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भगवती कामाख्या
कालिका पुराण
ऋषि: वसिष्ठ ऋषि
छंद: त्रिष्टुप्
कामख्या कवच
Kamakhya Kavach
भगवती कामाख्या का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। सर्व वशीकरण, आकर्षण, दरिद्रता नाश व मनोकामना सिद्धि।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
कामख्या कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
॥ श्री महादेव उवाच: ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
॥ पूर्व-पीठिका: ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
अमायां वा चतुर्दश्यामष्टम्यां वा दिन-क्षये ।
नवम्यां रजनी-योगे, योजयेद् भैरवी-मनुम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
क्षेत्रेऽस्मिन् प्रयतो भूत्वा, निर्भयः साहसं वहन् ।
तस्य साक्षाद् भगवती, प्रत्यक्षं जायते ध्रुवम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
आत्म-संरक्षणार्थाय, मन्त्र-संसिद्धयेऽपि च ।
यः पठेत् कवचं देव्यास्ततो भीतिर्न जायते ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
तस्मात् पूर्वं विधायैवं, रक्षां सावहितो नरः ।
प्रजपेत् स्वेष्ट-मन्त्रस्तु, निर्भीतो मुनि-सत्तम ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
॥ नारद उवाच: ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8
कवच श्लोक
कवचं कीदृशं देव्या, महा-भय-निवर्तकम् ।
कामाख्यायास्तु तद् ब्रूहि, साम्प्रतं मे महेश्वर ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9
कवच श्लोक
॥ श्री महादेव उवाच: ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10
कवच श्लोक
श्रृणुष्व परमं गुह्यं, महा-भय-निवर्तकम् ।
कामाख्यायाः सुर-श्रेष्ठ, कवचं सर्व-मंगलम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8211
कवच श्लोक
यस्य स्मरण-मात्रेण, योगिनी-डाकिनी-गणाः ।
राक्षस्यो विघ्न-कारिण्यो,
याश्चात्म – विघ्नकारिकाः ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8211): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8211): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8212
कवच श्लोक
क्षुत्-पिपासा तथा निद्रा, तथाऽन्ये ये विघ्नदाः ।
दूरादपि पलायन्ते, कवचस्य प्रसादतः ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8212): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8212): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8213
कवच श्लोक
निर्भयो जायते मर्त्यस्तेजस्वी भैरवोपमः ।
समासक्तमनासक्तमनाश्चापि, जपहोमादिकर्मसु ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8213): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8213): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8214
कवच श्लोक
भवेच्च मन्त्र-तन्त्राणां, निर्विघ्नेन सु-सिद्धये ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8214): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8214): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8215
कवच श्लोक
॥ अथ कवचम्: ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8215): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8215): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8216
कवच श्लोक
ॐ प्राच्यां रक्षतु मे तारा, कामरुप-निवासिनी ।
आग्नेय्यांषोडशी पातु, याम्यां धूमावती स्वयम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8216): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8216): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8217
कवच श्लोक
नैऋत्यां भैरवी पातु, वारुण्यां भुवनेश्वरी ।
वायव्यां सततं पातु, छिन्न-मस्ता महेश्वरी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8217): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8217): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8218
कवच श्लोक
कौबेर्यां पातु मे नित्यं, श्रीविद्या बगला-मुखी ।
ऐशान्यां पातु मे नित्यं, महा-त्रिपुर-सुन्दरी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8218): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8218): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8219
कवच श्लोक
ऊर्ध्वं रक्षतु मे विद्या, मातंगी पीठ-वासिनी ।
सर्वतःपातुमे नित्यं, कामाख्या-कालिका स्वयम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8219): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8219): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8220
कवच श्लोक
ब्रह्म-रुपा महाविद्या, सर्वविद्यामयी-स्वयम्।
शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा, भालं श्री भव-मोहिनी॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8220): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8220): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8221
कवच श्लोक
त्रिपुरा भ्रू-युगे पातु, शर्वाणी पातु नासिकाम्।
चक्षुषी चण्डिका पातु, श्रोत्रे नील-सरस्वती॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8221): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8221): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8222
कवच श्लोक
मुखं सौम्य-मुखी पातु, ग्रीवां रक्षतु पार्वती ।
जिह्वां रक्षतु मे देवी, जिह्वा ललन-भीषणा ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8222): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8222): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8223
कवच श्लोक
वाग्-देवी वदनं पातु, वक्षः पातु महेश्वरी ।
बाहू महा-भुजा पातु, करांगुलीः सुरेश्वरी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8223): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8223): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8224
कवच श्लोक
