Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्री गणेश • 9 श्लोक

गणेशाष्टकम्

विघ्नहर्ता भगवान गणेश के निर्गुण-सगुण, ब्रह्माण्ड-व्यापक स्वरूप की स्तुति करने वाला यह अष्टक समस्त नए कार्यों, व्यापार और मांगलिक अनुष्ठानों की निर्विघ्न सिद्धि प्रदान करता है।

रचयिता गणेश पुराण
स्रोत / ग्रन्थ गणेश पुराण (उपासना खण्ड)
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
यतोऽनन्तशक्तेरनन्ताश्च जीवा यतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते । यतो भाति सर्वं त्रिधा भेदभिन्नं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी अनंत शक्ति से अनंत जीवों की उत्पत्ति हुई है, जिन निर्गुण और अप्रमेय से तीनों गुणों का विस्तार हुआ है, और जिनसे यह त्रिगुणात्मक संसार प्रकाशित होता है, उन विघ्नराज गणेश को हम सदा प्रणाम और भजन करते हैं।
English Translation: From whose infinite potency countless living beings arise, from whose unconditioned nature the three cosmic qualities unfold, illuminating the universe—to that eternal Lord Ganesha we bow and offer worship.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
यतोऽजायताद्भूतविस्तारविश्वं यतो वारिधौ वारिवाक्यप्रतीतिः । यतः सूर्यचन्द्राग्नयो भासमानाः सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनसे यह अद्भुत विस्तृत विश्व उत्पन्न हुआ है, जिनसे समुद्र और जल-तत्त्व अस्तित्व में हैं, और जिनसे सूर्य, चन्द्रमा व अग्नि प्रकाशित होते हैं, उन भगवान गणेश को हम सदा प्रणाम करते हैं।
English Translation: From whom this wondrous vast universe was born, from whom water and oceans derive their nature, by whose power the sun, moon, and fire radiate light—to that Lord Ganesha we bow.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
यतोऽनन्तरूपो विधाता विधात्री यतो चक्रवर्ती शिवो विष्णुसंज्ञः । यतः सर्वदेवा नमोऽनेकभावाः सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनसे अनंत रूपों वाले विधाता ब्रह्मा और सरस्वती, सर्वसमर्थ शिव और विष्णु तथा समस्त देवी-देवता प्रकट हुए हैं, उन सर्वकारण गणेश को हम प्रणाम करते हैं।
English Translation: From whom Brahma, Saraswati, sovereign Shiva, Vishnu, and all hosts of deities manifest—to that primal cause, Lord Ganesha, we bow.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
यतो ज्ञानसम्पत्तिरुद्भासते सा यतो मोहजालं लयं याति सद्यः । यतः शान्तिसारं परं प्राप्यते वै सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी कृपा से दिव्य ज्ञान की संपदा प्राप्त होती है, जिनसे मोह-माया का जाल तत्काल नष्ट हो जाता है और जिनसे परम शांति की प्राप्ति होती है, उन गणेश को हम भजते हैं।
English Translation: By whose grace the wealth of supreme knowledge shines, illusions dissolve instantly, and profound inner peace is attained—to that Lord Ganesha we offer worship.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
गणाधीशमीशानसूनुं त्रिनेत्रं गजास्यं सुराधीशपूज्यं शरण्यम् । परं मोदकाहारमोंकाररूपं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: गणों के स्वामी, शिवपुत्र, त्रिनेत्रधारी, गजमुख, देवराज इन्द्र द्वारा पूजित, शरणागतवत्सल, मोदक प्रिय और ॐकार स्वरूप भगवान गणेश को हम सदा प्रणाम करते हैं।
English Translation: Leader of celestial hosts, son of Shiva, three-eyed, elephant-faced, adored by Indra, haven of the surrendered, lover of modakas, embodiment of Omkara—to Lord Ganesha we bow.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
प्रसन्नप्रदं भक्तविघ्नप्रणाशं महाकायकं चन्द्रखण्डावतंसम् । वराभीतिहस्तं गदापाशधारं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: प्रसन्नता देने वाले, भक्तों के विघ्नों को हरने वाले, विशालकाय, मस्तक पर बालचन्द्र धारण करने वाले, वर-अभय मुद्रा, गदा और पाश धारण करने वाले गणेश को हम भजते हैं।
English Translation: Bestower of joy, vanquisher of devotees' obstacles, immense-bodied, crescent-crested, holding gestures of boon and fearlessness along with mace and noose—to Lord Ganesha we bow.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
अनेकैकभेदं प्रपञ्चातिगं तं विचिन्त्यं स्वरूपं मनोवागगम्यम् । परब्रह्मरूपं विनाशाभयं तं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: एक होते हुए भी अनेक रूपों में भासने वाले, संसार के प्रपंचों से परे, मन और वाणी की पहुंच से अगम्य, परब्रह्म स्वरूप और विनाश के भय से रहित गणेश को हम प्रणाम करते हैं।
English Translation: One yet appearing manifold, transcending mundane illusions, beyond the reach of mind and speech, Supreme Brahman, fearless of dissolution—to Lord Ganesha we bow.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
सुरेन्द्रैर्मुनीन्द्रैः सदा वन्द्यमानं भवाम्भोधिपोतं विमुक्तिप्रदं तम् । महाविघ्नहर्तारमेकं शरण्यं सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: देवराजों और श्रेष्ठ मुनियों द्वारा नित्य वन्दित, संसार-सागर को पार कराने वाली नौका समान, मोक्षदाता और महाविघ्नों को हरने वाले एकमात्र रक्षक गणेश को हम प्रणाम करते हैं।
English Translation: Constantly praised by gods and exalted sages, a ship across the sea of existence, granter of liberation, sole remover of monumental obstacles—to Lord Ganesha we bow.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
गणेशाष्टकं यः पठेद्भक्तियुक्तो न तस्य क्वचिद् विघ्नबाधा प्रबाधेत । लभेदृद्धिसिद्धी श्रियं शान्तिसौख्यं स मोक्षं च यात्यन्तकाले न संशयः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भक्तिभाव से इस गणेशाष्टकम् का पाठ करता है, उसे कभी कोई विघ्न-बाधा स्पर्श नहीं करती; वह रिद्धि-सिद्धि, ऐश्वर्य, शांति व सुख प्राप्त करता है और अंत में मोक्ष पाता है।
English Translation: Whoever recites this Ganesha Ashtakam with devotion is never impeded by obstacles; they attain prosperity, spiritual perfections, peace, and ultimate liberation without doubt.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीगणेशाष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर पीले या लाल वस्त्र पहनें।
  • 2 गणेश जी को दूर्वा, लाल सिन्दूर, मोदक या लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर एकाग्रचित्त होकर गणेशाष्टकम् का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ व्यापार, शिक्षा और नौकरी में आने वाले समस्त विघ्नों का समूल नाश।
  • ✔ रिद्धि-सिद्धि, बुद्धि, विवेक और धन-धान्य की प्रचुर वृद्धि।
  • ✔ घर में मांगलिक कार्यों की शुभ शुरुआत और शांति का वातावरण।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी