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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती भुवनेश्वरी (चौथी महाविद्या) • 9 श्लोक

भुवनेश्वरी अष्टकम

समस्त ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री माता भुवनेश्वरी का यह अष्टक साधक को समस्त राजसी सुख, धन, ऐश्वर्य, सौंदर्य और जीवन में सर्वोच्च पद प्रदान करता है।

रचयिता रुद्रयामल तन्त्र
स्रोत / ग्रन्थ रुद्रयामल तन्त्र / शक्ति प्रमोद
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त शुक्रवार, पूर्णिमा, नवरात्रि, अष्टमी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
उद्यद्दिनकरद्योतां बालार्ककिरणारुणाम् । पाशाङ्कुशधरां देवीं वन्दे भुवनमातरम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: उगते हुए सूर्य के समान दिव्य कांति वाली, बाल सूर्य की लाल किरणों जैसी आभा वाली, हाथों में पाश और अंकुश धारण करने वाली संपूर्ण ब्रह्माण्ड की जननी माता भुवनेश्वरी की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Radiant like the rising morning sun, crimson-hued like early dawn, holding the noose and elephant goad, I bow to Mother Bhuvaneshwari, creatress of the cosmos.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
त्रिनेत्रां रक्तवसनां मकुटेन विराजिताम् । वरदाभयहस्तां च वन्दे भुवनमातरम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: तीन सुंदर नेत्रों वाली, लाल रेशमी वस्त्र धारण करने वाली, दिव्य मुकुट से सुशोभित तथा भक्तों को वरद और अभय मुद्रा प्रदान करने वाली जगज्जननी भुवनेश्वरी को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Possessing three compassionate eyes, attired in crimson robes, crowned with resplendent jewels, granting boons and fearlessness, I bow to Mother Bhuvaneshwari.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
कोटिकन्दर्पलावण्यां मन्दारकुसुमार्चिताम् । चिन्तामणिगृहस्थां तां वन्दे भुवनमातरम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: करोड़ों कामदेवों के समान अनुपम सौंदर्य वाली, कल्पवृक्ष के मंदार पुष्पों से पूजित तथा मणिद्वीप के चिन्तामणि महल में निवास करने वाली संपूर्ण भुवनों की माता को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Of beauty surpassing millions of Cupids, worshipped with celestial Mandara flowers, dwelling in the Chintamani palace of Manidvipa, I revere the Mother of worlds.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
सौम्यवक्त्रां सुहासां च चारुचन्द्रकलावताम् । परमानन्दरूपिणीं वन्दे भुवनमातरम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: सौम्य और मनोहर मुख वाली, मंद मुस्कान से युक्त, मस्तक पर सुंदर चन्द्रकला धारण करने वाली तथा परमानंद स्वरूपा जगन्माता भुवनेश्वरी को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Graced with a serene countenance and gentle smile, adorned with the lovely crescent moon, the very embodiment of supreme transcendental joy, I bow to Her.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
सर्वैश्वर्यप्रदात्रीं च सर्वदुष्टविनाशिनीम् । भक्तानामार्तिहन्त्रीं च वन्दे भुवनमातरम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त ऐश्वर्य और ऋद्धि-सिद्धि देने वाली, समस्त दुष्टों और आसुरी शक्तियों का नाश करने वाली तथा अपने भक्तों के दुःखों को हरने वाली माता भुवनेश्वरी की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Bestower of all sovereign prosperity, vanquisher of all evil forces, eradicating the afflictions of devoted seekers, I bow to the universal Mother.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
ह्रींकारबीजसंयुक्तां नादबिन्दुसमन्विताम् । ब्रह्मविद्यां महाविद्यां वन्दे भुवनमातरम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जो 'ह्रीं' बीज मंत्र की अधिष्ठात्री हैं, नाद और बिंदु से समन्वित हैं, साक्षात् ब्रह्मविद्या और सर्वोच्च महाविद्या हैं, उन भुवनेश्वरी माता को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Residing within the supreme Hrim seed syllable, infused with cosmic Nada and Bindu, absolute wisdom incarnate, supreme Mahavidya, I salute Mother Bhuvaneshwari.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
त्रैलोक्यपालिनीं धन्यां भुवनत्रयमोहिनीम् । सर्वमङ्गलदात्रीं च वन्दे भुवनमातरम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: तीनों लोकों का पालन-पोषण करने वाली, धन्य स्वरूपा, तीनों भुवनों को सम्मोहित करने वाली और समस्त मंगल प्रदान करने वाली माता भुवनेश्वरी को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Nourisher of the triple realms, glorious enchantress of all creation, bestower of all auspicious fortunes, I bow to Mother Bhuvaneshwari.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
शरण्ये सर्वलोकानां कृपापीयूषसागरे । प्रसीद जगतां मातर्वन्दे भुवनमातरम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त लोकों की परम शरण्य, करुणा रूपी अमृत की अगाध सागर, हे संपूर्ण जगत की माता भुवनेश्वरी! मुझ पर प्रसन्न होइए, मैं आपकी वंदना करता हूँ।
English Translation: Supreme sanctuary of all worlds, ocean of nectarine grace, be gracious unto me, O Mother of all existence! I bow to You, Bhuvaneshwari.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
भुवनेश्वर्यष्टकं पुण्यं यः पठेद्भक्तितत्परः । सर्वान् कामानवाप्नोति देवीलोके महीयते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस पावन भुवनेश्वरी अष्टकम का पाठ करता है, वह इस संसार में समस्त भोग और ऐश्वर्य प्राप्त करता है तथा अंत में देवी के परम मणिद्वीप लोक में प्रतिष्ठित होता है।
English Translation: Whoever recites this holy Bhuvaneshwari Ashtakam with sincere devotion accomplishes all desires and ascends to supreme glory in the divine realm of the Mother.
✨ समाप्ति
।। इति रुद्रयामलतन्त्रोक्तं श्री भुवनेश्वरी अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर लाल वस्त्र पहनें और पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
  • 2 माता भुवनेश्वरी के चित्र या यंत्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और लाल पुष्प अर्पित करें।
  • 3 ह्रीं (ह्रींकार) बीज का ध्यान करते हुए इस अष्टक का ३ या ७ बार पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ साधक को समाज में मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता, राजनीति और उच्च पदों में सफलता मिलती है।
  • ✔ दरिद्रता, अभाव और हीनभावना समाप्त होकर राजयोग जैसे सुख और आकर्षण की वृद्धि होती है।
  • ✔ वाक-सिद्धि, सौंदर्य, परिवार में अखंड समृद्धि और अंत में देवी लोक की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: शुक्रवार, पूर्णिमा, नवरात्रि, अष्टमी