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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्री बिन्दुमाधव (काशी पञ्चगंगा) • 9 श्लोक

बिन्दुमाधव अष्टकम्

काशी के प्रधान वैष्णव तीर्थ पञ्चगंगा घाट पर विराजमान भगवान बिन्दुमाधव का यह अष्टक कार्तिक स्नान और मुक्ति का साक्षात् फल प्रदान करता है।

रचयिता महर्षि वेदव्यास / काशी खण्ड
स्रोत / ग्रन्थ स्कन्द पुराण (काशी खण्ड)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त कार्तिक मास, एकादशी, गुरुवार, देवदीपावली
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
श्रीमत्सौम्यमुखाम्भोजं पञ्चनदतटस्थितम् । बिन्दुमाधवमीशानं वन्दे काशीविभूषणम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: अत्यंत सौम्य और मनोहारी मुखकमल वाले, पञ्चगंगा (पञ्चनद) के पावन तट पर विराजमान, भगवान बिन्दुमाधव, जो काशी नगरी के मुकुट-आभूषण हैं, उनकी मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Possessing a serene and charming lotus countenance, seated upon the banks of Panchaganga, Lord Bindumadhava, the crest jewel of Kashi, I bow to You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
शङ्खचक्रधरं देवं वनमालाविभूषितम् । पीताम्बरपरीधानं बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में शंख और चक्र धारण करने वाले, वैजयन्ती वनमाला से सुशोभित और पीताम्बर पहने हुए भगवान बिन्दुमाधव की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Holding the divine conch and discus, adorned with a garland of woodland flowers, dressed in yellow silks, I take refuge in Lord Bindumadhava.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
बिन्दुतीर्थकृतावासं पञ्चगङ्गासङ्गमस्थितम् । काशीक्षेत्रपरं देवं बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: बिन्दुतीर्थ में निवास करने वाले, पञ्चगंगा के दिव्य संगम पर स्थित और काशी क्षेत्र के प्रधान रक्षक देव भगवान बिन्दुमाधव का मैं आश्रय लेता हूँ।
English Translation: Dwelling in Bindu Teertha, presiding at the holy confluence of Panchaganga, supreme guardian deity of Kashi, I surrender to Bindumadhava.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
अग्निबिन्दुमुनिस्तुतं भक्तवात्सल्यतत्परम् । लक्ष्मीसमेतं गोविन्दं बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: महर्षि अग्निबिन्दु द्वारा स्तुति किए गए, भक्तों पर वात्सल्य प्रेम बरसाने में तत्पर और माता लक्ष्मी सहित विराजमान गोविन्द स्वरूप बिन्दुमाधव की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Extolled by Sage Agnibindu, overflowing with parental affection toward devotees, joined with Mahalakshmi, I seek refuge in Govinda Bindumadhava.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
सर्वपापहरं पुण्यं मुक्तिदं कामदं नृणाम् । चतुर्भुजं महाशान्तं बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: मनुष्यों के समस्त पापों को हरने वाले, परम पावन, मनोकामनाएं पूरी करने वाले, मोक्ष प्रदाता, चार भुजाओं वाले और परम शांत स्वरूप बिन्दुमाधव का मैं आश्रय लेता हूँ।
English Translation: Eradicator of all sins, pure, bestower of desires and liberation on mortals, four-armed and supremely tranquil, I take shelter in Bindumadhava.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
कार्तिके मासि यत्स्नानं पञ्चनद्यां कृतं जनैः । तस्मै ददाति वैकुण्ठं बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: कार्तिक मास में जो मनुष्य पञ्चगंगा तीर्थ में स्नान करते हैं, उन्हें जो साक्षात् वैकुण्ठ धाम प्रदान करते हैं, उन भगवान बिन्दुमाधव की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Whoever bathes in Panchaganga during the sacred month of Kartika is rewarded with the eternal abode of Vaikuntha by Bindumadhava, in whom I take refuge.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
गङ्गातरङ्गसंस्पृष्टपादपद्मयुगं विभुम् । विश्वम्भरं परं धाम बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: गंगा जी की तरंगें जिनके दोनों चरण कमलों का नित्य स्पर्श कर धन्य होती हैं, जो संपूर्ण विश्व का भरण-पोषण करने वाले सर्वव्यापी परम धाम हैं, उन बिन्दुमाधव का मैं आश्रय लेता हूँ।
English Translation: Whose dual lotus feet are continually touched by the holy waves of Ganga, all-pervading sustainer of the cosmos, supreme refuge, I surrender to Bindumadhava.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
अनाथदीनशरणं कृपामृतमहोदधिम् । संसारतारकं विष्णुं बिन्दुमाधवमाश्रये ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: अनाथों और दीन-दुखियों की शरण, करुणा रूपी अमृत के अगाध महासागर और संसार-सागर से पार उतारने वाले भगवान विष्णु स्वरूप बिन्दुमाधव की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Sanctuary of the orphan and destitute, ocean of nectarine grace, ferryman across worldly existence, Lord Vishnu as Bindumadhava, I take refuge in You.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
बिन्दुमाधवाष्टकं पुण्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः । सर्वान् कामानवाप्नोति विष्णोः पदमवाप्नुयात् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पवित्र होकर संयमपूर्वक इस पावन बिन्दुमाधव अष्टकम का पाठ करता है, वह इस संसार में समस्त भोग और सुख प्राप्त करता है तथा अंत में भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever recites this sacred Bindumadhava Ashtakam with purity and devotion attains all cherished desires and reaches the supreme abode of Lord Vishnu.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीस्कन्दपुराणे काशीखण्डे श्री बिन्दुमाधव अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 कार्तिक मास में अथवा किसी भी गुरुवार को प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
  • 2 भगवान बिन्दुमाधव के चित्र या शालिग्राम जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और तुलसीदल अर्पित करें।
  • 3 काशी क्षेत्र का स्मरण करते हुए 'बिन्दुमाधवमाश्रये' पद के साथ अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ काशी में पञ्चगंगा तीर्थ पर स्नान करने और बिन्दुमाधव के दर्शन का अलौकिक पुण्य प्राप्त होता है।
  • ✔ कार्तिक मास में दीपदान और इस अष्टक के पाठ से पितृदोष शांत होते हैं और वंश की वृद्धि होती है।
  • ✔ समस्त पापों का क्षय होकर अंत समय में भगवान श्रीहरि के परम वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: कार्तिक मास, एकादशी, गुरुवार, देवदीपावली