कालिकां पातु क्रींकारैकाक्षरीपर । क्रीं क्रीं क्रीं मे ललाटं च कालिका खड्‌गधारिणी ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13 कवच श्लोक
हूं हूं पातु नेत्रयुग्मं ह्नीं ह्नीं पातु श्रुति द्वयम् । दक्षिणे कालिके पातु घ्राणयुग्मं महेश्वरि ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14 कवच श्लोक
क्रीं क्रीं क्रीं रसनां पातु हूं हूं पातु कपोलकम् । वदनं सकलं पातु ह्णीं ह्नीं स्वाहा स्वरूपिणी ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15 कवच श्लोक
द्वाविंशत्यक्षरी स्कन्धौ महाविद्यासुखप्रदा । खड्‌गमुण्डधरा काली सर्वाङ्गभितोऽवतु ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 16 कवच श्लोक
क्रीं हूं ह्नीं त्र्यक्षरी पातु चामुण्डा ह्रदयं मम । ऐं हूं ऊं ऐं स्तन द्वन्द्वं ह्नीं फट् स्वाहा ककुत्स्थलम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 16): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 16): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 17 कवच श्लोक
अष्टाक्षरी महाविद्या भुजौ पातु सकर्तुका । क्रीं क्रीं हूं हूं ह्नीं ह्नीं पातु करौ षडक्षरी मम ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 17): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 17): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 18 कवच श्लोक
क्रींनाभिं मध्यदेशं च दक्षिणे कालिकेऽवतु । क्रीं स्वाहा पातु पृष्ठं च कालिका सा दशाक्षरी ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 18): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 18): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 19 कवच श्लोक
क्रींमे गुह्नं सदा पातु कालिकायै नमस्ततः । सप्ताक्षरी महाविद्या सर्वतंत्रेषु गोपिता ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 19): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 19): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 20 कवच श्लोक
ह्नीं ह्नीं दक्षिणे कालिके हूं हूं पातु कटिद्वयम् । काली दशाक्षरी विद्या स्वाहान्ता चोरुयुग्मकम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 20): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 20): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 21 कवच श्लोक
ॐ ह्नीं क्रींमे स्वाहा पातु जानुनी कालिका सदा । काली ह्रन्नामविधेयं चतुवर्ग फलप्रदा ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 21): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 21): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 22 कवच श्लोक
क्रीं ह्नीं ह्नीं पातु सा गुल्फं दक्षिणे कालिकेऽवतु । क्रीं हूं ह्नीं स्वाहा पदं पातु चतुर्दशाक्षरी मम ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 22): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 22): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 23 कवच श्लोक
खड्‌गमुण्डधरा काली वरदाभयधारिणी । विद्याभिः सकलाभिः सा सर्वाङ्गमभितोऽवतु ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 23): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 23): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 24 कवच श्लोक
काली कपालिनी कुल्ला कुरुकुल्ला विरोधिनी । विपचित्ता तथोग्रोग्रप्रभा दीप्ता घनत्विषः ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 24): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 24): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 25 कवच श्लोक
नीला घना वलाका च मात्रा मुद्रा मिता च माम् । एताः सर्वाः खड्‌गधरा मुण्डमाला विभूषणाः ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 25): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 25): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 26 कवच श्लोक
रक्षन्तु मां दिग्निदिक्षु ब्राह्मी नारायणी तथा । माहेश्वरी च चामुण्डा कौमारी चापराजिता ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 26): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 26): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 27 कवच श्लोक
वाराही नारसिंही च सर्वाश्रयऽति भूषणाः । रक्षन्तु स्वायुधेर्दिक्षुः दशकं मां यथा तथा ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 27): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 27): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 28 कवच श्लोक
॥ प्रतिफलम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 28): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 28): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
इति ते कथित दिव्य कवचं परमाद्भुतम् । श्री जगन्मङ्गलं नाम महामंत्रौघ विग्रहम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 29 कवच श्लोक
त्रैलोक्याकर्षणं ब्रह्मकवचं मन्मुखोदितम् । गुरु पूजां विधायाथ विधिवत्प्रपठेत्ततः ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 29): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 29): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 30 कवच श्लोक
कवचं त्रिःसकृद्वापि यावज्ज्ञानं च वा पुनः । एतच्छतार्धमावृत्य त्रैलोक्य विजयी भवेत् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 30): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 30): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 31 कवच श्लोक
त्रैलोक्यं क्षोभयत्येव कवचस्य प्रसादतः । महाकविर्भवेन्मासात् सर्वसिद्धीश्वरो भवेत् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 31): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 31): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 32 कवच श्लोक
पुष्पाञ्जलीन् कालिका यै मुलेनैव पठेत्सकृत् । शतवर्ष सहस्त्राणाम पूजायाः फलमाप्नुयात् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 32): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 32): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 33 कवच श्लोक
भूर्जे विलिखितं चैतत् स्वर्णस्थं धारयेद्यदि । शिखायां दक्षिणे बाहौ कण्ठे वा धारणाद् बुधः ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 33): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 33): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 34 कवच श्लोक
त्रैलोक्यं मोहयेत्क्रोधात् त्रैलोक्यं चूर्णयेत्क्षणात् । पुत्रवान् धनवान् श्रीमान् नानाविद्या निधिर्भवेत् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 34): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 34): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 35 कवच श्लोक
ब्रह्मास्त्रादीनि शस्त्राणि तद् गात्र स्पर्शवात्ततः । नाशमायान्ति सर्वत्र कवचस्यास्य कीर्तनात् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 35): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 35): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 36 कवच श्लोक
मृतवत्सा च या नारी वन्ध्या वा मृतपुत्रिणी । कण्ठे वा वामबाहौ वा कवचस्यास्य धारणात् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 36): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 36): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 37 कवच श्लोक
वह्वपत्या जीववत्सा भवत्येव न संशयः । न देयं परशिष्येभ्यो ह्यभक्तेभ्यो विशेषतः ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 37): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 37): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 38 कवच श्लोक
शिष्येभ्यो भक्तियुक्तेभ्यो ह्यन्यथा मृत्युमाप्नुयात् । स्पर्शामुद्‌धूय कमला वाग्देवी मन्दिरे मुखे । पौत्रान्तं स्थैर्यमास्थाय निवसत्येव निश्चितम् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 38): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 38): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 39 कवच श्लोक
इदं कवचं न ज्ञात्वा यो जपेद्दक्षकालिकाम् । शतलक्षं प्रजप्त्वापि तस्य विद्या न सिद्धयति । शस्त्रघातमाप्नोति सोऽचिरान्मृत्युमाप्नुयात् ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक 39): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse 39): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति महाकाली कवच समाप्त ॥
सरल भावार्थ: महाकाली कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Mahakali Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: शनिवार, अमावस्या

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर श्रीमहाकाली का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. महाकाली कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ काल का भी काल स्वरूप, घोर संकटों व असाध्य शत्रुओं से रक्षा।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाली कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
महाकाली कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से काल का भी काल स्वरूप, घोर संकटों व असाध्य शत्रुओं से रक्षा। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
महाकाली कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः शनिवार, अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
महाकाली कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत महाकाल संहिता है। इसके ऋषि महाकाल एवं देवता श्रीमहाकाली हैं।

संबंधित अन्य वैदिक स्तोत्र, सूक्त व दैनिक पंचांग