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BHAKTI KI SHAKTI
📜 सूर्य मण्डल • 9 श्लोक

सूर्यमण्डलाष्टकम्

सूर्य के दिव्य तेजोमय मण्डल की वन्दना करने वाला यह अष्टक आत्म-साक्षात्कार, कुण्डलिनी जागरण और असाध्य व्याधि मुक्ति हेतु अद्वितीय है।

रचयिता ऋषि परंपरा (भविष्य पुराण)
स्रोत / ग्रन्थ भविष्य पुराण
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त रविवार, सप्तमी तिथि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
नमोऽस्तु सूर्यमण्डलाय सर्वतेजःस्वरूपिणे । जगच्चक्षुःस्वरूपाय त्रयीमूर्ते नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त तेजों के साक्षात स्वरूप, संसार के नेत्र और तीनों वेदों की साक्षात मूर्ति सूर्यमण्डल को मेरा बारंबार नमस्कार है।
English Translation: Salutations to the solar orb, personification of all brilliance, eye of the universe, and embodiment of the three Vedas.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं देवगणैः सुपूजितं विप्रैः स्तुतं भावनया मुनीन्द्रैः । तं सर्वकामप्रदमादिदेवं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जिस सूर्यमण्डल की पूजा समस्त देवगण करते हैं, जिसकी स्तुति श्रेष्ठ ब्राह्मण और मुनिगण भावपूर्वक करते हैं, उस समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले सूर्यमण्डल को मैं नित्य नमन करता हूँ।
English Translation: The solar orb worshiped by hosts of gods, praised with devotion by wise sages and Vedic scholars, granter of all desires, I bow daily to that solar orb.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं ज्ञानघनं त्वगम्यं त्रैलोक्यभासा परिपूरितं च । संसारदुःखौघविनाशनं तं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जो ज्ञान का घन स्वरूप, अत्यंत गूढ़, तीनों लोकों को प्रकाश से भरने वाला और संसार के दुःखों का नाश करने वाला है, उस सूर्यमण्डल को मैं नित्य प्रणाम करता हूँ।
English Translation: The dense embodiment of wisdom, profound, permeating the three worlds with light, destroying the sorrows of worldly transmigration, I bow to that solar orb.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं गूढमतिप्रबोधं धर्माभिवृद्धौ सततं प्रवृत्तम् । अज्ञानहन्तृ वरदं परेशं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जो गूढ़ बुद्धि को जगाने वाला, धर्म की वृद्धि में निरंतर प्रवृत्त, अज्ञान का संहारक और वरदाता परमेश्वर स्वरूप है, उस सूर्यमण्डल को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Awakening deeper intellect, ever engaged in fostering righteousness, dispeller of ignorance, granter of boons, I bow daily to that solar orb.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं सर्वजनस्य वन्द्यं कालस्य मूलं कलिकल्मषघ्नम् । आरोग्यदं पापहृदं शरण्यं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जो समस्त मानव जाति द्वारा वन्दनीय है, समय का मूल आधार है, कलि के पापों को मिटाने वाला और उत्तम आरोग्य प्रदान करने वाला है, उस सूर्यमण्डल की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Adored by all humanity, foundation of time, crusher of Kali's impurities, bestower of health, and purifier of sins, I take refuge in the solar orb.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति हिरण्यगर्भं पुरुषं पुराणं । ब्रह्मेन्द्ररुद्रैरपि वन्द्यमानं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जिसे वेदज्ञ ऋषिगण साक्षात हिरण्यगर्भ और पुरातन परम पुरुष कहते हैं, जिसकी वन्दना ब्रह्मा, इन्द्र और रुद्र भी करते हैं, उस सूर्यमण्डल को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Whom the seers of the Vedas describe as Hiranyagarbha and the ancient Supreme Being, worshiped by Brahma, Indra, and Rudra, to that solar orb I bow.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं सर्वगतं सुशान्तं दीप्त्या प्रभासप्रदमादिदेवम् । तेजोमयं पापहरं शरण्यं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो सर्वव्यापी, परम शांत, अपने दिव्य प्रकाश से संपूर्ण जगत को प्रकाशित करने वाला, तेजोमय और पापियों का उद्धार करने वाला है, उस सूर्यमण्डल को मेरा प्रणाम है।
English Translation: All-pervading, deeply serene, illuminating all quarters with divine brilliance, luminous and redeemer of sinners, I bow to that solar orb.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
यन्मण्डलं मङ्गलकारि नित्यं संसारतन्मुक्तिपदं प्रदिष्टम् । नमामि सूर्यं वरदं सुरेशं तं सूर्यमण्डलं नमामि नित्यम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जो नित्य मंगलकारी है और संसार के बंधनों से मोक्ष पद प्रदान करने वाला कहा गया है, उस वरदाता देवाधिदेव सूर्य और उनके दिव्य मण्डल को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Eternally auspicious, declared to bestow the supreme abode of liberation, boon-giver, king of gods, to Lord Surya and His orb I offer salutations.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
सूर्यमण्डलाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् । सर्वान् कामानवाप्नोति सूर्यलोके महीयते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर इस पवित्र सूर्यमण्डलाष्टकम् का पाठ करता है, वह अपनी समस्त मनोकामनाओं को प्राप्त कर अंत में सूर्यलोक में प्रतिष्ठा पाता है।
English Translation: Whoever rising at dawn recites this holy Suryamandala Ashtakam realizes all heartfelt desires and is honored in the celestial solar realm.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीसूर्यमण्डलाष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल सूर्योदय के समय खुले आकाश के नीचे खड़े हों।
  • 2 तांबे के पात्र से जल अर्घ्य देने के पश्चात् सूर्य मंडल की ओर ध्यान केंद्रित करें।
  • 3 श्रद्धापूर्वक दोनों हाथ जोड़कर सूर्यमण्डलाष्टकम् का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ सूर्य मण्डल के दिव्य तेज से ओज और पराक्रम का विकास।
  • ✔ आध्यात्मिक चेतना, बौद्धिक प्रखरता और दीर्घायु की प्राप्ति।
  • ✔ कुंडली के सूर्य दोष, शनि-सूर्य युति और कालसर्प दोष में राहत।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: रविवार, सप्तमी तिथि