Rudraksh ko kaise Pahchane



आमतौर पर आपने देखा होगा की आजकल किसी भी शहर के बाजार में रुद्राक्ष हर दुकान ,चौराहे पर बक रहा हैं और कई नामी कम्पनिया भी इसे बेच रही है, परन्तु इसकी पहचान करना बहुत ही कठिन है। 


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Rudraksh Mala


एक मुखी व एकाधिक मुखी रुद्राक्ष महंगे होने के कारण नकली भी बाजार में बिक रहेहै। 

नकली मनुष्य असली के रूप में इन्हे खरीद तो लेता है परन्तु उसका फल नही मिलता।  

जिस कारण वह रुद्राक्ष के फायदे से वंचित रह जाता है व जीवन भर उसकी मन में यह धारणा रहती है कि रुद्राक्ष एक बेकार वस्तु है।



रूद्राक्ष धारण करने से जहां आपको ग्रहों से लाभ प्राप्त होगा वहीं आप शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे। 

ऊपरी हवाओं से भी सदैव मुक्त रहेंगे क्योंकि जो व्यक्ति कोई भी रूद्राक्ष धारण करता है उसे भूत पिशाच आदि की कभी भी कोई समस्या नहीं होती है। 

वह व्यक्ति बिना किसी भय के कहीं भी भ्रमण कर सकता हैं| 

रुद्राक्ष सिद्धिदायक, पापनाशक, पुण्यवर्धक, रोगनाशक, तथा मोक्ष प्रदान करने वाला है| 

शिव पुराण में कहा गया है कि रुद्राक्ष या इसकी भस्म को धारण करके ‘नमः शिवाय’ मंत्र  का जप करने वाला मनुष्य शिव रूप हो जाता है|


शास्त्रों में कहा गया है की जो भक्त रुद्राक्ष धारण करते हैं भगवान भोलेनाथ उनसे हमेशा प्रसन्न रहते हैं। 

लेकिन सवाल यह उठता है अक्सर लोगों को रुद्राक्ष की असली माला नहीं मिल पाती है जिससे भगवान शिव की आराधना में खासा प्रभाव नहीं पड़ता है। 

अब हम आपको रुद्राक्ष के बारे में कुछ जानकारियां देने जा रहे हैं जिसके द्वारा आप असली और नकली रूद्राक्ष की पहचान कर सकते है और किस तरह नकली रूद्राक्ष बनाया जाता है रुद्राक्ष तन-मन की बहुत सी बीमारियों में राहत पहुँचाता है। 

इसे पहनने से दिल की धड़कन तथा रक्तचाप नियंत्रण में रहता है। 

ऐसा कहा जाता है कि रुद्राक्ष धारण करनेवाले व्यक्ति को देर से बुढ़ापा आता है।



असली रुद्राक्ष की पहचान के कुछ तरीके बताए जा रहे हैं जो इस प्रकार हैं.

रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को कुछ घंटे के लिए पानी में उबालें यदि रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर किसी प्रकार का कोई असर न हो, तो वह असली होगा.

रुद्राक्ष को काटने पर यदि उसके भीतर उतने ही घेर दिखाई दें जितने की बाहर हैं तो यह असली रुद्राक्ष होगा. यह परीक्षण सही माना जाता है,किंतु इसका नकारात्मक पहलू यह है कि रुद्राक्ष नष्ट हो जाता है.

रुद्राक्ष की पहचान के लिए उसे किसी नुकिली वस्तु द्वारा कुरेदें यदि उसमे से रेशा निकले तो समझें की रुद्राक्ष असली है.

दो असली रुद्राक्षों की उपरी सतह यानि के पठार समान नहीं होती किंतु नकली रुद्राक्ष के पठार समान होते हैं.

एक अन्य उपाय है कि रुद्राक्ष को पानी में डालें अगर यह डूब जाए, तो असली होगा. 

यदि नहीं डूबता तो नकली लेकिन यह जांच उपयोगी नहीं  मानी जाती है  |

क्योंकि रुद्राक्ष के डूबने या तैरने की क्षमता उसके घनत्व एवं कच्चे या पके होने पर निर्भर करती है और रुद्राक्ष मेटल या किसी अन्य भारी चीज से भी बना रुद्राक्ष भी पानी में डूब जाता है.

एक अन्य उपयोग द्वारा रुद्राक्ष के मनके को तांबे के दो सिक्कों के बीच में रखा जाए, तो थोड़ा सा हिल जाता है

क्योंकि रुद्राक्ष में चुंबकत्व होता है जिस की वजह से ऐसा होता है.

