मात श्री महाकालिका ध्याऊँ शीश नवाय।
जान मोहि निजदास सब दीजै काज बनाय॥
नमो महा कालिका भवानी। महिमा अमित न जाय बखानी॥
तुम्हारो यश तिहुँ लोकन छायो। सुर नर मुनिन सबन गुण गायो॥
परी गाढ़ देवन पर जब जब। कियो सहाय मात तुम तब तब॥
महाकालिका घोर स्वरूपा। सोहत श्यामल बदन अनूपा॥
लहलहाती जिह्वा अति भारी। रक्तबीज का शीश उतारी॥
मुण्डमाल गल बीच विराजै। देखि रूप दानव दल भाजै॥
खड्ग खप्पर कर माहीं साजे। बायीं भुजा वरद मुद्रा राजे॥
तीनों नयन ज्योति परकाशा। कोटि सूर्य सम तेज सुहासा॥
अट्टहास करि जब तुम गरजीं। दानव सेना डरपिन थरथरजीं॥
मधु कैटभ तुम सहज संहारे। शंभु शरण महिमा विस्तारे॥
चण्ड मुण्ड को मार गिरायो। चामुण्डा तब नाम धरायो॥
शुम्भ निशुम्भ महाबली भारी। तिनको मारि कीन्हि रखवारी॥
रक्त गिर्यो जहँ दानव केरा। उपजे कोटि दानव भट नेरा॥
खप्पर लै मुख माहिं पियो सब। रक्तबीज संहार कियो तब॥
इन्द्र आदि देवन्ह सुख दीन्हा। तिहुँ पुर माँहि शान्ति रस कीन्हा॥
जब शिवजी तव मारग आए। पद रज स्पर्श क्रोध थमि जाए॥
शांत भईं तब मात भवानी। जय जयकार करहिं मुनि ज्ञानी॥
जो जन तोहिं सुमिरे मन लाई। ताके कष्ट निवारहु माई॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवैं। महाकाली जब नाम सुनावैं॥
डाकिनी शाकिनी भय न सतावै। तंत्र मंत्र बाधा मिटि जावै॥
रोग शोक दारिद्र्य विनाशिनी। सर्व कार्य सिद्धि करणी दासिनी॥
शनि राहु के दोष मिटावै। ग्रह पीड़ा सब दूर नशावै॥
अकाल मृत्यु से रक्षा करती। अभयदान भक्तों को धरनी॥
शत्रु दमन तुम सहजहिं कीन्हो। दास जानि मोहिं अभय वर दीन्हो॥
प्रेम सहित जो अरदास लगावै। संकट से सो छूटन पावै॥
प्रातःकाल उठि जो नर गावै। महाकाली कृपा फल पावै॥
संध्या समय करै जो ध्याना। ताकर होय सदा कल्याणा॥
यह चालीसा जो नित पढ़ई। ताकी विपदा सब कटि जाई॥
जय महाकाली जय कल्याणी। जय जगदम्बा अमृत बानी॥
काली कलकत्ते वाली माई। पूरण कीजै आस हमारी॥
तारक रूप धरेउ महरानी। भवसागर तारहु वरदानी॥
छिन्नमस्ता बगला अवतारा। दस महाविद्या रूप अपारा॥
भैरव संग करहिं संचारा। भक्त जनों का काज सँवारा॥
दीन दुखी के संकट हरनी। जय जय जय जग मंगल करनी॥
क्षमा करहु अपराध हमारे। आए हम सब शरण तुम्हारे॥
विद्या बुद्धि ज्ञान सुख दाता। तुम हो जग की भाग्य विधाता॥
धर्म अर्थ काम मोक्ष प्रदाता। जय जय जय काली सुखदाता॥
सदा सहाय रहहु महरानी। कृपा करहु मात वरदानी॥
पुत्र जानि मोहिं गोद लगाओ। जन्म मरण का कष्ट मिटाओ॥
जय महाकालिका जय जगमाता। जयति जयति जननी सुखदाता॥
महाकाली चालीसा पढ़े, जो कोई चित लाय।
शत्रु भय बाधा मिटै, सब सुख सहजहिं पाय॥