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🛡️ मां कात्यायनी (षष्ठ दुर्गा) देवी भागवत / मार्कण्डेय पुराण ऋषि: कात्यायन ऋषि छंद: अनुष्टुप्

कात्यायनी देवी कवच

Katyayani Devi Kavach

मां कात्यायनी (षष्ठ दुर्गा) का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। शीघ्र विवाह, सुयोग्य जीवनसाथी व दांपत्य सुख का वरदान।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

कात्यायनी देवी कवच मूल श्लोक व भावार्थ

ध्यानम् कवच श्लोक
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना । कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥
candrahāsojjvalakarā śārdūlavaravāhanā | kātyāyanī śubhaṃ dadyād devī dānavaghātinī ||
सरल भावार्थ: हाथ में तलवार धारण करने वाली, सिंह की सवारी करने वाली, दानवों का नाश करने वाली माँ कात्यायनी सबका कल्याण करें।
English Translation: May Goddess Katyayani, who brandishes a gleaming scimitar, rides a majestic lion, and vanquishes demons, bestow auspicious grace.
विनियोगः कवच श्लोक
ॐ अस्य श्री कात्यायनी कवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री कात्यायनी देवता, ह्रीं बीजम्, श्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकम्, मम सर्वतो रक्षणार्थे जपे विनियोगः ॥
oṃ asya śrī kātyāyanī kavacasya brahmā ṛṣiḥ, anuṣṭup chandaḥ, śrī kātyāyanī devatā, hrīṃ bījam, śrīṃ śaktiḥ, klīṃ kīlakam, mama sarvato rakṣaṇārthe jape viniyogaḥ ||
सरल भावार्थ: इस कात्यायनी कवच के ब्रह्मा ऋषि हैं, अनुष्टुप् छंद है, कात्यायनी देवी देवता हैं, सब ओर से रक्षा हेतु पाठ का विनियोग है।
English Translation: Of this Katyayani Kavach, Brahma is the seer, Anushtup is the meter, and Goddess Katyayani is the deity.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
कात्यायनौमुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी । ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी ॥ १ ॥
kātyāyanaumukhaṃ pātu kāṃ svāhāsvarūpiṇī | lalāṭe vijayā pātu mālinī nitya sundarī || 1 ||
सरल भावार्थ: मुख की रक्षा स्वाहास्वरूपिणी कात्यायनी करें। ललाट की रक्षा विजया और नित्य सुन्दरी मालिनी देवी करें।
English Translation: May Katyayani in the form of Swaha protect my face; may Vijaya and the eternally beautiful Malini protect my forehead.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी । उदरं पातु सुभगा नाभिं पातु महोदरी ॥ २ ॥
kalyāṇī hṛdayaṃ pātu jayā bhagamālinī | udaraṃ pātu subhagā nābhiṃ pātu mahodarī || 2 ||
सरल भावार्थ: हृदय की रक्षा कल्याणी और जया भगमालिनी करें। उदर की रक्षा सुभगा और नाभि की रक्षा महोदरी करें।
English Translation: May Kalyani and Jaya Bhagamalini protect my heart; may Subhaga protect my abdomen and Mahodari protect my navel.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
कटिं पातु महामाया ऊरू पातु सुरेश्वरी । जानुनी पातु कौमारी जङ्घे पातु च चण्डिका ॥ ३ ॥
kaṭiṃ pātu mahāmāyā ūrū pātu sureśvarī | jānunī pātu kaumārī jaṅghe pātu ca caṇḍikā || 3 ||
सरल भावार्थ: कमर की रक्षा महामाया, दोनों जंघाओं की रक्षा सुरेश्वरी, घुटनों की रक्षा कौमारी और पिंडलियों की रक्षा चण्डिका करें।
English Translation: May Mahamaya protect my waist, Sureshwari protect my thighs, Kaumari protect my knees, and Chandika protect my calves.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
पादौ पातु च वाराही सर्वाङ्गं पातु शाम्भवी । दिग्भ्यो रक्षतु कौबेरी वह्नौ पातु च पावक ॥ ४ ॥
pādau pātu ca vārāhī sarvāṅgaṃ pātu śāmbhavī | digbhyo rakṣatu kauberī vahnau pātu ca pāvaka || 4 ||
सरल भावार्थ: दोनों चरणों की रक्षा वाराही और सम्पूर्ण शरीर की रक्षा शाम्भवी करें। समस्त दिशाओं से कौबेरी रक्षा करें।
English Translation: May Varahi protect my feet and Shambhavi protect my entire body; may Kauberi protect from all directions.
समाप्ति कवच श्लोक
इतीदं कवचं दिव्यं कात्यायन्याः सुदुर्लभम् । यः पठेत् पाठयेद्वापि सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ ॥ इति कात्यायनी देवी कवच सम्पूर्णम् ॥
itīdaṃ kavacaṃ divyaṃ kātyāyanyāḥ sudurlabham | yaḥ paṭhet pāṭhayedvāpi sarvapāpaiḥ pramucyate || iti kātyāyanī devī kavaca sampūrṇam ||
सरल भावार्थ: यह दिव्य कात्यायनी कवच अत्यंत दुर्लभ है। जो इसका पाठ करता है, वह समस्त पापों व संकटों से मुक्त हो जाता है।
English Translation: Thus ends the sacred Katyayani Devi Kavach, destroying all sins and bestowing complete divine protection.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: नवरात्रि षष्ठी, शुक्रवार

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर मां कात्यायनी (षष्ठ दुर्गा) का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. कात्यायनी देवी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ शीघ्र विवाह, सुयोग्य जीवनसाथी व दांपत्य सुख का वरदान।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कात्यायनी देवी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
कात्यायनी देवी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से शीघ्र विवाह, सुयोग्य जीवनसाथी व दांपत्य सुख का वरदान। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
कात्यायनी देवी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः नवरात्रि षष्ठी, शुक्रवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
कात्यायनी देवी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत देवी भागवत / मार्कण्डेय पुराण है। इसके ऋषि कात्यायन ऋषि एवं देवता मां कात्यायनी (षष्ठ दुर्गा) हैं।

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