कहा जाता है कि दोनो अंगुठों के नाखूनों के बीच में रुद्राक्ष को रखें यदि वह घुमता है तो असली होगा अन्यथा नकली परंतु यह तरीका भी सही नही है.

एक मुखी रुद्राक्ष को ध्यानपूर्वक देखने पर उस पर त्रिशूल या नेत्र के चिन्ह का आभास होता है. 

रुद्राक्ष के दानों को तेज धूप में काफी समय तक रखने से अगर रुद्राक्ष पर दरार न आए या वह टूटे नहीं तो असली माने जाते हैं.


रुद्राक्ष को खरीदने से पहले कुछ मूलभूत बातों का अवश्य ध्यान रखें  जैसे की  रुद्राक्ष में किडा़ न लगा हो, टूटा-फूटा न हो, पूर्ण गोल न हो,  जो रुद्राक्ष छिद्र करते हुए फट जाए इत्यादि रुद्राक्षों को धारण नहीं करना चाहिए .

किसी व्यक्ति के लिए जो लगातार कदम पर है और जो विभिन्न स्थानों पर खाता और सोता है, रूद्राक्ष एक बहुत अच्छा समर्थन है क्योंकि यह आपकी अपनी ऊर्जा का कोकून(एकत्र) बनाता/करता है । 

आपने शायद यह ध्यान दिया होगा कि जब आप किसी नए स्थान पर जाते हैं, तो कभी-कभी आप आसानी से सो जाते हैं, जबकि कुछ अन्य जगहों पर आप सो नही पाते हैं भले ही आप शारीरिक रूप से थक गए हों।

यह भोजन की गुणवत्ता की जांच करने का भी एक तरीका है यदि आप इसे किसी भी सकारात्मक प्राण्य पदार्थ से ऊपर रखते हैं, तो यह एक दक्षिणावर्त दिशा में आगे बढ़ेगा। 

यदि आप इसे किसी भी नकारात्मक प्राण्य पदार्थ पर रख देते हैं, तो यह दक्षिणावर्त दिशा-विरोधी दिशा में आगे बढ़ेगा।

रुद्राक्ष के फायदे - Rudraksha Benefits


असली रुद्राक्ष नेगटिव एनेरजी को दूर रखता है ।

इसका काम है कि शुभकामनाएं, स्वास्थ्य, धन, सफलता लाना और बुराइयों को दूर करना ।

चार मुखी और छः मुखी रूद्राक्ष को जब तांबे के तार के साथ बांधा जाता है तो मेमोरी बढ़ाने में सहायक होता है।

इसमें वात, पित्त और कफ को संतुलित करने की गहराई से क्षमता है। कफ को नियंत्रित करने में पानी के साथ अपना पाउडर लेना फायदेमंद है।

यह विद्युत-चुंबकीय (electro-magnetic properties) गुणों के साथ जुड़ा हुआ है, जो रक्तचाप (blood pressure) को नियंत्रित करने में अच्छा है। 

यह शरीर में गर्मी को विश्राम करने में मदद करता है। 

2 मुखी रूद्राक्ष ( 2 Mukhi Rudraksha )और स्वर्णमिक्क की राख के बराबर अनुपात में पीने से उच्च रक्तचाप कम हो सकता है।

यह त्वचा रोगों, घावों, चोटों, त्वचा की जलन और खुजली के उपचार में सहायक है। 

जब पवित्रता वाला मनका रात भर पानी से भरा तांबे के बर्तन में डाल दिया जाता है, और सुबह में पानी पीता है तो एक खाली पेट त्वचा रोगों के इलाज में फायदेमंद होता है। 

9 मुखी रूद्राक्ष ( 9 mukhi rudraksha benefits ) और तुलसी के पेस्ट के आवेदन घावों और चोटों के उपचार में प्रभावी हैं।

पवित्रा बीज पाउडर और सरसों का मिश्रण शरीर के दर्द का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है। 

यह जोड़ों पर लगाया जाता है और राहत देता है ।


 रुद्राक्ष को शिव के ऑंसू भी इसलिए कहते हैं क्योंकि उसके तने मे गौर से देखने में शिवजी कि ऑखें नज़र आती हैं, जैसे नीचे चित्र मे दिखाया गया है और यही कारण है कि इस पेड़ को शिव जी कि ऑखों से निकले ऑसू से जोड़ा गया है। 

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Rudraksha Shiva Eye

|| धन्यवाद ||







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