श्री ललिता अष्टोत्तर शतनामावली || Sri Lalitha Ashtottara Shatanamavali

ॐ रजताचल शृङ्गाग्र मध्यस्थायै नमः
ॐ हिमाचल महावंश पावनायै नमः
ॐ शङ्करार्धाङ्ग सौन्दर्य शरीरायै नमः
ॐ लसन्मरकत स्वच्च विग्रहायै नमः
ॐ महातिशय सौन्दर्य लावण्यायै नमः

ॐ शशाङ्कशेखर प्राणवल्लभायै नमः
ॐ सदा पञ्चदशात्मैक्य स्वरूपायै नमः
ॐ वज्रमाणिक्य कटक किरीटायै नमः
ॐ कस्तूरी तिलकोल्लासित निटलायै नमः
ॐ भस्मरेखाङ्कित लसन्मस्तकायै नमः ॥ 10 ॥

ॐ विकचाम्भोरुहदल लोचनायै नमः 
ॐ शरच्चाम्पेय पुष्पाभ नासिकायै नमः
ॐ लसत्काञ्चन ताटङ्क युगलायै नमः
ॐ मणिदर्पण सङ्काश कपोलायै नमः
ॐ ताम्बूलपूरितस्मेर वदनायै नमः
ॐ सुपक्वदाडिमीबीज वदनायै नमः
ॐ कम्बुपूग समच्छाय कन्धरायै नमः
ॐ स्थूलमुक्ताफलोदार सुहारायै नमः
ॐ गिरीशबद्दमाङ्गल्य मङ्गलायै नमः
ॐ पद्मपाशाङ्कुश लसत्कराब्जायै नमः ॥ 20 ॥

ॐ पद्मकैरव मन्दार सुमालिन्यै नमः
ॐ सुवर्ण कुम्भयुग्माभ सुकुचायै नमः
ॐ रमणीयचतुर्भाहु संयुक्तायै नमः
ॐ कनकाङ्गद केयूर भूषितायै नमः
ॐ बृहत्सौवर्ण सौन्दर्य वसनायै नमः
ॐ बृहन्नितम्ब विलसज्जघनायै नमः

ॐ सौभाग्यजात शृङ्गार मध्यमायै नमः
ॐ दिव्यभूषणसन्दोह रञ्जितायै नमः
ॐ पारिजातगुणाधिक्य पदाब्जायै नमः
ॐ सुपद्मरागसङ्काश चरणायै नमः ॥ 30 ॥

ॐ कामकोटि महापद्म पीठस्थायै नमः 
ॐ श्रीकण्ठनेत्र कुमुद चन्द्रिकायै नमः
ॐ सचामर रमावाणी विराजितायै नमः
ॐ भक्त रक्षण दाक्षिण्य कटाक्षायै नमः
ॐ भूतेशालिङ्गनोध्बूत पुलकाङ्ग्यै नमः
ॐ अनङ्गभङ्गजन कापाङ्ग वीक्षणायै नमः
ॐ ब्रह्मोपेन्द्र शिरोरत्न रञ्जितायै नमः 
ॐ शचीमुख्यामरवधू सेवितायै नमः
ॐ लीलाकल्पित ब्रह्माण्डमण्डलायै नमः
ॐ अमृतादि महाशक्ति संवृतायै नमः ॥ 40 ॥

ॐ एकापत्र साम्राज्यदायिकायै नमः
ॐ सनकादि समाराध्य पादुकायै नमः
ॐ देवर्षभिस्तूयमान वैभवायै नमः
ॐ कलशोद्भव दुर्वास पूजितायै नमः
ॐ मत्तेभवक्त्र षड्वक्त्र वत्सलायै नमः 
ॐ चक्रराज महायन्त्र मध्यवर्यै नमः
ॐ चिदग्निकुण्डसम्भूत सुदेहायै नमः
ॐ शशाङ्कखण्डसंयुक्त मकुटायै नमः
ॐ मत्तहंसवधू मन्दगमनायै नमः
ॐ वन्दारुजनसन्दोह वन्दितायै नमः ॥ 50 ॥

