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BHAKTI KI SHAKTI
📜 माँ गङ्गा • 9 श्लोक

गङ्गाष्टकम्

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह अष्टक पतितपावनी मां गंगा की निर्मल जलधारा की महिमा गाते हुए जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करता है।

रचयिता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ स्कन्द पुराण (काशी खण्ड)
छन्द शिखरिणी छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त गंगा दशहरा, पूर्णिमा, मकर संक्रांति
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
भगवति भवलीलामौलिमाले तवाम्भः कणमणुपरिमाणं प्राणिनो ये स्पृशन्ति । अमरनगरनारीचामरग्राहिणीनां विगतकलिकलङ्कातङ्कमङ्के लुठन्ति ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे भगवती गंगे! भगवान शिव के मस्तक की लीला-माला! आपके पावन जल के एक अत्यंत सूक्ष्म कण का भी जो प्राणी स्पर्श करते हैं, वे कलियुग के समस्त पापों और भयों से मुक्त होकर देवलोक में अप्सराओं के सानिध्य में आनंद भोगते हैं।
English Translation: O Goddess Ganga, sporting garland atop Lord Shiva’s crest! Mortals who touch even an infinitesimal droplet of Your sacred waters are cleansed of Kali's taints and rejoice in celestial realms.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
ब्रह्माण्डं खण्डयन्ती हरशिरसि जटावल्लिमुल्लासयन्ती स्वर्गादुत्पतन्ती कनकगिरिगुहागण्डशैलात्स्खलन्ती । क्षोणीपृष्ठे लुठन्ती दुरितचयचमूनिर्भरं भर्त्सयन्ती पाथोधौ सम्पतन्ती जननि विहरते जाह्नवीयं पुनातु ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जो ब्रह्माण्ड को भेदती हुई, शिव की जटाओं को उल्लसित करती हुई, स्वर्ग से उतरकर सुमेरु की गुफाओं और शिलाओं पर उछलती हुई, पृथ्वी पर प्रवाहित होकर पापों की सेना को भगाती हुई समुद्र में जा मिलती हैं, वे माता जाह्नवी गंगा हमें पवित्र करें।
English Translation: Piercing the cosmic sphere, dancing through Shiva’s matted locks, cascading from heaven across mountain caverns, rolling over earth to rout sins, merging into the ocean—may Mother Jahnavi Ganga purify us!
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
मज्जन्मातङ्गकुम्भच्युतमदमदिरामोदसंमोहनाङ्गैः स्नानोन्मज्जन्मुनीन्द्रैरनुपमचरणैः सेव्यमाना समन्तात् । वेदोद्घोषैर्द्विजानां कलकलमुखरैस्तीरभावे विचित्रा पाषाणैः स्खलिताम्बुः सुरगणनमिता जाह्नवी नः पुनातु ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जिसमें स्नान करते मतवाले गजों के गंडस्थल का मद सुगंध बिखेरता है, मुनीश्वरों द्वारा जिसके पावन जल की सेवा होती है, जिसके तटों पर वेदों की गूंज और कलकल ध्वनि होती है तथा देवता जिसे प्रणाम करते हैं, वह गंगा हमें पावन करे।
English Translation: Fragrant with celestial scents, served by sages taking holy dips, shores echoing with Vedic chants and melodious ripples, bowed to by the gods—may Mother Jahnavi purify us!
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
न त्वां स्तौमि न वेद्मि ते महिमानं देवि त्रिलोकीपतेर्मातः पावनकारिणि त्रिदशधुन्नीलाम्बराच्छादिते । किं तु त्वां भवतीमहं भवरुजां संहारिणीमाश्रितो मातर्जाह्नवि शम्भुमौलिमणिमन्दाराम्बुजे पातु माम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: हे देवि! न मैं आपकी पूरी स्तुति कर सकता हूँ और न आपकी अगाध महिमा को जान पाता हूँ; केवल इतना जानता हूँ कि आप भव-रोग को नष्ट करने वाली हैं। हे शिव के मस्तक की मणिरूपा गंगा! मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: O Goddess, neither can I fully praise You nor grasp Your boundless glory; I only know You eradicate the disease of worldly existence. O jewel upon Shiva's crest, Mother Jahnavi, protect me!
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
मातर्जाह्नवि शम्भुसङ्गविहारे त्वत्तोयलेशैः स्पृशां जीवानामपि मुक्तिदाननिरता त्वं कल्पवल्ली भुवि । ये त्वां भक्तिभरेण संप्रणमतो ध्यायन्ति तेषां पुनर्नास्त्येवात्र भवाब्धिघोरजठरे मज्जो नरो जायते ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: हे माँ जाह्नवी! आपके जल की एक बूंद के स्पर्श से भी जीवों को मुक्ति मिल जाती है। आप पृथ्वी पर साक्षात कल्पलता हैं। जो भक्तिपूर्वक आपको प्रणाम और ध्यान करते हैं, वे पुन: इस संसार के घोर गर्भ में नहीं गिरते।
