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BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ देवगुरु बृहस्पति स्कंद पुराण ऋषि: भारद्वाज छंद: अनुष्टुप्

बृहस्पति कवच

Brihaspati Kavach

देवगुरु बृहस्पति का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। उच्च शिक्षा, संतान सुख, ज्ञान, धर्म व गुरु ग्रह दोष की शांति।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

बृहस्पति कवच मूल श्लोक व भावार्थ

विनियोगः कवच श्लोक
क्लीं कीलकम् । गुरुपीडोपशमनार्थं जपे विनियोगः ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
अभीष्टफलदं देवं सर्वज्ञम् सुर पूजितम् । अक्षमालाधरं शांतं प्रणमामि बृहस्पतिम् ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
बृहस्पतिः शिरः पातु ललाटं पातु मे गुरुः । कर्णौ सुरगुरुः पातु नेत्रे मे अभीष्ठदायकः ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
जिह्वां पातु सुराचार्यो नासां मे वेदपारगः । मुखं मे पातु सर्वज्ञो कंठं मे देवतागुरुः ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
भुजावांगिरसः पातु करौ पातु शुभप्रदः । स्तनौ मे पातु वागीशः कुक्षिं मे शुभलक्षणः ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
नाभिं केवगुरुः पातु मध्यं पातु सुखप्रदः । कटिं पातु जगवंद्य ऊरू मे पातु वाक्पतिः ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
जानुजंघे सुराचार्यो पादौ विश्वात्मकस्तथा । अन्यानि यानि चांगानि रक्षेन्मे सर्वतो गुरुः ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
इत्येतत्कवचं दिव्यं त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः । सर्वान्कामानवाप्नोति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति श्रीब्र्ह्मयामलोक्तं गुरु बृहस्पति कवचम् संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8 कवच श्लोक
गुरु बृहस्पति कवचम् Asya shribruhaspatikavachastotramantrasya ishvararishih । anushtup chhandah । gururdevta । gam bijam shrishaktih । klim Kilakam । gurupidopashamanartham jape viniyogah ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9 कवच श्लोक
abhishtfaladam devam sarvagnyam sur pujitam । akshamaladharam shantam pranamaami bruhaspatim ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10 कवच श्लोक
bruhaspatih shirah patu lalatam patu me guruh । karnau surguruh patu netre me abhishthadayakah ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11 कवच श्लोक
jihvaam patu suracharyo nasam me vedparagah । mukham me patu sarvagnyo kantham me devtaguruh ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12 कवच श्लोक
bhujavaangirasah patu karau patu shubhapradah । stanau me patu vagishah kukshim me shubhalakshanah ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13 कवच श्लोक
nabhim kevguruh patu madhyam patu sukhapradah । katim patu jagavandya uru me patu vakpatih ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14 कवच श्लोक
janujanghe suracharyo padau vishvatmakastatha । anyani yani changani rakshenme sarvato guruh ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15 कवच श्लोक
ityetatkavacham divyam trisandhyam yah pathennarah । sarvankamanavapnoti sarvatra vijayi bhavet ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 16 कवच श्लोक
॥ Iti Shribrhmayamaloktam Brihaspati Kavacham Sampurna ॥
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक 16): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse 16): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
बृहस्पति को सभी देवताओ में सबसे बड़ा और सुख समृद्धि प्रदान करने वाला ग्रह माना जाता हैं। गुरु बृहस्पति कवचम् का पाठ करने से आपको मान, सम्मान, संपत्ति, प्रतिष्ठा आदि की प्राप्ति होती हैं। यदि आप काफी लम्बे समय से नौकरी न मिलने से परेशान हैं, इंटरव्यू में बार-बार असफलता का सामना कर रहे हैं, धन प्राप्ति के सभी साधन समाप्त हो गये हैं, कहीं से भी धन मिलने की सम्भावना नही हैं, आपको दरिद्रता का सामना करना पड़ रहा हैं, ऐसे में, आपको गुरु बृहस्पति कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। इस कवचम् का पाठ करने से, इंटरव्यू में सफलता मिलने लगती हैं, अच्छी नौकरी प्राप्त होती हैं, धन का लाभ होता हैं, दरिद्रता दूर होती हैं
सरल भावार्थ: बृहस्पति कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Brihaspati Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: गुरुवार, पुष्य नक्षत्र

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर देवगुरु बृहस्पति का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. बृहस्पति कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ उच्च शिक्षा, संतान सुख, ज्ञान, धर्म व गुरु ग्रह दोष की शांति।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृहस्पति कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
बृहस्पति कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से उच्च शिक्षा, संतान सुख, ज्ञान, धर्म व गुरु ग्रह दोष की शांति। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
बृहस्पति कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः गुरुवार, पुष्य नक्षत्र के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
बृहस्पति कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत स्कंद पुराण है। इसके ऋषि भारद्वाज एवं देवता देवगुरु बृहस्पति हैं।

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