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कामाख्या महाशक्ति
कामाख्या तंत्र
ऋषि: दत्तात्रेय
छंद: अनुष्टुप्
कामाख्या देवी कवच
Kamakhya Devi Kavach
कामाख्या महाशक्ति का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। सम्मोहन, पारिवारिक सुरक्षा व तांत्रिक उपद्रवों से रक्षा।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
कामाख्या देवी कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
॥ नारद उवाच ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
कवचं कीदृशं देव्या, महा-भय-निवर्तकम् ।
कामाख्यायास्तु तद् ब्रूहि, साम्प्रतं मे महेश्वर ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
॥ श्रीमहादेव उवाच: ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
श्रृणुष्व परमं गुह्यं, महा-भय-निवर्तकम् ।
कामाख्यायाः सुर-श्रेष्ठ, कवचं सर्व-मंगलम् ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
यस्य स्मरण-मात्रेण, योगिनी-डाकिनी-गणाः ।
राक्षस्यो विघ्न-कारिण्यो। याश्चात्म-विघ्नकारिकाः ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
क्षुत्-पिपासा तथा निद्रा, तथाऽन्ये ये च विघ्नदाः ।
दूरादपि पलायन्ते, कवचस्य प्रसादतः ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
निर्भयो जायते मर्त्यस्तेजस्वी भैरवोपमः ।
समासक्त-मनासक्त-मनाश्चापि, जप-होमादि-कर्मसु ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8
कवच श्लोक
भवेच्च मन्त्र-तन्त्राणां, निर्विघ्नेन सु-सिद्धये ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9
कवच श्लोक
॥ अथ कवचम्: ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10
कवच श्लोक
ॐ प्राच्यां रक्षतु मे तारा, कामरुप-निवासिनी ।
आग्नेय्यां षोडशी पातु, याम्यां धूमावती स्वयम् ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11
कवच श्लोक
नैऋत्यां भैरवी पातु, वारुण्यां भुवनेश्वरी ।
वायव्यां सततं पातु, छिन्न-मस्ता महेश्वरी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12
कवच श्लोक
कौबेर्यां पातु मे नित्यं, श्रीविद्या बगला-मुखी ।
ऐशान्यां पातु मे नित्यं, महा-त्रिपुर-सुन्दरी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13
कवच श्लोक
ऊर्ध्वं रक्षतु मे विद्या, मातंगी पीठ-वासिनी ।
सर्वतः पातु मे नित्यं, कामाख्या-कालिका स्वयम् ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14
कवच श्लोक
ब्रह्म-रुपा महाविद्या, सर्वविद्यामयी-स्वयम् ।
शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा, भालं श्री भव-मोहिनी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15
कवच श्लोक
त्रिपुरा भ्रू-युगे पातु, शर्वाणी पातु नासिकाम् ।
चक्षुषी चण्डिका पातु, श्रोत्रे नील-सरस्वती ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 16
कवच श्लोक
मुखं सौम्य-मुखी पातु, ग्रीवां रक्षतु पार्वती ।
जिह्वां रक्षतु मे देवी, जिह्वा ललन-भीषणा ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 16): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 16): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 17
कवच श्लोक
वाग्-देवी वदनं पातु, वक्षः पातु महेश्वरी ।
बाहू महा-भुजा पातु, करांगुलीः सुरेश्वरी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 17): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 17): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 18
कवच श्लोक
पृष्ठतः पातु भीमास्या, कट्यां देवी दिगम्बरी ।
उदरं पातु मे नित्यं, महाविद्या महोदरी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 18): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 18): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 19
कवच श्लोक
उग्रतारा महादेवी, जंघोरु परि-रक्षतु ।
गुदं मुष्कं च मेढ्रं च, नाभिं च सुर-सुन्दरी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 19): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 19): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 20
कवच श्लोक
पदांगुलीः सदा पातु, भवानी त्रिदशेश्वरी ।
रक्त-मांसास्थि-मज्जादीन्, पातु देवी शवासना ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 20): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 20): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 21
कवच श्लोक
महा-भयेषु घोरेषु, महा-भय-निवारिणी ।
पातु देवी महा-माया, कामाख्या पीठ-वासिनी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 21): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 21): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 22
कवच श्लोक
भस्माचल-गता दिव्य-सिंहासन-कृताश्रया ।
पातु श्रीकालिका देवी, सर्वोत्पातेषु सर्वदा ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 22): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 22): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 23
कवच श्लोक
रक्षा-हीनं तु यत् स्थानं, कवचेनापि वर्जितम् ।
तत् सर्वं सर्वदा पातु, सर्व-रक्षण-कारिणी ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 23): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 23): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 24
कवच श्लोक
॥ फल-श्रुति: ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 24): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 24): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 25
कवच श्लोक
इदं तु परमं गुह्यं, कवचं मुनि-सत्तम
कामाख्याया मयोक्तं ते, सर्व-रक्षा-करं परम् ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 25): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 25): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 26
कवच श्लोक
अनेन कृत्वा रक्षां तु, निर्भयः साधको भवेत् ।
न तं स्पृशेद् भयं घोरं, मन्त्र-सिद्धि-विरोधकम् ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 26): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 26): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 27
कवच श्लोक
जायते च मनः-सिद्धिर्निर्विघ्नेन महा-मते
इदं यो धारयेत् कण्ठे, बाही वा कवचं महत् ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 27): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 27): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 28
कवच श्लोक
अव्याहताज्ञः स भवेत्, सर्व-विद्या-विशारदः ।
सर्वत्र लभते सौख्यं, मंगलं तु दिने-दिने ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 28): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 28): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 29
कवच श्लोक
यः पठेत् प्रयतो भूत्वा, कवचं चेदमद्भुतम् ।
स देव्याः पदवीं याति, सत्यं सत्यं न संशयः ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक 29): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse 29): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति कामाख्या देवी कवच सम्पूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
कामाख्या देवी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kamakhya Devi Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
शुक्रवार, नवरात्रि
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर कामाख्या महाशक्ति का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- कामाख्या देवी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ सम्मोहन, पारिवारिक सुरक्षा व तांत्रिक उपद्रवों से रक्षा।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कामाख्या देवी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
कामाख्या देवी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से सम्मोहन, पारिवारिक सुरक्षा व तांत्रिक उपद्रवों से रक्षा। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
कामाख्या देवी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः शुक्रवार, नवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
कामाख्या देवी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत कामाख्या तंत्र है। इसके ऋषि दत्तात्रेय एवं देवता कामाख्या महाशक्ति हैं।