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BHAKTI KI SHAKTI
📜 परब्रह्म भगवान श्री नारायण • 9 श्लोक

श्री नारायण अष्टकम्

परम पुरुषोत्तम भगवान नारायण का यह अष्टक समस्त पापों का संहार कर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि कराता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य / नारायणोपनिषद्
स्रोत / ग्रन्थ नारायणोपनिषद् / स्तोत्र रत्नावली
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, वैकुण्ठ चतुर्दशी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
वात्सल्यादभयप्रदानसमयादार्तार्तिनिर्वापणात् कारुण्यादमृताभिषेचनविधावत्यन्तशान्त्यास्पदम् । नारायणं परब्रह्म पद्मनाभं रमापतिम् । सर्वज्ञमच्युतं वन्दे सर्वलोकैकनायकम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: वात्सल्य भाव से अभय प्रदान करने वाले, संकटग्रस्तों के दुःखों को शांत करने वाले, दया के अमृत से सींचने वाले, परम शांति के धाम, परब्रह्म स्वरूप, पद्मनाभ, माता लक्ष्मी के स्वामी, सर्वज्ञ, अच्युत और समस्त लोकों के एकमात्र नायक भगवान नारायण की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Affectionately conferring fearlessness, soothing the agony of the afflicted, showering ambrosia of mercy, supreme abode of tranquility, absolute Brahman, Padmanabha, consort of Rama, omniscient Lord Narayana, I bow to You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
शङ्खचक्रगदापद्मधारिणं पीतवाससम् । कौस्तुभोद्भासितोरस्कं वन्दे देवं सनातनम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले, पीताम्बर ओढ़े हुए और वक्षःस्थल पर कौस्तुभ मणि से सुशोभित सनातन भगवान नारायण को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Bearing conch, discus, mace, and lotus in His four hands, attired in yellow robes, chest illuminated by the Kaustubha gem, I worship the eternal Lord.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
क्षीराब्धिशयनं शान्तं शेषभोगसुखावहम् । सनकादिमुनिध्येयं वन्दे देवं सनातनम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर शांत भाव से शयन करने वाले तथा सनक, सनन्दन आदि ऋषियों द्वारा ध्यान किए जाने वाले सनातन देव श्री नारायण को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Reclining serenely upon the serpent Shesha in the ocean of milk, contemplated by Sanaka and liberated sages, I bow to the eternal Lord.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
गजेन्द्रमोक्षदातारं प्रह्लादाह्लादकारकम् । भक्तत्राणपरायणं वन्दे देवं सनातनम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: ग्राह के चंगुल से गजेन्द्र को मुक्त कराने वाले, भक्त प्रह्लाद को परम आनंद देने वाले और भक्तों की रक्षा में सदा तत्पर रहने वाले सनातन देव नारायण की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Liberator of Gajendra the elephant king, delight of devotee Prahlada, ever dedicated to rescuing His devotees, I revere the eternal Lord.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
त्रैविक्रमं महाविष्णुं सर्वव्यापिनमव्ययम् । जगत्सृष्टिस्थितिकरं वन्दे देवं सनातनम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: तीन पगों से तीनों लोकों को नाप लेने वाले त्रिविक्रम, महाविष्णु, सर्वव्यापी, अविनाशी तथा संपूर्ण जगत की सृष्टि और पालन करने वाले सनातन देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Assuming Trivikrama form spanning the three worlds, all-pervading Mahavishnu, imperishable author of universal creation and sustenance, I worship Him.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
नमामि नारायणं देवं सर्वपापप्रणाशनम् । यस्य नामस्मृतौ सत्यां मुच्यते संसृतेर्नरः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त पापों का समूल नाश करने वाले भगवान नारायण को मैं नमन करता हूँ, जिनके पावन नाम का केवल सच्चे मन से स्मरण करने मात्र से मनुष्य संसार-सागर से मुक्त हो जाता है।
English Translation: I bow to Lord Narayana, the purifier of all sins, through the sincere remembrance of whose holy name a mortal is liberated from worldly bondage.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
लक्ष्मीनिकेतनं धन्यं भक्तकामप्रदायकम् । चतुर्भुजं घनश्यामं वन्दे देवं सनातनम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: माता लक्ष्मी के नित्य निवास स्थान, धन्य स्वरूप, भक्तों के समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाले, चतुर्भुज और मेघश्याम वर्ण वाले सनातन देव नारायण को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Abode of Lakshmi, glorious granter of devotees' noble aspirations, four-armed and dark like rain-bearing clouds, I bow to the eternal Lord.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
शरण्यं सर्वलोकानां परमानन्दविग्रहम् । नारायणं दयासिन्धुं वन्दे देवं सनातनम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त लोकों के परम शरण्य, परमानन्द की साक्षात् मूर्ति, दया के अगाध सागर भगवान नारायण सनातन प्रभु की मैं सादर वंदना करता हूँ।
English Translation: Sanctuary of all cosmic worlds, embodiment of supreme ecstasy, boundless ocean of mercy, I worship the eternal Lord Narayana.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
नारायणाष्टकं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धयान्वितः । स सर्वपापनिर्मुक्तो विष्णोः सायुज्यमाप्नुयात् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से इस पवित्र नारायणाष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर अंत में भगवान विष्णु के सायुज्य मोक्ष को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever recites this holy Narayana Ashtakam with sincere faith is released from all sins and attains supreme merger into Lord Vishnu's realm.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीनारायणोपनिषदोक्तं श्री नारायण अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 गुरुवार या एकादशी को प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र पहनें।
  • 2 भगवान लक्ष्मीनारायण के समक्ष घी का दीपक जलाएं और पीले पुष्प व तुलसीदल अर्पित करें।
  • 3 ॐ नमो नारायणाय मन्त्र का स्मरण करते हुए इस अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ जन्म-जन्मान्तरों के पाप धुल जाते हैं और साधक को वैकुण्ठ पद की प्राप्ति होती है।
  • ✔ घर में माता लक्ष्मी और भगवान नारायण की नित्य कृपा से धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
  • ✔ भय, चिंताओं और आकस्मिक संकटों से नारायण कवच के समान रक्षा होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, वैकुण्ठ चतुर्दशी