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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्रीकृष्ण • 9 श्लोक

श्री कृष्णाष्टकम्

आदि शंकराचार्य कृत यह अष्टक "वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्... कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्" के जयघोष से भगवान श्रीकृष्ण को संपूर्ण जगत का गुरु मानकर वन्दना करता है।

रचयिता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ श्रीमद्भागवत व आदि शंकर स्तोत्र
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त बुधवार, जन्माष्टमी, एकादशी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: वसुदेव के पुत्र, देवस्वरूप, कंस और चाणूर का मर्दन करने वाले, माता देवकी को परमानंद प्रदान करने वाले तथा समस्त जगत के गुरु भगवान श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ।
English Translation: To the divine son of Vasudeva, slayer of Kamsa and Chanura, supreme joy of Mother Devaki, I bow unto Lord Krishna, the Teacher of the Universe.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
अतसीपुष्पसङ्काशं हारनूपुरशोभितम् । रत्नकङ्कणकेयूरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: अलसी (तीसी) के नीले पुष्प के समान श्यामवर्ण, गले में हार और चरणों में नूपुर से सुशोभित, हाथों में रत्नमय कंकण और बाजूबंद धारण करने वाले जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Radiant like the blue Atasi blossom, adorned with pearl necklaces and ringing anklets, bearing gem-studded bracelets and armlets, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचन्द्रनिभाननम् । विलसत्कुण्डलं देवं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: घुंघराली अलकों (लटों) से युक्त, पूर्णिमा के चन्द्रमा के समान मनोहर मुख वाले और कानों में देदीप्यमान कुण्डलों से सुशोभित जगद्गुरु श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ।
English Translation: With lovely curling locks framing a face luminous like the full moon, graced by swinging brilliant earrings, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
मन्दारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम् । बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: मंदार पुष्पों की दिव्य सुगंध से युक्त, मनोहर हास्य वाले, चतुर्भुज रूपधारी और मस्तक पर मोरपंख का मुकुट धारण करने वाले जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Fragrant with the perfume of Mandara blossoms, smiling charmingly, endowed with four divine arms, crown crested with peacock feathers, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम् । यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान विशाल नयनों वाले, सजल नीले मेघ के समान कान्तिमान और यदुवंशियों के शिरोमणि जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Having eyes wide like blossoming lotus petals, skin resembling a dark monsoon raincloud, crest-jewel of the Yadu dynasty, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
रुक्मिणीकेलिसंयुक्तं पीताम्बरसुशोभितम् । अवाप्ततुलसीगन्धं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: देवी रुक्मिणी के साथ विहार करने वाले, सुंदर पीताम्बर से सुशोभित और तुलसी की पावन सुगंध से महकते हुए जगद्गुरु श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ।
English Translation: Sporting lovingly with Queen Rukmini, beautified by golden yellow silk garments, imbued with the sacred fragrance of Tulasi leaves, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
गोपिकानां कुचद्वन्द्वकुङ्कुमाङ्कितवक्षसम् । श्रीनिकेतं महेष्वासं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: गोपिकाओं के कुंकुम से चिन्हित वक्षःस्थल वाले, महालक्ष्मी के निवास स्थान और महान धनुर्धर जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Whose chest is graced with vermilion markings of the Gopis, eternal sanctuary of Lakshmi, wielder of the great bow, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
श्रीवत्साङ्कं महोरस्कं वनमालाविराजितम् । शङ्खचक्रधरं देवं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: वक्षःस्थल पर श्रीवत्स चिन्ह धारण करने वाले, विशाल छाती वाले, वैजयंती वनमाला से सुशोभित तथा हाथों में शंख और चक्र धारण करने वाले जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Bearing the sacred Srivatsa mark upon His expansive chest, adorned with a garland of forest blossoms, wielder of conch and discus, I bow to Lord Krishna, the Universal Guru.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् । कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर इस पावन कृष्णाष्टकम् का पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मों के संचित पाप केवल इस स्मरण मात्र से नष्ट हो जाते हैं।
English Translation: Whoever rising at dawn recites this holy Krishnashtakam finds the sins of millions of past births dissolved by the mere remembrance of the Lord.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्रीकृष्णाष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें।
  • 2 श्रीकृष्ण विग्रह के सम्मुख तुलसी दल, माखन-मिश्री और चंदन अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर प्रेम भाव से पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और श्रीकृष्ण कृपा की प्राप्ति।
  • ✔ पारिवारिक सुख, संतान सुख और गृह क्लेश की शांति।
  • ✔ पापों का नाश और अंतःकरण में भगवत्प्रेम का उदय।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: बुधवार, जन्माष्टमी, एकादशी