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मां कालरात्रि (सप्तम दुर्गा)
दुर्गा सप्तशती
ऋषि: नारद
छंद: अनुष्टुप्
कालरात्रि देवी कवच
Kalaratri Devi Kavach
मां कालरात्रि (सप्तम दुर्गा) का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। भूत-प्रेत, पिशाच, अकाल भय व दुःस्वप्नों का समूल नाश।
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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
कालरात्रि देवी कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
ललाटे सततं पातु दुष्टग्रह निवारिणी ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
रसनां पातु कौमारी भैरवी चक्षुणोर्मम ।
कहौ पृष्ठे महेशानी कर्णो शंकर भामिनी ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
वíजतानितुस्थानाभियानिचकवचेनहि ।
तानिसर्वाणिमें देवी सततंपातुस्तम्भिनी ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति कालरात्रि देवी कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
कालरात्रि देवी कवच
Kavach ।।
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
Om Kleemmen Hadayam Patu Padau Shrinkalaratri ।
Lalate Satatam Patu Dushtagrah Nivarini ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
Rasanam Patu Kaumari Bhairavi Chakshunormam ।
Kahau Prushthe Maheshani Karno Shankar Bhamini ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
Vaíjatanitusthanabhiyanichakavachenahi ।
Tanisarvanimen Devi Satatampatustambhini ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8
कवच श्लोक
॥ Iti Kaalratri Devi Kavach Sampurna ॥
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9
कवच श्लोक
नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। कालरात्रि देवी के कवच का पाठ करने से व्यक्ति सभी तंत्र की बाधा और दुष्ट शत्रुओं के बुरे प्रभाव से सुरक्षित रहने लगता है। यह कवच अकाल मृत्यु का भय दूर करने में समर्थ हैं। जो व्यक्ति
दुर्गा कवच
धारण कर, कालरात्रि देवी कवच का पाठ करता हैं, तो वह बड़े से बड़े संकट से बच जाता है, ऐसे व्यक्ति को किसी तरह की प्रेत बाधा, भूत बाधा, शत्रु बाधा, मुकदमा, तिरस्कार आदि देखने को नही मिलता। व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित रहता है, कोई शत्रु उसका कुछ नही बिगाड़ सकता
नव दुर्गा यंत्र
आरती
स्तोत्र
चालीसा
स्तुतियाँ
सूक्तम्
अष्टकम्
सहस्त्रनाम
प्रार्थना कवच
शिव कवच
हनुमान कवच
बगलामुखी कवच
भैरव कवच
चंडी कवच
दुर्गा कवच
गुरु कवच
कामख्या कवच
काली कवच
लक्ष्मी कवच
मातंगी कवच
महाविधा कवच
नारायण कवच
नवग्रह कवच
सरल भावार्थ:
कालरात्रि देवी कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Kalaratri Devi Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
नवरात्रि सप्तमी, शनिवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर मां कालरात्रि (सप्तम दुर्गा) का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- कालरात्रि देवी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ भूत-प्रेत, पिशाच, अकाल भय व दुःस्वप्नों का समूल नाश।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कालरात्रि देवी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
कालरात्रि देवी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भूत-प्रेत, पिशाच, अकाल भय व दुःस्वप्नों का समूल नाश। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
कालरात्रि देवी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः नवरात्रि सप्तमी, शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
कालरात्रि देवी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत दुर्गा सप्तशती है। इसके ऋषि नारद एवं देवता मां कालरात्रि (सप्तम दुर्गा) हैं।