राधिकाधिपाष्टकम् || Radhika Dipa Ashtakam || Radhikadhipa Ashtakam

चतुर्मुखादिसंस्तुतं समस्तसात्वतानुतम्
हलायुधादिसंयुतं नमामि राधिकाधिपम् ॥१॥

बकादिदैत्यकालकं सगोपगोपिपालकम्
मनोहरासितालकं नमामि राधिकाधिपम् ॥२॥

सुरेन्द्रगर्वभञ्जनं विरञ्चिमोहभञ्जनम्
व्रजाङ्गनानुरञ्जनं नमामि राधिकाधिपम् ॥३॥

मयूरपिच्छमण्डनं गजेन्द्रदन्तखण्डनम्
नृशंसकंसदण्डनं नमामि राधिकाधिपम् ॥४॥

प्रदत्तविप्रदारकं सुदामधामकारकम्
सुरद्रुमापहारकं नमामि राधिकाधिपम् ॥५॥

धनञ्जयजयावहं महाचमूक्षयावहम्
पितामहव्यथापहं नमामि राधिकाधिपम् ॥६॥

मुनीन्द्रशापकारणं यदुप्रजापहारणम्
धराभरावतारणं नमामि राधिकाधिपम् ॥७॥

सुवृक्षमूलशायिनं मृगारिमोक्षदायिनम्
स्वकीयधाममायिनं नमामि राधिकाधिपम् ॥८॥

इदं समाहितो हितं वराष्टकं सदा मुदा
जपञ्जनो जनुर्जरादितो द्रुतं प्रमुच्यते ॥९॥

 Radha Dipa Ashtakam

 Radhika Dipa Ashtakam 


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