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🔥 सिद्ध बाबा बालक नाथ ⏰ रविवार, प्रातः व सांध्य आरती, चैत्र मास

श्री बाबा बालक नाथ जी की आरती

सिद्ध शिरोमणि बाबा बालक नाथ भगवान शिव के अनन्य अंश हैं। इनकी आराधना से असाध्य संकट, रोग और कष्ट तुरंत नष्ट होते हैं।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय कलाधारी हरे॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

2

दूधाहारी दयालु, शाहतलाई वासा। रोट का भोग लगे, पूरण हो आशा॥

3

अमर गुफा में ध्यान धरत, शिव का अवतार। चिमटा त्रिशूल सोहे, महिमा अपरम्पार॥

4

माता रत्नो की गऊ चराई, बारह वर्ष बिताए। छाछ और रोटी को, पल में प्रगट कराए॥

5

गरुड़ पर असवार होके, धूणे को प्रगटाया। सिद्धों के सरताज, जग का दुःख मिटाया॥

6

जो नर निशदिन ध्यावे, श्रद्धा भाव धरे। मनवांछित फल पाकर, भवसागर तरे॥

7

आरती बाबा बालकनाथ की, जो कोई नर गावे। सुख सम्पति आनन्द, निशदिन सो पावे॥

8

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय कलाधारी हरे॥

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Sacred Aarti Exposition & Meaning · आरती भावार्थ व सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Baba Balak Nath Aarti

This sacred Aarti is an offering of light and camphor flame to Baba Balak Nath. In Sanatan Dharma, the Aarti ritual symbolizes burning away ego and illuminating life with the divine presence of the Supreme.

✨ Stanza-by-Stanza Devotional Significance

✦ Refrain & Salutations

Hails the glory of Baba Balak Nath, expressing deep devotional surrender.

✦ Divine Attributes & Feats

Recalls the protective acts and compassionate pastimes performed for devotees.

✦ Boon of Peace & Grace

Prays for forgiveness of human shortcomings, protection from distress, and permanent auspiciousness in the home.

🌟 Spiritual Fruits & Vastu Household Blessings (आरती फल)

Performing this Aarti at dawn or dusk cleanses household energy (Vastu), dissolves fear, and cultivates loving peace and harmony.

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

बाबा जी को रोट (मीठी रोटी), हलवा और दूध का भोग लगाएं, धूप-धूनी जलाएं और प्रेमपूर्वक आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

असाध्य रोगों, भूत-प्रेत बाधाओं और शत्रुओं से रक्षा होती है, परिवार में सुख और शांति का संचार होता है।