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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान शिव (रुद्र) • 9 श्लोक

श्री रुद्राष्टकम्

गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अद्वितीय स्तोत्र भगवान शिव की निर्गुण व सगुण महिमा का गायन करता है। इसके पाठ से शिवजी शीघ्र अति प्रसन्न होते हैं।

रचयिता गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस उत्तरकाण्ड)
स्रोत / ग्रन्थ श्री रामचरितमानस (उत्तरकाण्ड)
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे ईशान! मोक्षस्वरूप, सर्वसमर्थ, सर्वव्यापी, ब्रह्म और वेद के स्वरूप भगवान शिव को मैं प्रणाम करता हूँ। अपने स्वरूप में स्थित, निर्गुण, निर्विकल्प, निष्काम और आकाश के समान सर्वत्र व्याप्त चिदाकाश शिव का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: I bow to the sovereign Lord Ishana, the embodiment of liberation, all-pervading, the living essence of Brahman and the Vedas, established in His own nature, free from attributes, desires, or changes, dwelling as the sky of pure consciousness.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: निराकार, ॐकार के मूल कारण, तुरीयावस्था में स्थित, वाणी, बुद्धि और इन्द्रियों की पहुंच से परे, कैलासपति, कालों के काल महाकाल, परम कृपालु, गुणों के धाम और संसार-सागर से पार उतारने वाले शिव को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Formless, primordial root of Omkara, transcending the three states (Turiya), beyond speech, intellect, and senses, Lord of the mountains, terrifying vanquisher of death, merciful abode of virtues, ferryman across the ocean of existence, I bow to You.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: हिमालय के बर्फ के समान श्वेत कान्ति वाले, गंभीर, करोड़ों कामदेवों के समान दिव्य शोभायमान शरीर वाले, जिनके मस्तक पर सुंदर गंगा की लहरें लहरा रही हैं, ललाट पर बाल-चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित हैं।
English Translation: Fair as the snow peaks of the Himalayas, profound, possessing the luster of millions of Kamadevas, upon whose head waves the sacred Ganga, with the crescent moon gleaming on His brow and serpents adorning His throat.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् । मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: हिलते हुए कुण्डल, सुंदर भृकुटि, विशाल नेत्र, प्रसन्न मुख, नीलकण्ठ, परम दयालु, बाघ की खाल का वस्त्र और मुण्डमाला धारण करने वाले सबके स्वामी कल्याणकारी शंकर का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: Wearing swinging earrings, handsome eyebrows, expansive eyes, a smiling face, blue-throated, compassionate, dressed in tiger skin and wearing a garland of skulls, I worship Shankar, the beloved Lord of all.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् । त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: प्रचंड, सर्वश्रेष्ठ, समर्थ, परमेश्वर, अखंड, अजन्मा, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, तीनों तापों का समूल नाश करने वाले, हाथ में त्रिशूल लिए और प्रेम-भाव से प्राप्त होने वाले भवानीपति शिव को मैं भजता हूँ।
English Translation: Fierce, supreme, all-powerful, undivided, unborn, luminous as millions of suns, uprooter of the three-fold miseries with His trident, attainable through pure devotion, I worship the Lord of Bhavani.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी । चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: कलाओं से परे, कल्याणकारी, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर का वध करने वाले, सच्चिदानंदमय और मोह का नाश करने वाले कामदेव के संहारक हे प्रभु! मुझ पर प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए।
English Translation: Transcending all arts, benevolent, dissolver of aeons, ever conferring bliss upon the virtuous, slayer of Tripurasura, dense mass of consciousness and bliss, dispeller of delusion, O conqueror of Cupid, be pleased, be pleased!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् । न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जब तक मनुष्य उमाकांत भगवान शिव के चरणकमलों का भजन नहीं करते, तब तक उन्हें इस लोक में या परलोक में न सुख मिलता है, न शांति और न संतापों का नाश होता है। हे समस्त प्राणियों के हृदय में बसने वाले प्रभु! प्रसन्न होइए।
English Translation: So long as mortals do not worship the lotus feet of Uma’s consort, neither in this world nor in the next do they attain happiness, peace, or relief from suffering; O indweller of all hearts, be gracious unto me!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् । जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं न योग जानता हूँ, न जप और न पूजा; हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको केवल प्रणाम करता हूँ। हे प्रभो! बुढ़ापे और जन्म-मरण के दुःखों से संतप्त और विपत्तियों में घिरे मुझ दीन की रक्षा कीजिए।
English Translation: I know neither yoga, nor mantra chanting, nor ritual worship; I only bow unto You, O Shambhu, always and forever! Tormented by the sorrows of old age, birth, and death, afflicted with miseries, protect me, O Lord Shambhu!
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये । ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मण द्वारा कहा गया यह रुद्राष्टक जो भी मनुष्य भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर भगवान शम्भु सदा प्रसन्न रहते हैं।
English Translation: This Rudrashtakam, spoken by the devotee to please Lord Shiva, brings the everlasting grace and blessings of Shambhu upon all who recite it with love.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल या प्रदोष काल में स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करें।
  • 2 शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक और सुगन्धित धूप प्रज्वलित करें।
  • 4 रुद्राक्ष माला लेकर या करबद्ध होकर लयबद्ध भुजंगप्रयात छंद में पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ भगवान आशुतोष शिव की साक्षात कृपा और मानसिक शांति की प्राप्ति।
  • ✔ कालसर्प दोष, कुंडली के ग्रह दोष और मानसिक संतापों से मुक्ति।
  • ✔ आध्यात्मिक चेतना का जागरण और अंतःकरण की परम शुद्धि।
  • ✔ सर्व प्रकार के भयों, रोगों और अकाल संकटों का शमन।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन