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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान चन्द्रशेखर (शिव) • 9 श्लोक

चन्द्रशेखराष्टकम्

अल्पायु मार्कण्डेय ऋषि द्वारा मृत्यु के देवता यमराज से अपनी रक्षा हेतु रचा गया यह अष्टक मृत्यु, काल और असाध्य भय का संहार कर दीर्घायु और शिवलोक प्रदान करता है ("चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम्")।

रचयिता ऋषि मार्कण्डेय
स्रोत / ग्रन्थ स्कन्द पुराण व मार्कण्डेय पुराण
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, त्रयोदशी (प्रदोष), महाशिवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम् । चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्ष माम् ॥ रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृङ्गनिकेतनं शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम् । क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे चन्द्रशेखर! हे चन्द्रशेखर! मेरी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए! जिन्होंने मेरु पर्वत का धनुष, शेषनाग की प्रत्यंचा और विष्णु-अग्नि का बाण बनाकर एक क्षण में त्रिपुरासुर की तीनों पुरियों को भस्म कर दिया, उन चन्द्रशेखर शिव का जब मैंने आश्रय ले लिया है, तो यमराज मेरा क्या कर सकता है!
English Translation: O Moon-crested Lord, protect me, preserve me! Who made Mount Meru His bow, Vasuki His bowstring, and Vishnu-Agni His arrow to consume the three cities of Tripurasura in an instant, worshiped by celestials—having taken shelter in Chandrashekhara, what harm can Death (Yama) do to me!
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
पञ्चपादपपुष्पगन्धपदानुमोदितपादपद्ममुमापते शशिशेखरं गिरिजासखं कमलापतिप्रियसुप्रियम् । दग्धमन्मथमक्षयं भवतारकं भवनाशनं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: कल्पवृक्षों के पुष्पों से जिनके चरणकमल सुगंधित हैं, उमापति, पार्वती के प्रिय सखा, भगवान विष्णु के परम प्रिय, कामदेव को भस्म करने वाले, अविनाशी और संसार से पार उतारने वाले चन्द्रशेखर का जब मैंने आश्रय लिया है, तो यमराज मेरा क्या बिगाड़ सकता है!
English Translation: Whose lotus feet are fragrant with blossoms of celestial trees, consort of Uma, dear friend of Vishnu, incinerator of Cupid, imperishable savior from cyclic existence—having taken shelter in Chandrashekhara, what can Death do to me!
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
मत्तवारणमुख्यचर्मकृताम्बरावरणं परं भस्मलेपितविग्रहं फणिहारभूषणशोभितम् । काकलोलकरालकालकदम्बपादपसंस्थितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: मदमस्त हाथी के चर्म को वस्त्र बनाने वाले, भस्म से लेपित अंगों वाले, सर्पों के हार से सुशोभित और काल को भी वश में रखने वाले उन देवाधिदेव चन्द्रशेखर का जब मैंने आश्रय ले लिया है, तो यमराज मेरा क्या कर सकता है!
English Translation: Draped in the hide of a mighty elephant, limbs anointed with sacred ash, adorned with serpent garlands, supreme master over Time itself—having taken shelter in Chandrashekhara, what can Death do to me!
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कुण्डलीकृतकुण्डलं मुनिमानसं नवपङ्कजप्रभमन्मथप्रमथप्रदं करुणाकरं त्रिजगत्पतिम् । भक्तवत्सलमीशमद्भुतवैभवं भुवनाधिपं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: सर्पों के कुण्डल पहनने वाले, मुनियों के मन में रमने वाले, करुणा के सागर, तीनों लोकों के स्वामी, भक्तवत्सल और अद्भुत वैभव वाले जगत्पति चन्द्रशेखर का जब मैंने आश्रय ले लिया है, तो यमराज मेरा क्या कर सकता है!
English Translation: Wearing coiled serpents as earrings, dwelling in the hearts of sages, ocean of mercy, Lord of the three worlds, loving to devotees, of wondrous majesty—having taken shelter in Chandrashekhara, what can Death do to me!
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