ॐ अन्तर्मुख जनानन्द फलदायै नमः
ॐ पतिव्रताङ्गनाभीष्ट फलदायै नमः 

ॐ अव्याजकरुणापूरपूरितायै नमः
ॐ नितान्त सच्चिदानन्द संयुक्तायै नमः
ॐ सहस्रसूर्य संयुक्त प्रकाशायै नमः
ॐ रत्नचिन्तामणि गृहमध्यस्थायै नमः
ॐ हानिवृद्धि गुणाधिक्य रहितायै नमः
ॐ महापद्माटवीमध्य निवासायै नमः
ॐ जाग्रत् स्वप्न सुषुप्तीनां साक्षिभूत्यै नमः
ॐ महापापौघपापानां विनाशिन्यै नमः ॥ 60 ॥

ॐ दुष्टभीति महाभीति भञ्जनायै नमः
ॐ समस्त देवदनुज प्रेरकायै नमः
ॐ समस्त हृदयाम्भोज निलयायै नमः
ॐ अनाहत महापद्म मन्दिरायै नमः
ॐ सहस्रार सरोजात वासितायै नमः
ॐ पुनरावृत्तिरहित पुरस्थायै नमः
ॐ वाणी गायत्री सावित्री सन्नुतायै नमः
ॐ रमाभूमिसुताराध्य पदाब्जायै नमः
ॐ लोपामुद्रार्चित श्रीमच्चरणायै नमः
ॐ सहस्ररति सौन्दर्य शरीरायै नमः ॥ 70 ॥

ॐ भावनामात्र सन्तुष्ट हृदयायै नमः
ॐ सत्यसम्पूर्ण विज्ञान सिद्धिदायै नमः
ॐ त्रिलोचन कृतोल्लास फलदायै नमः
ॐ सुधाब्धि मणिद्वीप मध्यगायै नमः
ॐ दक्षाध्वर विनिर्भेद साधनायै नमः
ॐ श्रीनाथ सोदरीभूत शोभितायै नमः
ॐ चन्द्रशेखर भक्तार्ति भञ्जनायै नमः
ॐ सर्वोपाधि विनिर्मुक्त चैतन्यायै नमः

ॐ नामपारायणाभीष्ट फलदायै नमः
ॐ सृष्टि स्थिति तिरोधान सङ्कल्पायै नमः ॥ 80 ॥

ॐ श्रीषोडशाक्षरि मन्त्र मध्यगायै नमः
ॐ अनाद्यन्त स्वयम्भूत दिव्यमूर्त्यै नमः
ॐ भक्तहंस परीमुख्य वियोगायै नमः
ॐ मातृ मण्डल संयुक्त ललितायै नमः
ॐ भण्डदैत्य महसत्त्व नाशनायै नमः
ॐ क्रूरभण्ड शिरछ्चेद निपुणायै नमः
ॐ धात्र्यच्युत सुराधीश सुखदायै नमः
ॐ चण्डमुण्डनिशुम्भादि खण्डनायै नमः
ॐ रक्ताक्ष रक्तजिह्वादि शिक्षणायै नमः
ॐ महिषासुरदोर्वीर्य निग्रहयै नमः ॥ 90 ॥

ॐ अभ्रकेश महोत्साह कारणायै नमः
ॐ महेशयुक्त नटन तत्परायै नमः
ॐ निजभर्तृ मुखाम्भोज चिन्तनायै नमः
ॐ वृषभध्वज विज्ञान भावनायै नमः
ॐ जन्ममृत्युजरारोग भञ्जनायै नमः

ॐ विदेहमुक्ति विज्ञान सिद्धिदायै नमः
ॐ कामक्रोधादि षड्वर्ग नाशनायै नमः
ॐ राजराजार्चित पदसरोजायै नमः
ॐ सर्ववेदान्त संसिद्द सुतत्त्वायै नमः
ॐ श्री वीरभक्त विज्ञान निधानायै नमः ॥ 100 ॥

ॐ आशेष दुष्टदनुज सूदनायै नमः
ॐ साक्षाच्च्रीदक्षिणामूर्ति मनोज्ञायै नमः
ॐ हयमेथाग्र सम्पूज्य महिमायै नमः
ॐ दक्षप्रजापतिसुत वेषाढ्यायै नमः

ॐ सुमबाणेक्षु कोदण्ड मण्डितायै नमः
ॐ नित्ययौवन माङ्गल्य मङ्गलायै नमः
ॐ महादेव समायुक्त शरीरायै नमः
ॐ महादेव रत्यौत्सुक्य महदेव्यै नमः 
ॐ चतुर्विंशतन्त्र्यैक रूपायै ॥108 ॥

    ॥ श्री ललिताष्टोत्तर शतनामावलि सम्पूर्णम् ॥

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