English Translation: O Mother Jahnavi, bestowing liberation by even a droplet of Your water, You are the wish-fulfilling vine on earth; whoever bows and meditates upon You never plunges again into the womb of rebirth.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
गाङ्गे वारिणि शीतले सुविमले मज्जनं कुर्वतां पापानि प्रलयं प्रयान्ति सहसा पुण्यानि संवर्धते । तस्मात्त्वां सततं भजामि वरदे संसारतापच्छिदे गङ्गे देवि नमोऽस्तु ते शुभकरे मोक्षप्रदे शाश्वते ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: गंगा के शीतल और परम निर्मल जल में स्नान करने वालों के पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं और पुण्यों की वृद्धि होती है। इसलिए हे संसार के तापों को काटने वाली वरदायिनी गंगा! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
English Translation: Those who immerse in the cool, crystal waters of Ganga have all sins dissolved instantly and virtues magnified; therefore I worship You, O dispeller of earthly misery, granter of liberation!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
तीरे ते विहरन्ति ये जलकणैः संस्पृष्टगात्रा नरास्ते मुक्ता भवबन्धनान्निरुपमास्तेषां गतिर्दुर्लभा । किं ब्रूमस्तव देवि पावनविधौ माहात्म्यमुच्चैस्तरं ब्रह्मादीन्द्रसुराधिपैः प्रणमिते गङ्गे नमस्तेऽस्तु ते ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो लोग आपके तट पर विहार करते हैं और जिनके अंग आपके जलकणों से स्पर्श होते हैं, वे भवबंधनों से मुक्त हो दुर्लभ परम गति को पाते हैं। ब्रह्मा और इन्द्रादि देवताओं द्वारा वन्दित हे गंगे! आपको नमस्कार है।
English Translation: Those who walk Your shores and whose limbs are sprayed by Your droplets are freed from worldly bonds and attain supreme liberation. Revered by Brahma and Indra, salutations to You, O Ganga!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
तव जलममलं ये पिबन्ति प्रसन्नास्तेषां देहे वसन्ति प्रवरसुरगणाः सर्वतीर्थानि चैव । अन्ते ते यान्ति रम्यं शिवमयहृदयं शाश्वतं धाम दिव्यं गङ्गे मातः प्रसीद प्रणतजनकृते त्वं प्रपाहि प्रपन्नम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जो प्रसन्नचित्त होकर आपके निर्मल जल का पान करते हैं, उनके शरीर में समस्त देवता और तीर्थ वास करते हैं तथा अंतकाल में वे शिवजी के परम धाम को जाते हैं। हे माँ गंगे! मुझ शरणागत पर प्रसन्न होकर मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Those who joyfully sip Your pure water harbor all gods and sacred pilgrimages in their bodies, and finally attain Shiva's eternal abode. O Mother Ganga, be pleased and protect this surrendered soul!
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
गङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धया युतः । सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक इस पवित्र गङ्गाष्टकम् का पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर अंत में वैकुण्ठ लोक में प्रतिष्ठित होता है।
English Translation: Whoever with faith recites this meritorious Ganga Ashtakam becomes cleansed of all iniquities and is exalted in the celestial realm of Lord Vishnu.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं गङ्गाष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 गंगा तट पर या घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • 2 तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर माँ गंगा का ध्यान करें।
  • 3 श्वेत पुष्प, चन्दन और धूप-दीप अर्पित करें।
  • 4 गंगाष्टकम् का शांत और पवित्र मन से पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ शारीरिक, मानसिक और वाचिक समस्त पापों से मुक्ति।
  • ✔ मानसिक शुद्धि, तनावमुक्ति और अंतःकरण में शीतलता।
  • ✔ गंगा दशहरा और पर्वों पर पाठ से सहस्र अश्वमेध यज्ञ का पुण्य।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: गंगा दशहरा, पूर्णिमा, मकर संक्रांति