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BHAKTI KI SHAKTI
📜 युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण • 9 श्लोक

राधा कृष्ण अष्टकम

वृन्दावन के निकुंज में युगल सरकार के दिव्य रास, प्रेम और रूप-माधुर्य का यह अष्टक साधक के हृदय में विशुद्ध प्रेमाभक्ति और आनंद का संचार करता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य / गौड़ीय परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ गीत गोविन्द / स्तोत्र रत्नावली
छन्द स्रग्धरा / भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त राधाष्टमी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा, शुक्रवार
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
कुङ्कुमाक्तकाञ्चनाब्जगौरकान्तिभासकं कालिन्दीतटोपवने विलासलीलालसकम् । मत्तकोकिलाकलाविलापगीतमोहकं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: कुंकुम से चर्चित सुवर्ण कमल के समान कांतिमान श्रीराधा के साथ यमुना तट के उपवनों में मधुर विलास लीलाएं करने वाले तथा मतवाले कोयल के मधुर गान से मुग्ध राधिकापति श्रीकृष्ण के सुंदर चरण कमलों को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Sporting loving pastimes in Yamuna riverbank groves alongside golden-hued Sri Radha adorned with saffron, captivated by sweet songs of cuckoos, I bow to Radha's Lord's enchanting lotus feet.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
कण्ठलग्नलोलहारकुन्ददामशोभितं कुञ्चितालकभ्रमद्धसन्तलोललोचनम् । वल्लवीकदम्बचारुहास्यमन्दचेष्टितं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: कंठ में झूलते हुए मोतियों के हार और कुंद पुष्पों की माला से सुशोभित, घुंघराली अलकों के बीच मंद मुस्कान से युक्त चंचल नयनों वाले तथा गोपियों के समूह को अपनी मधुर चेष्टाओं से रिझाने वाले राधिकापति के चरण कमलों को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Neck adorned with swaying pearl necklaces and fragrant jasmine garlands, curling locks framing smiling playful eyes, enchanting the cowherd maidens with gentle glances, I revere Radha's Lord.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
मञ्जुघोषवेणुवाद्यनादपूरिताम्बरं मन्दहासचन्द्रकान्तिलोभनीयसुन्दरम् । पीतवाससं विचित्रचित्रकेकिबर्हिणं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: अपनी मधुर मुरली की तान से संपूर्ण आकाश को गुंजायमान करने वाले, चन्द्रमा की चांदनी के समान मनमोहक मुस्कान वाले, पीताम्बरधारी और मस्तक पर मोरपंख धारण करने वाले राधिकापति श्रीकृष्ण के चरण कमलों को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Filling the skies with melodious flute notes, alluring with smiles luminous like moonlight, attired in yellow silks, crown adorned with a colorful peacock feather, I bow to Radha's beloved.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
रासकेलिकौतुकेन गोपकन्यकारतं मण्डलीकृतप्रमोदहर्षनृत्यसंयुतम् । प्रेमपूरितान्तरात्मना समर्चितां शुभां नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: शरद पूर्णिमा के दिव्य रास में गोपियों के साथ मंडल बनाकर आनंदपूर्वक नृत्य करने वाले और प्रेम से परिपूर्ण अंतःकरण वाली श्रीराधा द्वारा पूजित राधिकापति के पावन चरण कमलों को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Engaged in ecstatic circular Rasa dance with the damsels of Vraja, worshipped with an overflowing heart of love by Sri Radha, I bow to the enchanting lotus feet of Radha's Lord.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
