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BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ भगवान काल भैरव भैरव तंत्र / रुद्रयामल ऋषि: सदाशिव छंद: अनुष्टुप्

भैरव कवच

Bhairav Kavach

भगवान काल भैरव का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। तांत्रिक क्रियाओं, भूत-प्रेत, भय व अकाल मृत्यु का नाश।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

भैरव कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
पातु मां बटुको देवो भैरवः सर्वकर्मसु ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
पूर्वस्यामसितांगो मां दिशि रक्षतु सर्वदा । आग्नेयां च रुरुः पातु दक्षिणे चण्ड भैरवः ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
नैॠत्यां क्रोधनः पातु उन्मत्तः पातु पश्चिमे । वायव्यां मां कपाली च नित्यं पायात् सुरेश्वरः ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
भीषणो भैरवः पातु उत्तरास्यां तु सर्वदा । संहार भैरवः पायादीशान्यां च महेश्वरः ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
ऊर्ध्वं पातु विधाता च पाताले नन्दको विभुः । सद्योजातस्तु मां पायात् सर्वतो देवसेवितः ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
रामदेवो वनान्ते च वने घोरस्तथावतु । जले तत्पुरुषः पातु स्थले ईशान एव च ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
डाकिनी पुत्रकः पातु पुत्रान् में सर्वतः प्रभुः । हाकिनी पुत्रकः पातु दारास्तु लाकिनी सुतः ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8 कवच श्लोक
पातु शाकिनिका पुत्रः सैन्यं वै कालभैरवः । मालिनी पुत्रकः पातु पशूनश्वान् गंजास्तथा ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9 कवच श्लोक
महाकालोऽवतु क्षेत्रं श्रियं मे सर्वतो गिरा । वाद्यम् वाद्यप्रियः पातु भैरवो नित्यसम्पदा ॥
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति भैरव कवच संपूर्ण
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10 कवच श्लोक
भैरव कवच बहुत ही शक्तिशाली कवच है, यह कवच समस्त तंत्र मन्त्र, भूत प्रेत, शत्रु बाधा, टोना-टोटका, वशीकरण आदि से व्यक्ति की रक्षा करता हैं। इस कवच के पाठ से व्यक्ति के जीवन से विघ्न बाधायें दूर होती है और उसके रुके हुए, बिगड़े कार्य बनने लगते हैं। यदि किसी व्यक्ति पर कोई काले जादू, बुरी नज़र का प्रभाव हैं, जिससे उसे बेवजह किसी न किसी बात से भय लगा रहता हैं, उसे अपने आस-पास बार-बार किसी के होने का एहसास होता हैं, जो उसे नुकसान पहुँचाना चाहते हैं, जिसके कारण उसे रात में भयानक सपने आ रहे हैं और नींद भी ठीक से नही आ रही हैं, तो ऐसे में उस व्यक्ति को भैरव कवच का पाठ अवश्य ही करना चाहिए इस कवच का पाठ करने से, समस्त भूत प्रेत बाधाओं से रक्षा होने लगती हैं और आंतरिक भय दूर होता हैं। अगर कोई व्यक्ति जिसके शत्रुओं ने उसे जुआ, शराब, सिगरेट आदि जैसी बुरी आदतों में डाल दिया हैं, वह इन सभी नशों और बुरी आदतों से पीछा छुड़ाना चाहता हैं, परन्तु बहुत कोशिश करने के बाद भी छुटकारा प्राप्त नही कर पा रहा हैं, तो ऐसे में उसे भैरव कवच का पाठ करने के साथ भैरवी गुटिका अवश्य ही धारण करनी चाहिए। इस गुटिका को धारण करने से शत्रुओं के बुरे इरादों से बचाव होने लगता हैं तथा समस्त शत्रुओं से रक्षा होती हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वे नित्य पूजा में भैरव कवच का पाठ अवश्य ही करे, जिससे भगवान भैरव उसकी आने वाली बाधाओं से उसकी रक्षा कर करें। बटुक भैरव आह्वान मंत्र 108 बार आरती स्तोत्र चालीसा स्तुतियाँ सूक्तम् अष्टकम् सहस्त्रनाम प्रार्थना कवच शिव कवच हनुमान कवच बगलामुखी कवच भैरव कवच चंडी कवच दुर्गा कवच गुरु कवच कामख्या कवच काली कवच लक्ष्मी कवच मातंगी कवच
सरल भावार्थ: भैरव कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Bhairav Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: रविवार, कालभैरवाष्टमी

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर भगवान काल भैरव का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. भैरव कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ तांत्रिक क्रियाओं, भूत-प्रेत, भय व अकाल मृत्यु का नाश।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भैरव कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
भैरव कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से तांत्रिक क्रियाओं, भूत-प्रेत, भय व अकाल मृत्यु का नाश। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
भैरव कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः रविवार, कालभैरवाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
भैरव कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत भैरव तंत्र / रुद्रयामल है। इसके ऋषि सदाशिव एवं देवता भगवान काल भैरव हैं।

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