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BHAKTI KI SHAKTI
📜 महालक्ष्मी • 11 श्लोक

श्री महालक्ष्मी अष्टकम्

देवराज इन्द्र द्वारा रचित यह अष्टक धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और दरिद्रता निवारण हेतु सनातन परंपरा का सर्वाधिक सिद्ध और फलदायी स्तोत्र है।

रचयिता देवराज इन्द्र (पद्म पुराण)
स्रोत / ग्रन्थ पद्म पुराण
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे महामाये! श्रीपीठ पर विराजमान और देवताओं द्वारा पूजित हे देवी! अपने हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
English Translation: Salutations to You, O Mahamaya, enthroned on the sacred Sri Pitha and worshiped by the celestials! Bearing the conch, discus, and mace, O Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: गरुड़ पर सवार होने वाली, कोलासुर राक्षस को भयभीत करने वाली और भक्तों के समस्त पापों को हरने वाली हे देवी महालक्ष्मी! आपको प्रणाम है।
English Translation: Salutations to You who mounts Garuda, strikes terror into the demon Kolasura, and removes all sins. O Goddess Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: सब कुछ जानने वाली, सभी वरदानों को देने वाली, समस्त दुष्टों को भयभीत करने वाली और सभी दुःखों को दूर करने वाली हे महालक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
English Translation: All-knowing, granter of all boons, terrifying to the wicked, and dispeller of all sorrows, O Divine Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: सिद्धि और सद्बुद्धि देने वाली, भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली तथा मन्त्र स्वरूपा हे देवी महालक्ष्मी! आपको सदा प्रणाम है।
English Translation: Bestower of spiritual attainment and wisdom, granter of worldly enjoyment and supreme liberation, embodiment of sacred mantras, O Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि । योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: आदि और अन्त से रहित, सृष्टि की आद्यशक्ति महेश्वरी, योग से प्रकट और योग स्वरूपिणी हे महालक्ष्मी! आपको मेरा नमन है।
English Translation: Without beginning or end, primordial cosmic energy, sovereign Empress born of Yoga, O Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे । महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: स्थूल, सूक्ष्म और महारौद्र रूपों में विद्यमान, महाशक्तिशालिनी, ब्रह्माण्ड को उदर में धारण करने वाली और घोर पापों को हरने वाली महालक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
English Translation: Manifest in gross, subtle, and fierce aspects, holding supreme power within, destroyer of immense sins, O Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि । परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: कमल के आसन पर विराजमान, साक्षात परब्रह्म स्वरूप, परमेश्वरी और समस्त जगत की माता महालक्ष्मी! आपको कोटि-कोटि प्रणाम है।
English Translation: Seated upon the lotus throne, embodiment of Supreme Brahman, supreme ruler, Mother of the universe, O Mahalakshmi, salutations unto You.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते । जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, नाना प्रकार के दिव्य रत्नाभूषणों से अलंकृत, संपूर्ण जगत में व्याप्त हे जगदम्बा महालक्ष्मी! आपको प्रणाम है।
English Translation: Adorned in immaculate white silks, embellished with diverse celestial ornaments, all-pervading Mother of the universe, O Mahalakshmi, salutations unto You.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान् नरः । सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो भक्त श्रद्धा और निष्ठा से इस महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्र का पाठ करता है, वह समस्त सिद्धियों को प्राप्त करता है और सदा ऐश्वर्य-संपत्ति का उपभोग करता है।
English Translation: Whoever devoutly recites this Mahalakshmi Ashtakam hymn attains all spiritual perfections and enjoys perpetual prosperity and sovereignty.
फलश्रुति 10 ॥ श्री ॥
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् । द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रतिदिन एक काल (दिन में एक बार) इसका पाठ करता है, उसके घोर पापों का नाश हो जाता है; और जो नित्य दो काल (प्रातः एवं सायं) पाठ करता है, वह धन-धान्य तथा समृद्धि से संपन्न हो जाता है।
English Translation: One who recites it once daily achieves the destruction of monumental sins; one who recites it twice daily becomes endowed with boundless wealth, prosperity, and food grains.
फलश्रुति 11 ॥ श्री ॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् । महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन तीनों कालों (प्रातः, मध्याह्न और सायं) में इसका पाठ करता है, उसके समस्त महाशत्रुओं और बाधाओं का नाश होता है तथा भगवती महालक्ष्मी उस पर सदा प्रसन्न होकर कल्याणकारी वरदान प्रदान करती हैं।
English Translation: One who recites it thrice daily experiences the complete annihilation of formidable foes and obstacles, and Goddess Mahalakshmi remains forever pleased, bestowing auspicious boons and grace.
✨ समाप्ति
।। इति श्री महालक्ष्मी अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • 2 पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के आसन पर बैठें।
  • 3 मां लक्ष्मी की प्रतिमा या श्रीयंत्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  • 4 कमल पुष्प, लाल गुलाब, कुंकुम और अक्षत अर्पित करें।
  • 5 शांत व एकाग्र मन से श्रद्धापूर्वक अष्टक का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ आर्थिक संकटों और पुराने ऋणों से शीघ्र मुक्ति।
  • ✔ घर-परिवार में स्थायी सुख, शांति और समृद्धि का वास।
  • ✔ व्यापार, आजीविका और करियर में उन्नति व अप्रत्याशित लाभ।
  • ✔ नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का समूल विनाश।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली