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BHAKTI KI SHAKTI
📜 माँ सरस्वती • 9 श्लोक

सरस्वती अष्टकम्

विद्या, बुद्धि, स्मरण शक्ति और वाक-सिद्धि की अधिष्ठात्री भगवती शारदा की स्तुति का यह अष्टक विद्यार्थियों और ज्ञान साधकों के लिए वरदान स्वरूप है।

रचयिता पद्म पुराण
स्रोत / ग्रन्थ पद्म पुराण (सृष्टि खण्ड)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त बसंत पंचमी, गुरुवार, बुधवार
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे वरदान देने वाली, इच्छानुकूल रूप धारण करने वाली भगवती सरस्वती! आपको नमस्कार है। मैं अपनी विद्या का आरम्भ कर रहा हूँ, मुझे सदा सफलता प्राप्त हो।
English Translation: Salutations to You, O Goddess Saraswati, bestower of boons, fulfiller of all desires! As I commence my education, may I attain spiritual and academic success always.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
पद्मपत्रविशालाक्षी पद्मकेसरवर्णिनी । नित्यं पद्मासनासीना सा मां पातु सरस्वती ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: कमल की पंखुड़ियों के समान विशाल नेत्रों वाली, कमल के पराग जैसी उज्ज्वल कान्ति वाली और सदा कमल के आसन पर विराजने वाली माँ सरस्वती मेरी रक्षा करें।
English Translation: Having eyes wide like lotus petals, golden-radiant like lotus pollen, seated eternally upon the lotus flower, may Mother Saraswati protect me.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
श्वेतपद्मासना देवी श्वेतपुष्पोपशोभिता । श्वेताम्बरधरा नित्या सा मां पातु सरस्वती ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्वेत कमल पर विराजमान, श्वेत पुष्पों से सुशोभित, नित्य श्वेत वस्त्र धारण करने वाली ज्ञान की अधिष्ठात्री सरस्वती मेरी रक्षा करें।
English Translation: Enthroned on a white lotus, adorned with pristine white blossoms, perpetually robed in white silks, may Goddess Saraswati protect me.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
वीणापुस्तकधारिणी हंसवाहने संस्थिता । विद्याप्रदायिनी देवी सा मां पातु सरस्वती ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में वीणा और पुस्तक धारण करने वाली, हंस के वाहन पर आरूढ़ और संपूर्ण विद्याओं को प्रदान करने वाली देवी सरस्वती मेरी रक्षा करें।
English Translation: Holding the sacred Vina and divine scripture, mounted on the celestial swan, dispenser of all sciences, may Goddess Saraswati protect me.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
चतुर्मुखमुखाम्भोजवनहंसवधूरिव । मानसे रमतां नित्यं सर्वशुक्ला सरस्वती ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जो ब्रह्माजी के चारों मुख-कमलों के वन में राजहंसी की भांति रमण करती हैं, वे सर्व-शुक्ल (परम शुद्ध) सरस्वती मेरे मानस में सदा निवास करें।
English Translation: Gliding like a swan amidst the lotus grove of Brahma's four countenances, may the immaculate Goddess Saraswati dwell eternally in my mind.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे । सर्वदा सर्वदाऽस्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: शरद ऋतु के खिले हुए कमल के समान सुंदर मुख वाली भगवती शारदा हमारे मुख-कमल में सर्वदा सन्निहित रहकर हमें सत्य व मधुर वाणी प्रदान करें।
English Translation: May Goddess Sharada, whose countenance blooms like the autumnal lotus, ever reside within the lotus of my mouth, conferring truthful wisdom.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् । हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: परम शुद्ध श्वेत वर्ण, ब्रह्म-विचार की सारभूता, आद्यशक्ति, सर्वव्यापिनी, वीणा-पुस्तक-अभयमुद्रा धारण करने वाली, अज्ञान रूपी अंधकार को हरने वाली, हाथ में स्फटिक माला लिए पद्मासना शारदा को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Pure white, essence of contemplation on Brahman, primordial, all-pervading, holding Vina, book, and dispelling fear, removing the darkness of dullness, holding a crystal rosary, to that Mother Sharada I bow.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
मेधां प्रज्ञां श्रुतं युक्तिं वाक्सिद्धिं च प्रदायिनीम् । अज्ञानतिमिरं हन्त्रीं नौमि देवीं सरस्वतीम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: मेधा, प्रज्ञा, शास्त्रों का ज्ञान, युक्ति और वाक्-सिद्धि देने वाली तथा अज्ञान के घोर अंधकार को नष्ट करने वाली देवी सरस्वती को मैं शीश झुकाता हूँ।
English Translation: Bestower of retentive memory, insight, Vedic knowledge, reasoning power, and mastery of speech, destroyer of darkness of ignorance, to Goddess Saraswati I bow.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
सरस्वत्यष्टकं नित्यं प्रातःकाले पठेन्नरः । तस्य कण्ठे वसेद्वाणी सर्वशास्त्रविशारदः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर नित्य इस सरस्वती अष्टकम् का पाठ करता है, उसके कंठ में साक्षात सरस्वती वास करती हैं और वह समस्त शास्त्रों में निष्णात हो जाता है।
English Translation: Whoever daily recites this Saraswati Ashtakam at dawn finds Goddess Saraswati residing on their tongue and becomes a master of all arts and sciences.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीसरस्वत्यष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर श्वेत या पीले वस्त्र पहनें।
  • 2 मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख श्वेत पुष्प, पीले फल, चंदन और पुस्तकें रखें।
  • 3 घी का दीपक जलाएं और एकाग्र मन से सरस्वती अष्टकम् का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ स्मरण शक्ति, परीक्षा में सफलता और कुशाग्र बुद्धि का विकास।
  • ✔ वाणी दोष, हकलाहट और बोलने में झिझक का निवारण।
  • ✔ संगीत, कला, लेखन और उच्च शिक्षा में विशिष्ट सफलता।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: बसंत पंचमी, गुरुवार, बुधवार