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BHAKTI KI SHAKTI
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🌾 माँ अन्नपूर्णा

श्री अन्नपूर्णा चालीसा

घर में अन्न, धन, समृद्धि और शांति के अटूट भंडार के लिए काशी पुराधीश्वरी माँ अन्नपूर्णा की स्तुति।

📅 शुभ दिन: गुरुवार, अन्नपूर्णा जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, नवरात्रि 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

विश्वेश्वर पदपदम की, रज निज शीश लगाय।

अन्नपूर्णे, तव सुयश, बरनौं कवि मतिलाय॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

नित्य आनंद करिणी माता। वर अरु अभय भाव प्रख्याता॥

2

जय सौंदर्य सिंधु जग जननी। अखिल पाप हर भव भय हरनी॥

3

श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि। संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि॥

4

काशी पुराधीश्वरी माता। माहेश्वरी सकल जग त्राता॥

5

वृषभारुढ़ नाम रुद्राणी। विश्व विहारिणि जय कल्याणी॥

6

पतिदेवता सुतीत शिरोमणि। पदवी प्राप्त कीन्ह गिरि नंदिनि॥

7

पति विछोह दुःख सहि नहिं पावा। योग अग्नि तब बदन जरावा॥

8

देह तजत शिव चरण सनेहू। राखेहु जात हिमगिरि गेहू॥

9

प्रकटी गिरिजा नाम धरायो। अति आनंद भवन मँह छायो॥

10

नारद ने तब तोहिं भरमायहु। ब्याह करन हित पाठ पढ़ायहु॥

11

ब्रह्मा वरुण कुबेर गनाये। देवराज आदिक कहि गाये॥

12

सब देवन को सुजस बखानी। मति पलटन की मन मँह ठानी॥

13

अचल रहीं तुम प्रण पर धन्या। कीहनी सिद्ध हिमाचल कन्या॥

14

निज कौ तव नारद घबराये। तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाये॥

15

करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ। संत बचन तुम सत्य परेखेहु॥

16

गगनगिरा सुनि टरी न टारे। ब्रह्मा तब तुव पास पधारे॥

17

कहेउ पुत्रि वर मांगु अनूपा। देहुं आज तुव मति अनुरूपा॥

18

तुम तप कीन्ह अलौकिक भारी। कष्ट उठायहु अति सुकुमारी॥

19

अब संदेह छाँड़ि कछु मोसों। है सौगंध नहीं छल तोसों॥

20

करत वेद विद ब्रह्मा जानहु। वचन मोर यह सांचा मानहु॥

21

सुनत बचन बिधि सन कहि माता। बोली जो प्रफुल्लित गाता॥

22

जौं वर देहु दीन दुखहारी। तौ प्रसिद्ध होउ त्रिपुरारी॥

23

मम वाम भाग गृह शोहैं। देखि सकल मुनि जन मन मोहैं॥

24

एवमस्तु कहि तेहि छिन चौगे। अंतर्ध्यान भए विधि भौंगे॥

25

तव गिरिजा शिव ब्याह रचायो। भूमंडल माहीं जस छायो॥

26

बिष्णु प्राइ सब सुर गन आये। ब्याह उत्सव देखि सुख पाये॥

27

सतकोटि रवि जोति प्रकासा। तेहि मधि रूप तुम्हारा भाषा॥

28

हिमकन्या तुम रुद्राया। सेवक जन के सुख दायकिया॥

29

ऋद्धि सिद्धि सब चंवर ढुरावे। भैरव गण तव सेवा पावे॥

30

स्वर्ण कलश अमृत रस भरा। कर कमलों में सोहे खरा॥

31

जो नर तोहिं सुमिरे चित लाई। ताके गृह संपति अधिकाई॥

32

अन्न धन्य से भरे भंडारा। कष्ट निवारण नाम तुम्हारा॥

33

जो यह चालीसा पाठ करैगी। ध्यान महात्मय रोज धरैगी॥

34

ताके घर भंडार भरावै। अन्नपूर्णा नाम सुनावै॥

35

ताकी महिमा घटै न काहू। अन्न बस्त्र की कमी न काहू॥

36

धन धान्य से भरै भण्डारा। मात तुम्हारा जो ब्यवहारा॥

37

जो यह पढ़ै पढ़ावै कोई। दिन ब्यवहार लाभ अति होई॥

38

प्रातःकाल उठि जो जन गावै। माता का दर्शन फल पावै॥

39

प्रेम सहित जो पाठ सुनावे। भुक्ति मुक्ति दोऊ फल पावे॥

40

सकल सुमंगल दायक माता। जय जय जय अन्नपूर्णा त्राता॥

॥ समापन दोहा ॥

जतना करै जो कोई, ताको सब सुख देइ।

अन्नपूर्णे मम विनय, सुनि लेहु दिन रेइ॥

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Vedic Exposition & Meaning · स्तोत्र भावार्थ व संपूर्ण सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Annapurna Chalisa

This sacred 40-verse hymn is dedicated to Goddess Annapurna, praising their divine attributes, celestial pastimes, and protective boons. Composed in authentic Vedic tradition, it serves as a devotional bridge connecting the human soul to divine grace.

✨ Thematic Verse Journey & Spiritual Essence

✦ Sacred Invocations & Dhyana

Meditates upon the cosmic form, celestial weapons, and luminous aura of Goddess Annapurna.

✦ Divine Feats & Lilas

Sings the heroic and compassionate deeds performed to protect righteousness (Dharma) and liberate devotees.

✦ Blessings & Fruits

Bestows peace, dispels fear, resolves worldly crises, and guides the practitioner toward spiritual bliss.

🌟 Daily Chanting Fruits & Spiritual Benefits (फलश्रुति)

Regular daily recitation with sincere devotion creates a positive energetic vibration, clears ancestral and planetary hurdles, and fills life with auspicious grace.

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

गुरुवार अथवा अन्नपूर्णा जयंती पर प्रातःकाल स्नानादि कर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें। रसोईघर व पूजास्थल पर माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। धूप, दीप, अक्षत व खीर या हलवे का भोग अर्पित कर श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

घर व रसोई में अन्न और धन के अक्षय भंडार भरे रहते हैं। कभी भी दरिद्रता और अभाव का सामना नहीं करना पड़ता। परिवार के सभी सदस्यों को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मानसिक शांति प्राप्त होती है।