Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान अच्युत (श्रीविष्णु / कृष्ण) • 9 श्लोक

अच्युताष्टकम्

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र "अच्युतं केशवं रामनारायणं" जैसे परम पावन नामों का संकीर्तन करते हुए साधक को समस्त भयों से मुक्त कर वैकुण्ठ पद प्रदान करता है।

रचयिता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ विष्णु स्तोत्र साहित्य
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचंद्रं भजे ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: अच्युत, केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर, माधव, गोपियों के वल्लभ और जानकीनाथ भगवान रामचंद्र का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: I worship Lord Achyuta, Keshava, Rama, Narayana, Krishna, Damodara, Vasudeva, Hari, Sridhara, Madhava, beloved of the Gopis, and Ramachandra the Lord of Janaki.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् । इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: अच्युत, केशव, सत्यभामा के स्वामी, माधव, श्रीधर, राधिका द्वारा पूजित, लक्ष्मी के निवास स्थान, मन को मोहने वाले सुंदर देवकीनंदन और नंद के लाड़ले का मैं ध्यान करता हूँ।
English Translation: I meditate on Achyuta, Keshava, Lord of Satyabhama, Madhava, Sridhara, adored by Radhika, abode of Indira (Lakshmi), heart-enchanting, son of Devaki and joy of Nanda.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये । वल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: विष्णु, सर्वविजयी जिष्णु, शंख और चक्र धारण करने वाले, रुक्मिणी के प्रेमी, सीता के पति, गोपियों के प्रिय, पूजनीय परमात्मा, कंस का संहार करने वाले और मुरलीधर को नमस्कार है।
English Translation: Salutations to Vishnu, victorious conqueror, wielder of conch and discus, beloved of Rukmini, consort of Janaki, lover of cowherd maidens, Supreme Soul, slayer of Kamsa, flutist divine.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कंसविध्वंसिनं केशिहाणं हरिं मुष्टिकानाशनं पूतनाहारिणम् । शूरवंशोद्भवं वासुदेवं विभुं देवकीनन्दनं नन्दसूनुं भजे ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: कंस का संहार करने वाले, केशी दैत्य को मारने वाले, मुष्टिक पहलवान का नाश करने वाले, पूतना का उद्धार करने वाले, शूरसेन वंश में प्रकट, सर्वसमर्थ वासुदेव और देवकीनंदन का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: Slayer of Kamsa, destroyer of Keshi, vanquisher of Mushtika, liberator of Putana, born in the lineage of Shura, all-pervading Vasudeva, son of Devaki and Nanda, I worship Him.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
वृन्दान्ते विहारिणं गोपगोपीयुतं वेणुनादप्रियं सर्वसंसारदम् । गोकुलानन्दिनं नन्दनन्दनं रामचन्द्रं भजे ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: वृन्दावन में गोप-गोपियों के साथ विहार करने वाले, बांसुरी की धुन से प्रेम करने वाले, गोकुल को आनंदित करने वाले और नंदनंदन श्रीरामचन्द्र का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: Sporting in Vrindavan with cowherds and milkmaids, lover of the flute song, delight of Gokula, son of Nanda, and Lord Ramachandra, I offer my worship.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
धन्विने बाणिने रावणान्तं कृते जानकीशोभितायाङ्गिने शान्तिदे । लक्ष्मणेनान्विते वानरैः सेविते सेतुबन्धप्रिये रामचन्द्राय ते ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: धनुष-बाण धारण करने वाले, रावण का अंत करने वाले, सीता जी से सुशोभित, शांति प्रदाता, लक्ष्मण सहित, वानरों द्वारा सेवित और सेतुबंध का निर्माण करने वाले श्रीरामचन्द्र को नमस्कार है।
English Translation: Bearer of bow and arrows, slayer of Ravana, beautified by Janaki, bestower of peace, accompanied by Lakshmana, served by Vanaras, builder of the ocean bridge, to Ramachandra be my salutations.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
केतुभस्मप्रिये शङ्खपाशधरे शार्ङ्गधन्वे गदाधारिणे पाणिने । सर्वलोकैकनाथाय कारुण्यते विष्णवे प्रभविष्णवे नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: शंख, शार्ङ्ग धनुष और गदा धारण करने वाले, समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी, परम दयालु, सर्वव्यापक और सर्वसमर्थ प्रभु विष्णु को मेरा नमस्कार है।
English Translation: Bearing the conch, Sharnga bow, and mace in hand, sole sovereign Lord of all realms, full of compassion, all-pervading and all-powerful Lord Vishnu, salutations to You.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
अच्युतस्याष्टकं यः पठेदिष्टदं प्रेमतः प्रत्यहं पूरुषः सस्पृहम् । वृत्ततः सुन्दरं कर्तृविश्वं प्रभुं याति विष्णोः पदं नात्र कार्या विचारः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रेम और श्रद्धा से नित्य इस अभीष्टदायक अच्युताष्टकम् का पाठ करता है, वह इस संसार के बंधनों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परम पद को प्राप्त करता है, इसमें कोई संशय नहीं है।
English Translation: Whoever recites daily with deep love and devotion this wish-fulfilling Achyutashtakam attains the eternal abode of Lord Vishnu without a doubt.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
अच्युताष्टकमिदं पुण्यं सर्वपापप्रणाशनम् । यः पठेत् प्रातरुत्थाय स भवेद् वैष्णवो नरः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त पापों का नाश करने वाले इस पवित्र अच्युताष्टक का जो प्रातःकाल उठकर पाठ करता है, वह श्रेष्ठ वैष्णव बनकर भगवान का सान्निध्य पाता है।
English Translation: This meritorious Achyutashtakam dispels all sins; whoever recites it upon rising at dawn becomes a true devotee and attains divine proximity.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं अच्युताष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें।
  • 2 भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर तुलसी पत्र अर्पित करें।
  • 3 मधुर स्वर में करबद्ध होकर अच्युताष्टकम् का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ मृत्यु भय, बुरे स्वप्न और संकटों का तत्काल निवारण।
  • ✔ पापों का क्षय और जीवन में परम शांति एवं संतुष्टि।
  • ✔ श्रीविष्णु की अविचल भक्ति और वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा