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भगवान श्रीगणेश
गणेश पुराण
ऋषि: मुद्गल ऋषि
छंद: अनुष्टुप्
गणेश कवच
Ganesh Kavach
भगवान श्रीगणेश का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। सर्व विघ्न विनाश, बुद्धि-विवेक, परीक्षा व व्यापार में सफलता।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
गणेश कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
॥ गौर्युवाच ॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
एषोऽतिचपलो दैत्यान्बाल्येऽपि नाशयत्यहो ।
अग्रे किं कर्म कर्तेति न जाने मुनिसत्तम ॥ 1॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
दैत्या नानाविधा दुष्टा: साधुदेवद्रुह: खला: ।
अतोऽस्य कण्ठे किंचित्त्वं रक्षार्थं बद्धुमर्हसि ॥ 2॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
॥ मुनिरुवाच ॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
ध्यायेत्सिंहगतं विनायकममुं दिग्बाहुमाद्यं युगे त्रेतायां तु मयूरवाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम् ।
द्वापरे तु गजाननं युगभुजं रक्तांगरागं विभुं तुर्ये तु द्विभुजं सितांगरूचिरं सर्वार्थदं सर्वदा ॥ 3॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
विनायक: शिखां पातु परमात्मा परात्पर: ।
अतिसुंदरकायस्तु मस्तकं सुमहोत्कट: ॥ 4॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
ललाटं कश्यप: पातु भ्रूयुगं तु महोदर: ।
नयने भालचन्द्रस्तु गजास्यस्तवोष्ठपल्लवौ ॥ 5॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
जिह्वां पातु गणाक्रीडश्रिचबुकं गिरिजासुत: ।
पादं विनायक: पातु दन्तान् रक्षतु दुर्मुख: ॥ 6॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
श्रवणौ पाशपाणिस्तु नासिकां चिंतितार्थद: ।
गणेशस्तु मुखं कंठं पातु देवो गणञज्य: ॥ 7॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8
कवच श्लोक
स्कंधौ पातु गजस्कन्ध: स्तनौ विघ्नविनाशन: ।
ह्रदयं गणनाथस्तु हेरंबो जठरं महान् ॥ 8॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9
कवच श्लोक
धराधर: पातु पाश्र्वौ पृष्ठं विघ्नहर: शुभ: ।
लिंगं गुज्झं सदा पातु वक्रतुन्ड़ो महाबल: ॥ 9॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10
कवच श्लोक
गणाक्रीडो जानुजंघे ऊरू मंगलमूर्तिमान् ।
एकदंतो महाबुद्धि: पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ 10॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11
कवच श्लोक
क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरक: ।
अंगुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशन ॥ 11॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12
कवच श्लोक
सर्वांगनि मयूरेशो विश्र्वव्यापी सदाऽवतु ।
अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतु: सदाऽवतु ॥ 12॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13
कवच श्लोक
आमोदस्त्वग्रत: पातु प्रमोद: पृष्ठतोऽवतु ।
प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायक: ॥ 13॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14
कवच श्लोक
दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैर्ऋत्यां तु गणेश्वर: ।
प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजगर्णक: ॥ 14॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15
कवच श्लोक
कौबेर्यां निधिप: पायादीशान्यामीशनन्दन: ।
दिवोऽव्यादेलनन्दस्तु रात्रौ संध्यासु विघ्नह्रत् ॥ 15॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 16
कवच श्लोक
राक्षसासुरवेतालग्रहभूतपिशाचत:
पाशांकुशधर: पातु रज:सत्त्वतम:स्मृति: ॥ 16॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 16): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 16): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 17
कवच श्लोक
ज्ञानं धर्मं च लक्ष्मीं च लज्जां कीर्तिं तथा कुलम् ।
वपुर्धनं च धान्यश्र्च ग्रहदारान्सुतान्सखीन् ॥ 17॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 17): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 17): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 18
कवच श्लोक
सर्वायुधधर: पौत्रान्मयूरेशोऽवतात्सदा ।
कपिलोऽजाबिकं पातु गजाश्रवान्विकटोऽवतु ॥ 18॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 18): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 18): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 19
कवच श्लोक
भूर्जपत्रे लिखित्वेदं य: कण्ठेधारयेत्सुधी: ।
न भयं जायते तस्य यक्षरक्ष:पिशाचत: ॥ 19॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 19): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 19): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 20
कवच श्लोक
त्रिसंध्यं जपते यस्तु वज्रसारतनुर्भवेत् ।
यात्राकाले पठेद्यस्तु निर्विघ्नेन फलं लभेत् ॥ 20॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 20): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 20): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 21
कवच श्लोक
युद्धकाले पठेद्यस्तु विजयं चाप्नुयाद्ध्रुवम् ।
मारणोच्चटनाकर्षस्तंभमोहनकर्मणि ॥ 21॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 21): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 21): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 22
कवच श्लोक
सप्तवारं जपेदेतद्दिननामेकविशतिम ।
तत्तत्फलमवाप्नोति साधको नात्र संशय: ॥ 22॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 22): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 22): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 23
कवच श्लोक
एकविंशतिवारं च पठेत्तावद्दिनानि य: ।
काराग्रहगतं सद्यो राज्ञा वध्यं च मोचयेत् ॥ 23॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 23): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 23): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 24
कवच श्लोक
राजदर्शनवेलायां पठेदेतत्तत्त्रिवारत: ।
स राजानं वशं नीत्वा प्रक्रतीश्र्च सभां जयेत् ॥ 24॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 24): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 24): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 25
कवच श्लोक
इदं गणेशकवचं कश्यपेन समीरितम् ।
मुद्गलाय च तेनाथ मांडव्याय महर्षये ॥ 25॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 25): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 25): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 26
कवच श्लोक
मज्झं स प्राह कृपया कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
न देयं भक्तिहीनाय देयं श्रद्धावते शुभम् ॥ 26॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 26): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 26): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 27
कवच श्लोक
अनेनास्य कृता रक्षा न बाधाऽस्य भवेत्कचित् ।
राक्षसासुरवेतालदैत्यदानवसंभवा ॥ 27॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक 27): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse 27): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति श्रीगणेशपुराणे उत्तरखण्डे बालक्रीडायां षडशीतितमेऽध्याये श्री गणेश कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
गणेश कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Ganesh Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
बुधवार, चतुर्थी तिथि
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर भगवान श्रीगणेश का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- गणेश कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ सर्व विघ्न विनाश, बुद्धि-विवेक, परीक्षा व व्यापार में सफलता।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
गणेश कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से सर्व विघ्न विनाश, बुद्धि-विवेक, परीक्षा व व्यापार में सफलता। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
गणेश कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः बुधवार, चतुर्थी तिथि के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
गणेश कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत गणेश पुराण है। इसके ऋषि मुद्गल ऋषि एवं देवता भगवान श्रीगणेश हैं।