चन्द्रिकाकुलाकुलं कदम्बपुष्पवासितं यमुनाजलप्लवेषु चारुरूपराजितम् । गोपकन्यकाजनैः समर्पितात्मजीवनं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: चांदनी से धुले कदम्ब पुष्पों से सुवासित वन में यमुना जल की लहरों में अपनी सुंदर छवि से शोभायमान तथा गोपियों द्वारा अपना सर्वस्व अर्पित किए जाने वाले राधिकापति के चरण कमलों को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Shining in moonlit groves fragrant with Kadamba blooms, mirrored in Yamuna's gentle currents, to whom the gopis surrendered their very souls, I bow to Radha's Lord.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
कोटिकन्दर्पलावण्यकान्तिकामिनीपतिं विश्वमोहनं विशालनेत्रपङ्कजान्वितम् । भक्तवत्सलं कृपासिन्धुं नित्यनूतनं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: करोड़ों कामदेवों के सौंदर्य को लजाने वाली कांति से युक्त, संपूर्ण विश्व को सम्मोहित करने वाले, विशाल कमल नयनों वाले, भक्तों के परम स्नेही, दया के सागर और नित्य नूतन रहने वाले राधिकापति को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Surpassing millions of Cupids in dazzling splendour, enchanting the entire creation, with large lotus eyes, affectionate to seekers, ocean of grace, ever fresh, I revere Radha's Lord.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
राधिकाहृदम्बुजैकहंसमप्रमेयकं निकुञ्जधामसुप्रदीप्तदीर्घदीपकम् । प्रेमभक्तिदानदक्षमच्युतं परायणं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्रीराधा के हृदयकमल के एकमात्र राजहंस, निकुंज धाम के जगमगाते दिव्य दीपक, भक्तों को सहज ही प्रेमाभक्ति का दान देने में समर्थ, अच्युत और परम आश्रय राधिकापति के चरणों की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: The royal swan gliding upon Sri Radha's heart-lotus, luminous lamp of the transcendental bower, adept at bestowing pure ecstatic love, supreme refuge Acyuta, I worship Radha's beloved.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
सच्चिदानन्दविग्रहं परात्परं सनातनं सर्वलोकवन्द्यपादपद्ममञ्जुलाङ्गकम् । कृष्णरासकौतुकं विमुक्तिदं मनोहरं नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: सच्चिदानंद स्वरूप, परात्पर परब्रह्म, सनातन, समस्त लोकों द्वारा वंदित चरणकमल वाले, अति सुंदर अंगों वाले, रासलीला का कौतुक रचने वाले और मोक्ष प्रदाता राधिकापति के मनोहर चरण कमलों को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Embodiment of truth-consciousness-bliss, transcendental beyond the highest, eternal, whose feet are revered by all realms, author of divine Rasa lila, giver of liberation, I bow to Radha's Lord.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
राधाकृष्णाष्टकं पुण्यं यः पठेद्भक्तिसंयुतः । तस्य राधासमेतः श्रीहरिः प्रीतो भविष्यति ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण भक्ति और निष्ठा से इस पावन राधा-कृष्णाष्टकम का पाठ करता है, उस पर श्रीराधा सहित भगवान श्रीहरि सदा के लिए प्रसन्न होकर अपनी नित्य प्रेमाभक्ति प्रदान करते हैं।
English Translation: Whoever devoutly recites this sacred Radha Krishna Ashtakam wins the eternal pleasure and gracious blessings of Sri Hari united with Sri Radha, tasting unalloyed divine love.
✨ समाप्ति
।। इति श्री राधा कृष्ण अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः या सायं काल पीले या गुलाबी वस्त्र पहनकर युगल विग्रह के समक्ष बैठें।
  • 2 राधा-कृष्ण के सम्मुख चन्दन, इत्र, तुलसीदल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
  • 3 प्रेमपूर्वक 'नौमि राधिकापतेः पदाम्बुजं मनोहरम्' भाव से अष्टक का गान करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ वैवाहिक जीवन में अगाध प्रेम, परस्पर विश्वास और गृह-सौहार्द की स्थापना होती है।
  • ✔ मन के समस्त काम-क्रोध और ईर्ष्या-द्वेष शांत होकर विशुद्ध भगवद्-प्रेम की अनुभूति होती है।
  • ✔ वृन्दावन धाम और युगल सरकार की नित्य निकुंज सेवा का आध्यात्मिक अधिकार प्राप्त होता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: राधाष्टमी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा, शुक्रवार