अन्धकान्तकमन्तकप्रमथाधिपं नरकापहं मुनिसेवितं सुरवन्दितं भवपापशोकविनाशनम् । कालकूटविषापहं त्रिलोचनं जगदीश्वरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: अंधकासुर का संहार करने वाले, यमराज के भी शासक, नरक से उद्धार करने वाले, मुनियों और देवताओं द्वारा वन्दित, हलाहल कालकूट विष को कंठ में धारण करने वाले त्रिनेत्रधारी चन्द्रशेखर की शरण में होने पर यमराज मेरा क्या कर सकता है!
English Translation: Slayer of Andhakasura, sovereign master of Death, deliverer from hell, adored by sages and celestials, drinker of Kalakuta poison, three-eyed Lord of the universe—sheltered in Chandrashekhara, what can Death do to me!
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
भूरिभारविदारणं भवतारणं भवहारिणं शितिकण्ठमीप्सितदानदं मरुदंशुकोटिसमप्रभम् । विश्वमङ्गलकारणायितपादपद्ममनुत्तमं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: पृथ्वी के भारी भार को उतारने वाले, संसार से तारने वाले, नीलकण्ठ, मनोवांछित फल देने वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी और विश्व के कल्याणकारी पादपद्मों वाले चन्द्रशेखर का जब मैंने आश्रय लिया है, तो यमराज मेरा क्या करेगा!
English Translation: Reliever of the earth's heavy burdens, savior across worldly existence, blue-throated, fulfiller of aspirations, effulgent as millions of suns, whose lotus feet cause universal auspiciousness—sheltered in Chandrashekhara, what can Death do to me!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
दक्षयज्ञविनाशनं त्रिगुणात्मकं गुणवर्जितं गिरिराजकन्यकया समाश्रितवामभागमनुत्तमम् । सर्वभूतहृदि स्थितं प्रमथाधिपं वरदं विभुं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: दक्ष के यज्ञ का संहार करने वाले, त्रिगुणात्मक होते हुए भी निर्गुण, जिनके वाम अंग में गिरिराजपुत्री पार्वती विराजती हैं, समस्त जीवों के हृदय में स्थित, सर्वव्यापक वरदाता चन्द्रशेखर की शरण में होने पर यमराज मेरा क्या करेगा!
English Translation: Destroyer of Daksha's sacrifice, beyond the three Gunas yet their source, whose left flank is graced by Parvati, indweller of all hearts, all-pervading—sheltered in Chandrashekhara, what can Death do to me!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
अनघमद्वितीयमपारसारमपारसंविदुदाहृतं प्रणमज्जनाय मुदं ददानममर्त्यमव्ययमव्यग्रम् । शरण्यमेकमनन्यचित्ततया भजे शिवमीश्वरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: निष्पाप, अद्वितीय, अपार ज्ञानस्वरूप, शरणागतों को परमानंद देने वाले, अविनाशी, एकमात्र परम शरण्य देवाधिदेव शिव का जब मैंने अनन्य भाव से आश्रय ले लिया है, तो यमराज मेरा क्या कर सकता है!
English Translation: Spotless, non-dual, boundless essence of pure consciousness, bestower of joy on surrendered souls, immortal, changeless, sole supreme refuge—sheltered in Chandrashekhara, what can Death do to me!
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
चन्द्रशेखराष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् । तस्य नश्यति मृत्युभयं स याति परमां गतिम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर इस पावन चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ करता है, उसका मृत्यु का भय सदा के लिए नष्ट हो जाता है और वह परम गति को प्राप्त होता है।
English Translation: Whoever rising at dawn recites this holy Chandrashekhara Ashtakam is forever freed from the dread of death and attains supreme spiritual liberation.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीचन्द्रशेखराष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल या प्रदोष वेला में स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र पहनें।
  • 2 शिवलिंग पर कच्चा दूध, जल और बेलपत्र अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर मृत्युंजय भाव से चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम-भय का समूल निवारण।
  • ✔ दीर्घायु, उत्तम आरोग्य और मानसिक दृढ़ता की प्राप्ति।
  • ✔ कुंडली में चन्द्रमा जनित दोष (केमद्रुम, विष योग) और ग्रह पीड़ा की शांति।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, त्रयोदशी (प्रदोष), महाशिवरात्रि