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मां कूष्माण्डा (चतुर्थ दुर्गा)
मार्कण्डेय पुराण
ऋषि: ब्रह्मा
छंद: अनुष्टुप्
कुष्ष्मांडा देवी कवच
Kushmanda Devi Kavach
मां कूष्माण्डा (चतुर्थ दुर्गा) का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। आरोग्य, तेज, कीर्ति, आयु व सूर्य जनित दोषों की शांति।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
कुष्ष्मांडा देवी कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम् ॥
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम ।
दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु ॥
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति कुष्मांडा देवी कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
कुष्मांडा देवी कवच
Hansarai Men Shir Patu Kooshmande Bhavanashinim ।
Hasalakarim Netrech, Hasaraushch Lalatakam ॥
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
Purve Patu Vaishnavi Indrani Dakshine Mam ।
Digivdikshu Sarvatrev Koom Bijam Sarvadavatu ॥
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
॥ Iti Kushmanda Devi Kavach Sampurna ॥
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
नवरात्री के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्मांडा देवी की पूजा की जाती है। अपनी हल्की मुस्कान के द्वारा ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली इस देवी को सृष्टि का आदि स्वरूप कहा जाता हैं। कुष्मांडा देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में होने के कारण इनका स्वरूप बहुत ही तेजस्वी हैं। कुष्मांडा देवी कवच का पाठ करने से साधक को ऊर्जा,उत्साह, आयु, यश, बल और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होने लगती हैं। यदि साधक कुष्मांडा देवी कवच का नित्य पाठ करता हैं, तो उसके जीवन में आने वाले सभी दुःख, कष्ट, भय और शोक आदि स्वत: ही दूर होने लगते है, साधक को सभी नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होने लगती हैं
कुष्मांडा देवी के कवच का पाठ करने के साथ
दुर्गा कवच
धारण करने से विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलने लगती हैं। बड़े से बड़े संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। साधक के सौभाग्य, अच्छे स्वास्थ्य और धन में उन्नति होने लगती हैं। सभी प्रकार की दरिद्रता दूर होती है, जीवन में किसी तरह से कोई आभाव देखने को नही मिलता, माँ कुष्मांडा देवी इस कवच को धारण किये हुए साधक के सभी दुःख दूर कर देती है।
आरती
स्तोत्र
चालीसा
स्तुतियाँ
सूक्तम्
अष्टकम्
सहस्त्रनाम
प्रार्थना कवच
भैरव कवच
चंडी कवच
दुर्गा कवच
गुरु कवच
कामख्या कवच
काली कवच
लक्ष्मी कवच
सरल भावार्थ:
कुष्ष्मांडा देवी कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kushmanda Devi Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
नवरात्रि चतुर्थी
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर मां कूष्माण्डा (चतुर्थ दुर्गा) का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- कुष्ष्मांडा देवी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ आरोग्य, तेज, कीर्ति, आयु व सूर्य जनित दोषों की शांति।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुष्ष्मांडा देवी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
कुष्ष्मांडा देवी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से आरोग्य, तेज, कीर्ति, आयु व सूर्य जनित दोषों की शांति। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
कुष्ष्मांडा देवी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः नवरात्रि चतुर्थी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
कुष्ष्मांडा देवी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत मार्कण्डेय पुराण है। इसके ऋषि ब्रह्मा एवं देवता मां कूष्माण्डा (चतुर्थ दुर्गा) हैं।