पृष्ठतः पातु भीमास्या, कट्यां देवी दिगम्बरी ।
उदरं पातु मे नित्यं, महाविद्या महोदरी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8224): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8224): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8225
कवच श्लोक
उग्रतारा महादेवी, जंघोरु परि-रक्षतु ।
गुदं मुष्कं च मेढ्रं च, नाभिं चसुर-सुन्दरी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8225): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8225): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8226
कवच श्लोक
पदांगुलीः सदा पातु, भवानी त्रिदशेश्वरी ।
रक्त-मांसास्थि-मज्जादीन्, पातु देवी शवासना ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8226): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8226): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8227
कवच श्लोक
महा-भयेषु घोरेषु, महा-भय-निवारिणी ।
पातु देवी महा-माया, कामाख्या पीठ-वासिनी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8227): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8227): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8228
कवच श्लोक
भस्माचल-गता दिव्य-सिंहासन-कृताश्रया ।
पातु श्रीकालिका देवी, सर्वोत्पातेषु सर्वदा ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8228): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8228): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8229
कवच श्लोक
रक्षा-हीनं तु यत् स्थानं, कवचेनापि वर्जितम् ।
तत् सर्वं सर्वदा पातु, सर्व-रक्षण-कारिणी ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8229): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8229): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8230
कवच श्लोक
॥ फल-श्रुति: ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8230): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8230): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8231
कवच श्लोक
इदं तु परमं गुह्यं, कवचं मुनि-सत्तम ।
कामाख्यायामयोक्तं ते सर्व-रक्षा-करं परम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8231): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8231): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8232
कवच श्लोक
अनेन कृत्वा रक्षां तु, निर्भयः साधको भवेत् ।
न तं स्पृशेद् भयं घोरं, मन्त्र-सिद्धि-विरोधकम् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8232): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8232): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8233
कवच श्लोक
जायते च मनः-सिद्धिर्निर्विघ्नेन महा-मते ।
इदं यो धारयेत् कण्ठे, बाही वा कवचं महत् ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8233): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8233): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8234
कवच श्लोक
अव्याहताज्ञः स भवेत्, सर्व-विद्या-विशारदः ।
सर्वत्र लभते सौख्यं, मंगलं तु दिने-दिने ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8234): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8234): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8235
कवच श्लोक
यः पठेत् प्रयतो भूत्वा, कवचं चेदमद्भुतम् ।
स देव्याः दवीं याति, सत्यं सत्यं न संशयः ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8235): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8235): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति कामाख्या कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8236
कवच श्लोक
कामाख्या
कामख्या कवच भगवती कामख्या का रक्षा अस्त्र हैं, यह कामाख्या कवच सभी कवचों में बहुत ही शक्तिशाली माना गया है। इस बात को पुरे भारत के सिद्ध तांत्रिक, मान्त्रिक, योगी मानते है, कि चाहें कैसी भी समस्या आ जाये, यदि उसी समय कामख्या कवच का पाठ करें तो, साधक सभी तंत्र की बुरी शक्तियों और दुष्ट शत्रुओं के बुरे प्रभाव से बच सकता है। यह कवच साधक को आसुरी अमोघ रक्षा प्रदान करता है। देखा गया है की यदि कोई नित्य कामख्या कवच का पाठ करता है, तो असाध्य रोग भी धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं, शरीर पूर्ण स्वस्थ होने लगता हैं
कामख्या कवच का पाठ
माँ कामख्या देवी यंत्र
आरती
स्तोत्र
चालीसा
स्तुतियाँ
सूक्तम्
अष्टकम्
सहस्त्रनाम
प्रार्थना कवच
शिव कवच
हनुमान कवच
बगलामुखी कवच
भैरव कवच
चंडी कवच
दुर्गा कवच
गुरु कवच
कामख्या कवच
काली कवच
लक्ष्मी कवच
मातंगी कवच
महाविधा कवच
नारायण कवच
नवग्रह कवच
निखिल कवच
सूर्य कवच
सरल भावार्थ:
कामख्या कवच (श्लोक 8236): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Kavach (Verse 8236): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
शुक्रवार, अंबुवाची योग
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर भगवती कामाख्या का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- कामख्या कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ सर्व वशीकरण, आकर्षण, दरिद्रता नाश व मनोकामना सिद्धि।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कामख्या कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
कामख्या कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से सर्व वशीकरण, आकर्षण, दरिद्रता नाश व मनोकामना सिद्धि। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
कामख्या कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः शुक्रवार, अंबुवाची योग के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
कामख्या कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत कालिका पुराण है। इसके ऋषि वसिष्ठ ऋषि एवं देवता भगवती कामाख्या हैं।