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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती धूमावती (सातवीं महाविद्या) • 9 श्लोक

धूमावती अष्टकम

सातवीं महाविद्या मां धूमावती का यह अष्टक साधक के जीवन से घोर दारिद्र्य, कर्ज, अज्ञात शत्रु, प्रेत बाधा और समस्त कलहों को भस्म कर परम वैराग्य देता है।

रचयिता शाक्त तन्त्र परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ धूमावती तन्त्र / शाक्त प्रमोद
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त धूमावती जयंती (ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी), शनिवार, अमावस्या
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
धूमावती मुखं धौतं काकध्वजरथस्थिता । दीर्घा विवर्णा मलिना मुक्तकेशी भयङ्करी ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: कौवे की ध्वजा वाले रथ पर विराजमान, दीर्घ शरीर वाली, फीके रंग वाली, मलिन वस्त्रों से आच्छादित, खुले बिखरे केशों वाली और शत्रुओं के लिए अत्यंत भयंकर स्वरूप वाली भगवती धूमावती को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Seated upon a chariot marked with a crow banner, tall, pale, draped in coarse garments, with unbound disheveled hair, fearsome to evil forces, I bow to Dhumavati.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
शूर्पहस्ता विरूपाक्षी विप्रचित्ता मलिनाम्बरा । दारिद्र्यनाशनायै च धूमावत्यै नमो नमः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथ में सूप (सूपड़ा) लिए हुए, तिरछी दृष्टि वाली, सांसारिक प्रपंचों से विरक्त, मलिन वस्त्र धारण करने वाली और भक्तों की दरिद्रता का नाश करने वाली मां धूमावती को बारम्बार नमस्कार है।
English Translation: Holding a winnowing basket, with oblique penetrating eyes, detached in mind, wearing worn clothes, destroyer of poverty and lack, salutations unto Dhumavati.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
कलहप्रिया महाघोरा क्षुत्पिपासास्वरूपिणी । रुष्टा च शत्रुनाशाय धूमावत्यै नमो नमः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: शत्रुओं के बीच कलह पैदा करने वाली, महाघोर, क्षुधा और पिपासा (भूख-प्यास) का स्वरूप धारण करने वाली तथा दुष्टों पर कुपित होकर उनका संहार करने वाली मां धूमावती को नमन है।
English Translation: Creating discord among evil adversaries, formidable, embodying cosmic hunger and thirst, wrathful toward the wicked for their destruction, salutations to Dhumavati.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
विधवावेशधारिण्यां कालरात्रिसमानया । सर्वदुःखप्रशमनायै धूमावत्यै नमो नमः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: विधवा का श्वेत वेष धारण करने वाली, प्रलयकाल की कालरात्रि के समान भीषण और शरणागतों के समस्त दुःखों और संतापों को शांत करने वाली भगवती धूमावती को नमस्कार है।
English Translation: Attired in ascetic widow's garb, resembling the cosmic night of dissolution (Kalaratri), soother of all suffering of the surrendered, salutations to Dhumavati.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
पिशाचभूतसङ्घानां शासिनी भयहारिणी । भक्तरक्षणदक्षा च धूमावत्यै नमो नमः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: भूत, प्रेत और पिशाचों के समूह पर शासन करने वाली, उनके भय को हरने वाली तथा अपने भक्तों की रक्षा में सदा तत्पर रहने वाली मां धूमावती को मेरा प्रणाम है।
English Translation: Sovereign ruler over spirits and negative entities, dispeller of supernatural dread, adept in shielding Her devotees, salutations to Mother Dhumavati.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
तंत्रबाधाप्रशमनी शत्रुबुद्धिप्रणाशिनी । मोक्षदात्री मुनीन्द्राणां धूमावत्यै नमो नमः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त तांत्रिक अभिचार और मारण-उच्चाटन बाधाओं को शांत करने वाली, शत्रुओं की बुद्धि को नष्ट करने वाली और मुनियों को परम मोक्ष देने वाली मां धूमावती को नमस्कार है।
English Translation: Neutralizer of hostile occult sorcery, confounder of evil adversaries' intellect, bestower of absolute liberation on ascetic sages, I bow to Dhumavati.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
घोररूपधरे देवि सर्वक्लेशविनाशिनी । पाहि मां शरणापन्नं धूमावत्यै नमो नमः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: घोर रूप धारण करने वाली, समस्त क्लेशों और व्याधियों का नाश करने वाली हे देवि! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए। हे मां धूमावती! आपको बार-बार प्रणाम है।
English Translation: O Goddess of awe-inspiring form, destroyer of all distress, protect me who have sought shelter in You! Salutations again and again unto Dhumavati.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
असारं संसृतिं ज्ञात्वा वैराग्यफलदायिनी । दारिद्र्यतिमिरघ्नायै धूमावत्यै नमो नमः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: इस संसार को असार और मिथ्या जानकर साधक को सच्चा वैराग्य प्रदान करने वाली तथा दरिद्रता के घोर अंधकार को नष्ट करने वाली भगवती धूमावती को सादर नमन है।
English Translation: Revealing the transience of mundane existence, granter of spiritual detachment, dispeller of the deep gloom of poverty, salutations unto Mother Dhumavati.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
धूमावत्यष्टकं पुण्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः । न तस्य शत्रुबाधा स्याद्दारिद्र्यं च विनश्यति ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पवित्र होकर संयमित मन से इस पावन धूमावती अष्टकम का पाठ करता है, उसे जीवन में कभी शत्रु बाधा नहीं सताती और उसकी दरिद्रता सदा के लिए नष्ट हो जाती है।
English Translation: Whoever recites this sacred Dhumavati Ashtakam with disciplined purity is never troubled by enemy afflictions, and their poverty is permanently eradicated.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीधूमावतीतन्त्रोक्तं श्री धूमावती अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 शनिवार को संध्याकाल में काले या धूसर वस्त्र धारण कर दक्षिण दिशा की ओर मुख करें।
  • 2 मां धूमावती के समक्ष तिल के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल व काले चने का भोग लगाएं।
  • 3 दारिद्र्य नाश और शत्रु शांति की प्रार्थना करते हुए इस अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ वर्षों पुराना भयंकर कर्ज, आर्थिक तंगी और दुर्भाग्य का समूल नाश होता है।
  • ✔ तांत्रिक प्रयोग, काला जादू, प्रेत बाधा और गुप्त शत्रुओं की शक्ति समाप्त हो जाती है।
  • ✔ संसार के मिथ्या प्रपंचों से मुक्ति मिलकर उच्च आध्यात्मिक वैराग्य और आत्म-साक्षात्कार होता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: धूमावती जयंती (ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी), शनिवार, अमावस्या