श्री हयग्रीव स्तोत्र || Hayagreeva Stotra || 

हयग्रीव हयग्रीव हयग्रीवेति वादिनम् ।
नरं मुञ्चन्ति पापानि दरिद्रमिव योषितः॥१॥

हयग्रीव हयग्रीव हयग्रीवेति यो वदेत्।
तस्य निस्सरते वाणी जह्नुकन्याप्रवाहवत् ॥२॥

हयग्रीव हयग्रीव हयग्रीवेति यो ध्वनिः।
विशोभते च वैकुण्ठकवाटोद्घाटनक्षमः ॥३॥

श्लोकत्रयमिदं पुण्यं हयग्रीवपदाङ्कितम्।
वादिराज यतिप्रोक्तं पठतां संपदां पदम् ॥४॥

Hayagreeva Stotra

Hayagreeva Stotra


Post a Comment

Help us to Build Neat & Clean Content.if you have any information or useful content related to this site. Please Let us know and we are happy to update our content or Publish new Content on this website.

नया पेज पुराने