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BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ संतान गोपाल नारद पंचरात्र ऋषि: नारद मुनि छंद: अनुष्टुप्

गोपाल कवच

Gopal Kavach

संतान गोपाल का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। उत्तम संतान प्राप्ति, गर्भ रक्षा व घर में प्रेम-सौहार्द।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

गोपाल कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
॥ श्रीनारद उवाच ॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
इन्द्राद्यमरवर्गेषु ब्रह्मन्यत्परमाऽद्भुतम् । अक्षयं कवचं नाम कथयस्व मम प्रभो ॥ 1॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
यद्धृत्वाऽऽकर्ण्य वीरस्तु त्रैलोक्य विजयी भवेत् । ॥ ब्रह्मोवाच ॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
श्रृणु पुत्र ! मुनिश्रेष्ठ ! कवचं परमाद्भुतम् ॥ 2॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
इन्द्रादि-देव वृन्दैश्च नारायण मुखाच्छ्रतम् । त्रैलोक्य-विजयस्यास्य कवचस्य प्रजापतिः ॥ 3॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
ऋषिश्छन्दो देवता च सदा नारायणः प्रभुः । सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीत्रैलोक्यविजयाक्षयकवचस्य प्रजापतिऋर्षिः, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीनारायणः परमात्मा देवता, धर्मार्थकाममोक्षार्थे जपे विनियोगः । पादौ रक्षतु गोविन्दो जङ्घे पातु जगत्प्रभुः ॥ 4॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
ऊरू द्वौ केशवः पातु कटी दामोदरस्ततः । वदनं श्रीहरिः पातु नाडीदेशं च मेऽच्युतः ॥ 5॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
वाम पार्श्वं तथा विष्णुर्दक्षिणं च सुदर्शनः । बाहुमूले वासुदेवो हृदयं च जनार्दनः ॥ 6॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
कण्ठं पातु वराहश्च कृष्णश्च मुखमण्डलम् । कर्णौ मे माधवः पातु हृषीकेशश्च नासिके ॥ 7॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8 कवच श्लोक
नेत्रे नारायणः पातु ललाटं गरुडध्वजः । कपोलं केशवः पातु चक्रपाणिः शिरस्तथा ॥ 8॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9 कवच श्लोक
प्रभाते माधवः पातु मध्याह्ने मधुसूदनः । दिनान्ते दैत्यनाशश्च रात्रौ रक्षतु चन्द्रमाः ॥ 9॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
पूर्वस्यां पुण्डरीकाक्षो वायव्यां च जनार्दनः । इति ते कथितं वत्स सर्वमन्त्रौघविग्रहम् ॥ 10॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11 कवच श्लोक
तव स्नेहान्मयाऽऽख्यातं न वक्तव्यं तु कस्यचित् । कवचं धारयेद्यस्तु साधको दक्षिणे भुजे ॥ 11॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12 कवच श्लोक
देवा मनुष्या गन्धर्वा यज्ञास्तस्य न संशयः । योषिद्वामभुजे चैव पुरुषो दक्षिणे भुजे ॥ 12॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13 कवच श्लोक
विभ्रुयात्कवचं पुण्यं सर्वसिद्धियुतो भवेत् । कण्ठे यौ धारयेदेतत् कवचं मत्स्वरूपिणम् ॥ 13॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14 कवच श्लोक
युद्धे जयमवाप्नोति द्यूते वादे च साधकः । सर्वथा जयमाप्नोति निश्चितं जन्मजन्मनि ॥ 14॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15 कवच श्लोक
अपुत्रो लभते पुत्रं रोगनाशस्तथा भवेत् । सर्वताप प्रमुक्तश्च विष्णुलोकं स गच्छति ॥ 15॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति ब्रह्मसंहितोक्तं श्री गोपाल कवच सम्पूर्ण ॥
सरल भावार्थ: गोपाल कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Gopal Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: गुरुवार, एकादशी

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर संतान गोपाल का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. गोपाल कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ उत्तम संतान प्राप्ति, गर्भ रक्षा व घर में प्रेम-सौहार्द।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपाल कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
गोपाल कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से उत्तम संतान प्राप्ति, गर्भ रक्षा व घर में प्रेम-सौहार्द। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
गोपाल कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः गुरुवार, एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
गोपाल कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत नारद पंचरात्र है। इसके ऋषि नारद मुनि एवं देवता संतान गोपाल हैं।

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