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BHAKTI KI SHAKTI
🚩
🚩 माँ वैष्णो देवी

श्री वैष्णो देवी चालीसा

त्रिकूटा पर्वत पर विराजमान, महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती पिंडी स्वरूपा माँ वैष्णो देवी की स्तुति।

📅 शुभ दिन: मंगलवार, शुक्रवार, नवरात्रि, अष्टमी, नवमी 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

गरुड़ वाहिनी वैष्णवी, त्रिकूटा पर्वत वास।

करहु कृपा जगदम्बिके, पूरण कीजै आस॥

जय जय वैष्णो मात भवानी, महिमा अमित न जाय बखानी।

द्वार तुम्हारे जो नर आवै, मनवांछित फल सो जन पावै॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय वैष्णो मात भवानी। महिमा अमित न जाय बखानी॥

2

त्रिकूटा पर्वत वास तुम्हारा। भुवन चतुर्दश करे पसारा॥

3

भैरव नाथ दियो जब त्रासा। रूप विराट कियो परकासा॥

4

बाणगंगा प्रकटी सुखदानी। चरण पादुका महिमा मानी॥

5

गर्भ जून गुफा अति पावन। दर्शन करत होय मन भावन॥

6

हाथ चक्र त्रिशूल बिराजे। सिंह वाहिनी रूप सुसाजे॥

7

महालक्ष्मी महाकाली रूपा। महासरस्वती बुद्धि अनूपा॥

8

तीन पिंडी रूप विराजै। देव दनुज सब शीश निवाजै॥

9

श्रीधर भक्त की लाज बचाई। भंडारे में भीड़ लगाई॥

10

गोरखनाथ शिष्य जब आयो। भैरव हठ करि भोजन चाह्यो॥

11

मांस मदिरा माँगत अभिमानी। क्रोधित भईं तब मात भवानी॥

12

उड़ि पर्वत पर पहुँचीं माता। भक्तन की तुम भाग्य विधाता॥

13

नौ महीने गर्भ जून बिताए। भैरव पाछे पाछे आए॥

14

प्रकट भईं तब खड्ग संभारी। भैरव शीश काटि महतारी॥

15

भैरव घाटी शीश गिरायो। तब पापी पश्चाताप जनायो॥

16

दीन्हो वर माता सुखदानी। दर्शन पाछे तोहिं बखानी॥

17

जो नर मेरा दर्शन करिहै। भैरव दर्शन बिनु न तरिहै॥

18

अखंड ज्योति भवन में जागे। दूर दूर से भक्त अनुरागे॥

19

कटरा नगर सोहे अति पावन। चढ़त चढ़ाई मन भावन॥

20

अर्धकुंवारी गुफा सुहाई। सब संकट से पार कराई॥

21

हाथी मत्था संझा छत सोहे। भवन देखि सब जन मन मोहे॥

22

शीतल पवन चले सुखकारी। जय माता दी बोलहिं सारी॥

23

छत्र चंवर सुवर्ण के छाजै। घंट नाद मंदिर में बाजै॥

24

हलवा चना पुरी भोग लगावैं। नारियल चुनरी भेंट चढ़ावैं॥

25

जो जन तोहिं सुमिरे चित लाई। ताके काज सँवारे माई॥

26

संतान हीन सुपुत्रहि पावै। कोढ़ी का सब कोढ़ नशावै॥

27

निर्धन को धनवान बनावै। अंधा नयन प्रकाशहि पावै॥

28

कन्या पूजन जो जन करिहै। ताके घर भंडार भरिहै॥

29

भूत पिशाच निकट नहिं आवै। वैष्णो नाम जब गावै॥

30

रोग शोक सब दूर नशावै। सुख संपत्ति घर माहीं आवै॥

31

प्रेम सहित जो पाठ सुनावै। भवसागर से सो तर जावै॥

32

प्रातःकाल उठि जो जन ध्यावै। माता का दर्शन फल पावै॥

33

चालीसा जो पढ़े पढ़ावै। सो नर परम सिद्धि को पावै॥

34

जय जय जय वैष्णवी महरानी। कृपा करहु मात कल्याणी॥

35

दास जानि मोहिं गोद लगाओ। जन्म मरण का कष्ट मिटाओ॥

36

सदा सहाय रहहु सुखदानी। जय जय जय माँ वैष्णो रानी॥

37

भक्त जनों के काज सँवारो। विपदा हरो कष्ट निवारो॥

38

प्रेम सहित बोलो जयकारा। वैष्णो मात करे उधारा॥

39

सकल सुमंगल दायक माता। जय जय जय वैष्णवी त्राता॥

40

नमो नमो हे मात भवानी। जय वैष्णो महारानी॥

॥ समापन दोहा ॥

वैष्णो देवी चालीसा जो, नियम से नित नित गाय।

मनवांछित फल पाय सो, सब संताप नशाय॥

📖
Vedic Exposition & Meaning · स्तोत्र भावार्थ व संपूर्ण सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Vaishno Devi Chalisa

This sacred 40-verse hymn is dedicated to Maa Vaishno Devi, praising their divine attributes, celestial pastimes, and protective boons. Composed in authentic Vedic tradition, it serves as a devotional bridge connecting the human soul to divine grace.

✨ Thematic Verse Journey & Spiritual Essence

✦ Sacred Invocations & Dhyana

Meditates upon the cosmic form, celestial weapons, and luminous aura of Maa Vaishno Devi.

✦ Divine Feats & Lilas

Sings the heroic and compassionate deeds performed to protect righteousness (Dharma) and liberate devotees.

✦ Blessings & Fruits

Bestows peace, dispels fear, resolves worldly crises, and guides the practitioner toward spiritual bliss.

🌟 Daily Chanting Fruits & Spiritual Benefits (फलश्रुति)

Regular daily recitation with sincere devotion creates a positive energetic vibration, clears ancestral and planetary hurdles, and fills life with auspicious grace.

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

मंगलवार या शुक्रवार के दिन प्रातः स्नान कर लाल अथवा पीले वस्त्र धारण करें। माँ वैष्णो देवी के भवन या चित्र के सम्मुख घी का दीपक व अगरबत्ती प्रज्वलित करें। लाल चुनरी, नारियल व हलवे-चने का भोग अर्पित कर प्रेमपूर्वक चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

समस्त मनोकामनाएं और मनचाही मुरादें पूरी होती हैं। यात्रा और जीवन के सभी विघ्न कटते हैं तथा घर में सुख, शांति, संतान सुख और समृद्धि का वास होता है।